हाल ही में एडिलेड के कैरेन रॉल्टन ओवल में एडिलेड स्ट्राइकर्स और होबार्ट हरिकेंस के बीच WBBL मैच एक अजीब गड़बड़ के बाद बीच में ही रोक दिया। असल में हुआ ये कि दोनों टीम की पारी के बीच ब्रेक में एक वार्म-अप बॉल लुढ़क कर पिच पर चली गई और वहां पिच पर चल रहे रोलर के नीचे आ गई। इस से बॉल पिच में धंस गई और जब उसे वहां से हटाया तो एक छेद हो गया। पिच को हुआ नुकसान ठीक करना मुश्किल हो रहा था। नतीजा ये रहा : मैच रद्द करना पड़ा, पॉइंट्स बांट दिए और इसके साथ ही स्ट्राइकर्स प्लेऑफ़ (फ़ाइनल) की रेस से बाहर हो गए।

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क्रिकेट में कई ऐसी मिसाल हैं जब अजीब-अजीब गैर क्रिकेट वजह से खेल रुका लेकिन बॉल के पिच पर लुढ़कने से मैच रद्द होने का किस्सा तो बड़ा अजीब और अनोखा है।

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स्ट्राइकर्स ने 20 ओवर में 167-4 का स्कोर बनाया जिसमें मैडलिन पेना के 63 टॉप स्कोर थे। अभी हरिकेंस अपना रन चेज़ शुरू करने की तैयारी में थे कि ये किस्सा हो गया। ऐसा माना कि पिच पर छेद होने से पिच का मिजाज बदल जाएगा।

विश्वास कीजिए, क्रिकेट में ऐसा ही, इससे पहले भी हो चुका हुआ है और वह भी टेस्ट क्रिकेट में। 2003 में, हरारे स्पोर्ट्स क्लब, हरारे में जिम्बाब्वे और वेस्ट इंडीज़ के बीच पहले टेस्ट के तीसरे दिन का खेल इसलिए देरी से शुरू हुआ क्योंकि एक प्रैक्टिस बॉल गलती से पिच रोलर के नीचे दब गई थी। इससे पिच में छेद हो गया। तब पिच को हुए नुकसान को ठीक कर दिया और खेल फिर से शुरू हो गया जबकि WBBL मैच रद्द कर दिया।

2003 के उस टेस्ट मैच की टाइमलाइन बड़ी मजेदार है। ज़िम्बाब्वे के ट्रेवर ग्रिपर वह बल्लेबाज थे जिनके शॉट से प्रैक्टिस बॉल, पिच पर चली गई और वहां ग्राउंड स्टाफ पिच पर रोलर चला रहे थे। रोलर ऑपरेटर को, बॉल के रोलर के नीचे आने का पता न चला और रोलर बॉल के ऊपर से चल गया। नतीजा: सूखी पिच पर बॉल दबने से ग्राउंड के सिटी एंड पर एक इंच गहरा छेद हो गया।

मैच के अंपायर साइमन टॉफेल और बिली बोडेन थे। इन्होंने उसे देखा और तय किया कि इस हालत में उस पिच पर नहीं खेल सकते। सोच ये थी कि हुए नुकसान से पिच का मिजाज बदल जाएगा और गेंद उस स्पॉट से खतरनाक तरीके से उछलेगी। तब उस स्टेडियम में ऐसे छेद से खराब हुई पिच को ठीक करने का कोई इंतजाम नहीं था।

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तब, 80 के दशक में जिम्बाब्वे के लिए खेले ओपनर रॉबिन ब्राउन स्टेडियम में ग्राउंड्समैन थे। उन्होंने फौरन पास के एक गोल्फ कोर्स (रॉयल हरारे गोल्फ क्लब) से एक ऑगर (Auger :ड्रिलिंग टूल) मंगवाया। उसकी मदद से टर्फ के खराब हुए हिस्से को हटाया और उस जगह पर, स्टंप के पीछे से उखाड़े टर्फ के हिस्से को भर दिया। ये 'ऑपरेशन' ठीक वैसा ही था जैसे शरीर में एक खराब हुए अंग को हटाकर दूसरा लगा देते हैं।

भारत के गुंडप्पा विश्वनाथ उस टेस्ट में मैच रेफरी थे। मरम्मत के बाद उन्होंने दोनों कप्तान, ब्रायन लारा और हीथ स्ट्रीक के साथ पिच का इंस्पेक्शन किया। पूरी तसल्ली होने के बाद हरी झंडी दिखाई और आखिरकार 121 मिनट की देरी के बाद खेल फिर से शुरू हुआ। इस बीच हल्की बारिश भी हुई। विश्वनाथ ने तब उस सैशन में दो घंटे के खेल के लिए लंच भी आगे बढ़ा दिया था। इसके उलट, WBBL मैच में ये मान लिया कि रोलर से पिच में छेद हुआ है उससे पिच का मिजाज बदल गया है। इसलिए, मैच ऑफिशियल और अंपायरों ने आपसी बातचीत के बाद, तय किया कि स्ट्राइकर्स ने जिस पिच पर बल्लेबाजी की, वैसी हरिकेंस को मिलने वाले नहीं इसलिए मैच को बीच में ही रद्द कर दिया। ये फैसला स्ट्राइकर्स के लिए बड़ा महंगा साबित हुआ और वे फाइनल के लिए क्वालीफाई करने की रेस से बाहर हो गए।

फिर से उस हरारे टेस्ट पर लौटते हैं। दूसरे दिन कुछ देर खेल नहीं हो पाया था और उसी नुकसान की भरपाई के लिए तीसरे दिन खेल आधा घंटा पहले (स्थानीय समय के हिसाब से 9.30 बजे से) शुरू होना था। एक तरफ खेल शुरू करने की तैयारी चल रही थी तो दूसरी तरफ प्रैक्टिस करते हुए ट्रेवर ग्रिपर ने गलत टाइमिंग से खेले एक ड्राइव से प्रैक्टिस बॉल को पिच की तरफ हिट कर दिया और वहां ये ठीक रोलर के सामने आ गई। इसके दबने से पिच पर जो छेद हुआ उसे रिपेयर करने की कोशिश बड़ी सही रहीं। जब आगे खेले तो पिच देखकर किसी भी तरह का न कोई नुकसान दिखा और न महसूस हुआ। यकीन मानिए, टर्फ का जो खराब हिस्सा निकाला, उस पर रेज़िन की कोटिंग की और वह एक ऐतिहासिक आइटम के तौर पर म्यूजियम में रखा है।

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2003/04 में ब्रायन लारा की वेस्ट इंडीज टीम, जिंबाब्वे और दक्षिण अफ्रीका टूर पर गई थी। ज़िम्बाब्वे में, यह उस दो टेस्ट की सीरीज का पहला टेस्ट था। ज़िम्बाब्वे ने पहले बल्लेबाजी की और पहले दिन 284/6 पर थे। दूसरे दिन हीथ स्ट्रीक (127*: उनका पहला टेस्ट 100, जो उनके रिकॉर्ड 56वें टेस्ट में बना) ने एंडी ब्लिनॉट (91) के साथ 8वें विकेट के लिए 168 रन जोड़े जिससे ज़िम्बाब्वे ने 507/7 पर पारी समाप्त घोषित की। जब दिन का खेल खराब रोशनी की वजह से 36 मिनट पहले रोका तो वेस्टइंडीज का स्कोर 11/0 था।

खेल के इस नुकसान की भरपाई के लिए ही, तीसरे दिन खेल आधा घंटा पहले (लोकल टाइम सुबह 9:30 बजे) शुरू करने का फैसला किया था। लेफ्ट-आर्म स्पिनर रेमंड प्राइस ने 6/73 (टेस्ट में 10/161) के प्रदर्शन से अपनी टीम को पहली पारी में 172 की बढ़त दिलाई। ज़िम्बाब्वे ने आखिरी दिन लंच से पहले पारी घोषित कर दी और वेस्टइंडीज को जीत के लिए 373 रन का लक्ष्य दिया। टेस्ट में खेल बचा था दो सेशन से थोड़ा ज्यादा का। वेस्टइंडीज के बल्लेबाज इस समीकरण के दबाव में अच्छा न खेले और जब उन का 9वां विकेट गिरा तो स्कोर 204 रन था और अभी लगभग 12 ओवर बाकी थे।

यहां से रिडले जैकब्स (60*) और फिडेल एडवर्ड्स ने ढलती रोशनी में 32 मिनट और 71 गेंदों तक मुकाबला किया और अपनी टीम के लिए टेस्ट बचा लिया। ये बड़ी राहत देने वाला ड्रॉ था उनके लिए। खैर तब भी ज़िम्बाब्वे के लिए, इस ड्रॉ से उनके लगातार 11 हार का सिलसिला रुका। सच ये है कि वे जून 2001 के बाद से किसी सीनियर टेस्ट टीम पर अपनी पहली जीत के बहुत करीब थे।

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इस रोमांचक ड्रॉ के बाद, विंडीज टीम ने बुलावायो में आखिरी टेस्ट में मेजबान टीम को 128 रन से हराकर टेस्ट सीरीज जीत ली।

चरनपाल सिंह सोबती

 

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Charanpal Singh Sobti
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