देश में अन्य खेलों के साथ ही निशानेबाजी भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस खेल को लोकप्रिय बनाने में जिन निशानेबाजों का अहम योगदान रहा है, उनमें रंजन सोढ़ी का नाम प्रमुख है। निशानेबाजी में रंजन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन कर चुके हैं।
रंजन सोढ़ी का जन्म 23 अक्टूबर 1979 को पंजाब के फिरोजपुर जिले में एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्हें बचपन से ही बंदूक से निशाना लगाना बेहद पसंद था और यही वजह रही कि उन्होंने अपने शौक को करियर में बदल दिया। मेहनत, अनुशासन और जुनून के दम पर उन्होंने डबल ट्रैप शूटिंग में महारत हासिल की, जो बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। डबल ट्रैप शूटिंग में निशानेबाज को दो उड़ते हुए मिट्टी के बर्तनों को एक साथ भेदना पड़ता है।
फिरोजपुर के क्लबों से अपने करियर की शुरुआत करने वाले रंजन सोढ़ी 2000 के दशक की शुरुआत में राष्ट्रीय चैंपियन बन गए थे। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें 2010 में पहचान मिली। इस साल इटली के लोनाटो में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में उन्होंने डबल ट्रैप इवेंट में परफेक्ट 50/50 का विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता। उसी वर्ष नई दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने दो रजत पदक जीते। एक रजत व्यक्तिगत डबल ट्रैप में तो दूसरा टीम इवेंट में। गुजरात के गुडाऊ में आयोजित 2010 में आयोजित एशियन गेम्स में उन्होंने 186 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। 2011 में बीजिंग में हुए निशानेबाजी विश्व कप में उन्होंने रजत पदक जीतकर ओलंपिक में जगह निश्चित की। हालांकि, 2012 ओलंपिक में फाइनल दौड़ में जगह नहीं बना सके।
रंजन सोढ़ी का जन्म 23 अक्टूबर 1979 को पंजाब के फिरोजपुर जिले में एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्हें बचपन से ही बंदूक से निशाना लगाना बेहद पसंद था और यही वजह रही कि उन्होंने अपने शौक को करियर में बदल दिया। मेहनत, अनुशासन और जुनून के दम पर उन्होंने डबल ट्रैप शूटिंग में महारत हासिल की, जो बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। डबल ट्रैप शूटिंग में निशानेबाज को दो उड़ते हुए मिट्टी के बर्तनों को एक साथ भेदना पड़ता है।
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रंजन सोढ़ी युवा निशानेबाजों के आदर्श हैं। सोढ़ी कोचिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं, साथ ही शूटिंग लीग ऑफ इंडिया को बढ़ावा दे रहे हैं।