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लॉर्ड्स में फादर टाइम (Father Time Lord’s) ने अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं। ऊंचाई पर लगे इस मशहूर वेदर वेन (जो हवा की दिशा बताते हैं) की नजर पूरे लॉर्ड्स स्टेडियम पर है और आज इसे, इस स्टेडियम की नहीं, क्रिकेट की सबसे मशहूर पहचान में से एक के तौर पर सब जानते हैं। इसलिए इसके 100 साल पूरे होने का जश्न और भी ख़ास है। इसे 1926 में लॉर्ड्स में  लगाया था और तब से उसने सिर्फ हवा का मिजाज बताने की नहीं, ग्राउंड पर नजर रखने की जिम्मेदारी को भी, बखूबी निभाया है। चुपचाप हर ओवर, हर टेस्ट और इतिहास के हर पल को देखा है।

इसे किसने बनवाया था: कोई नहीं जानता क्योंकि एमसीसी को तो ये वेदर वेन, लॉर्ड्स के दूसरे ग्रैंड स्टैंड के आर्किटेक्ट सर हर्बर्ट बेकर ने, 1926 में इस स्टैंड के पूरा होने के बाद, गिफ्ट किया था। तब इसे, उनके बनाए ग्रैंड स्टैंड के ऊपर ही लगा दिया। कई क्रिकेट इतिहासकार का मानना है कि ये गिफ्ट वास्तव में उनकी तरफ से ग्रैंड स्टैंड पर काम लंबा खिंचने से हुई देरी के लिए माफी मांगने का प्रतीक था। 

अब यह वेदर वेन स्टेडियम में कहां लगा है: जो ग्रैंड स्टैंड सर हर्बर्ट बेकर ने बनाया था उसे तो तोड़ दिया। 1996 में इसकी जगह एक नया ग्रैंड स्टैंड बना। तब इस वेदर वेन और स्कोरर बॉक्स को ग्राउंड के दूसरी तरफ वहां लगा दिया जहां ये आज तक है। अब ये माउंड और टैवर्न स्टैंड के बीच लिफ्ट शाफ्ट के ऊपर लगा है। वहां एक घड़ी भी है, जिससे ये जगह, ग्राउंड का एक बड़ा ख़ास हिस्सा बन गई और दर्शकों को समय, हवा की दिशा और स्कोर इधर देखने से ही पता चलते हैं। 

ये वेदर वेन वाली आकृति क्या दिखाती है: इसे पौराणिक फादर टाइम का दर्जा दिया जिसकी तुलना कई लोग रोमन देवता जेनस से करते हैं, जो समय बीतने का प्रतीक है। क्रिकेट में, इस आकृति ने एक ऐसी बहस शुरू की जिस पर अभी तक फैसला नहीं हुआ है। इसके डिजाइन में उनके दाहिने हाथ (जो स्टंप के बगल में है) में एक बेल है। अब बहस का मुद्दा ये है कि फादर टाइम, दिन का खेल शुरू करने के प्रतीक के तौर पर स्टंप पर बेल रख रहे हैं, या दिन का खेल खत्म होने के प्रतीक के तौर पर स्टंप से बेल हटा रहे हैं?

एमसीसी की पहली क्यूरेटर डायना राइट केर ने क्रिकेट लॉ 12.3 के आधार पर माना कि वे बेल हटा रहे हैं। इसमें लिखा है, ‘समय आने पर, दोनों विकेट से बेल्स हटा दी जाएंगी।’ वैसे ज्यादातर क्रिकेट इतिहासकार ये मानते हैं कि बेल हाथ में होना, इस बात का प्रतीक है कि दिन का क्रिकेट शुरू होने वाला है।

मूर्ति की बनावट: इस लगभग 6फुट6 इंच ऊंची आकृति में, मूर्ति खुद लगभग 5फुट4इंच की है। फादर टाइम लोहे की बनी, काले पेंट वाली आकृति है जिसमें और हवा के तीर की नोक और दरांती के सिरे पर सोने का पानी चढ़ा हुआ है।

100 साल के सफ़र में हादसे: उसने भी कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।
1. दूसरे वर्ल्ड वॉर के दौरान, एक बैराज बैलून इससे टकराया और इसे ग्रैंड स्टैंड की छत से उखाड़ दिया। तब इसे वॉर के दौरान कमेटी रूम में सुरक्षित रखे रखा।  
2. 1992 में, वेदरवेन पर बिजली गिरी, जिससे उसका हाथ एक जगह से हट गया। मरम्मत की ज़रूरत थी जिसके लिए इसे पहली और आख़िरी बार लॉर्ड्स से बाहर ले गए। 
3. 2015 में तेज हवा ने इसे एक बार फिर नुकसान पहुंचाया। तब इसके 'स्पेशल कंजर्वेशन' का फैसला हुआ। इस काम के लिए इसे दो महीने के लिए अपनी जगह से हटाना पड़ा। इस दौरान एक इंग्लैंड-न्यूज़ीलैंड टेस्ट मैच खेला गया स्टेडियम में और यही वह इकलौता ऐसा टेस्ट रहा जिसे फादर टाइम के समय में खेले तो पर फादर टाइम ने इसे अपनी जगह से नहीं देखा। उससे पहले के लगातार 112 टेस्ट देखे थे। इस काम के दौरान वेदर वेन को री-बैलेंस भी किया ताकि वह हवा के रुख साथ, ज़्यादा आसानी से घूम सके।

खास जश्न: एक अनोखी कोशिश में, एमसीसी ने सोचा उन्हें भी सम्मानित करें जो फादर टाइम के 100 साल के सफर में इस दुनिया में रहे। इस कोशिश में, सैलिसबरी में रह रहे एक ऐसे एमसीसी मेंबर लेफ्टिनेंट कर्नल एंथनी कोलिन्स को ढूंढ निकाला। और कोई न मिला। एमसीसी ने 28 अप्रैल को 100 साल पूरे होने पर उन्हें भी सम्मानित किया।

फादर टाइम के जन्मदिन का रहस्य: ज्यादातर क्रिकेट इतिहास की किताबों और एमसीसी के आर्काइव में डॉक्यूमेंट्स के अनुसार बस इतना ही मानते रहे कि फादर टाइम 1926 में लॉर्ड्स में आए और उसके बाद ही उस साल का एशेज टेस्ट (26 जून से) खेला गया था। इस तरह, इसे लगाने की सही तारीख हमेशा एक रहस्य ही रही।

कुछ साल पहले एमसीसी आर्काइव टीम के एक सदस्य एलन रीस एक पुरानी एल्बम देख रहे थे तो उन्हें एक ऐसी पिक्चर मिल गई जिसमें ग्रैंड स्टैंड की छत पर एक आदमी, होठों के बीच सिगरेट दबाए, लॉर्ड्स के इस सबसे मशहूर वेदर वेन के लगने के बाद, उसे आखिरी बार ठीक कर रहा है। ऐसी पिक्चर की जिक्र तो था पर पिक्चर गायब थी। एल्बम में मिली इस पिक्चर के साथ 29 अप्रैल, 1926 की तारीख लिखी थी और इस तरह से फादर टाइम का जन्मदिन तय हो गया। 

इस साल, जब इंग्लैंड की टीम जून में न्यूजीलैंड के विरुद्ध लॉर्ड्स में टेस्ट खेलेगी तो यह लॉर्ड्स में 150वां टेस्ट होगा। इनमें से, फादर टाइम ने अपने सामने खेले 132 टेस्ट देखे हैं (सिर्फ  एक नहीं देखा)। उन्होंने विकेट के दोनों तरफ से लॉर्ड्स में आए हर बदलाव को देखा है और खुद लॉर्ड्स की पहचान में से एक बन गए।

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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