भारतीय टेनिस में जिन महिला खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत की बदौलत बड़ी सफलता हासिल की है, उनमें अंकिता रैना का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अंकिता लंबे समय से एकल में भारत की नंबर वन महिला टेनिस खिलाड़ी हैं।
अंकिता रैना का जन्म 11 जनवरी 1993 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ था। अंकिता के घर का माहौल खेल से जुड़ा रहा है। उनकी मां टेबल टेनिस खेलती थी। इस वजह से बहुत कम उम्र में ही अंकिता का टेनिस में सफर शुरू हो गया। बचपन में वह अपने बड़े भाई अंकुर के साथ खेलती थीं। पांच साल की उम्र से उन्होंने खेल का विधिवत प्रशिक्षण लेना शुरू किया। बेहतर सुविधाओं के लिए 14 साल की उम्र में वे पुणे चली गईं, जहां हेमंत बेंद्रे ने उनकी कोचिंग की और उनकी अनुशासन व मानसिक मजबूती को पहचाना।
2009 में प्रोफेशनल बनने के बाद अंकिता ने आईटीएफ महिला सर्किट पर कड़ी मेहनत की। पेशेवर करियर की शुरुआत के बाद से अंकिता ने टेनिस में कई खिताब जीते हैं। उन्होंने 11 सिंगल्स और 30 से अधिक डबल्स खिताब जीते। एकल रैंकिंग में शीर्ष-200 में पहुंचने वाली पांचवीं भारतीय बनीं। उनके करियर की शीर्ष रैंकिंग 160 रही है। 2018 में ही जकार्ता एशियाई खेलों में उन्होंने एकल में कांस्य पदक जीता, जो सानिया मिर्जा के बाद किसी भारतीय महिला का एशियाड में एकल पदक था। 2018-2021 के बीच उनका करियर चरम पर रहा।
अंकिता रैना का जन्म 11 जनवरी 1993 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ था। अंकिता के घर का माहौल खेल से जुड़ा रहा है। उनकी मां टेबल टेनिस खेलती थी। इस वजह से बहुत कम उम्र में ही अंकिता का टेनिस में सफर शुरू हो गया। बचपन में वह अपने बड़े भाई अंकुर के साथ खेलती थीं। पांच साल की उम्र से उन्होंने खेल का विधिवत प्रशिक्षण लेना शुरू किया। बेहतर सुविधाओं के लिए 14 साल की उम्र में वे पुणे चली गईं, जहां हेमंत बेंद्रे ने उनकी कोचिंग की और उनकी अनुशासन व मानसिक मजबूती को पहचाना।
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अंकिता रैना ने चारों मेजर ग्रैंड स्लैम में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। रोजर फेडरर, राफेल नडाल और सानिया मिर्जा को अपना आदर्श मानने वाली अंकिता अभी भी कुछ बड़ा करने के उद्देश्य से टेनिस के क्षेत्र में सक्रिय हैं।