राज्यवर्धन सिंह राठौर का नाम देश के उन विरले शख्सियतों में शुमार है, जिनके नाम हर उस क्षेत्र में बड़ी सफलता है, जिसमें उन्होंने कदम रखा। भारतीय सेना में उच्च पद से सेवानिवृत्त हुए राज्यवर्धन सिंह राठौर ने खेल और राजनीति के क्षेत्र में भी बड़ी सफलता हासिल की है।

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राज्यवर्धन सिंह राठौर का जन्म 29 जनवरी 1970 को जैसलमेर, राजस्थान में हुआ था। राठौर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 77वें कोर्स के स्नातक हैं। एनडीए से स्नातक होने के बाद, राठौर ने भारतीय सैन्य अकादमी में भाग लिया, जहां उन्हें सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंड जेंटलमैन कैडेट के लिए स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। 15 दिसंबर 1990 को 64वीं कैवलरी में कमीशन किया गया, और 28 फरवरी 1992 को 9 ग्रेनेडियर्स में स्थानांतरित कर दिया गया। राठौड़ को 15 दिसंबर 1992 को लेफ्टिनेंट और 15 दिसंबर 1995 को कप्तान के रूप में पदोन्नति दी गई। राठौर ने कारगिल की लड़ाई लड़ी थी। 15 दिसंबर 2000 को उन्हें मेजर के पद पर पदोन्नत किया गया था। 16 दिसंबर 2004 को लेफ्टिनेंट-कर्नल के पद पर पदोन्नत किया गया और 1 मई 2009 को वे कर्नल बनाए गए थे।

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भारतीय सेना में रहते हुए निशानेबाजी में उनकी रुचि रही और इस खेल में उन्होंने वैश्विक मंचों पर बड़ी सफलता हासिल करते हुए देश का नाम रोशन किया।

राज्यवर्धन सिंह राठौर ने मैनचेस्टर में 2002 में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में, गोल्ड मेडल जीता। 200 में से 192 टारगेट का नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड उन्होंने बनाया था, जो आज भी कायम है। उन्होंने मोराद अली खान के साथ टीम गोल्ड मेडल भी जीता। 2006 में मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। 2004 में सिडनी और 2006 में काहिरा में आयोजित वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा विश्व कप में दो गोल्ड मेडल और एक ब्रांज मेडल उन्होंने जीता। एशियन चैंपियनशिप में पांच गोल्ड मेडल और एक ब्रॉन्ज मेडल और एशियन गेम्स में एक ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किया। कुल मिलाकर, राठौर ने अपने स्पोर्ट्स करियर में कुल 13 मेडल जीते हैं।

राठौर के जीवन में सबसे अहम साल 2004 रहा। इस साल एथेंस में आयोजित ओलंपिक में निशानेबाजी के डबल ट्रैप इवेंट में उन्होंने रजत पदक जीता था। निशानेबाजी में किसी भारतीय का यह पहला व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल था।

2006 में, राठौर ने स्पेन में वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। उन्होंने लगभग 40 साल के गैप के बाद 2003 में सिडनी में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता। 2002 से 2006 के बीच उन्होंने डबल ट्रैप के लिए अलग-अलग चैंपियनशिप में 25 इंटरनेशनल मेडल जीते। 2011 में, राठौर ने कुआलालंपुर में एशियन क्ले टारगेट चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और गोल्ड जीता। उस टूर्नामेंट में उनका 194 का स्कोर वर्ल्ड रिकॉर्ड के बराबर है।

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राठौर के जीवन में सबसे अहम साल 2004 रहा। इस साल एथेंस में आयोजित ओलंपिक में निशानेबाजी के डबल ट्रैप इवेंट में उन्होंने रजत पदक जीता था। निशानेबाजी में किसी भारतीय का यह पहला व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल था।

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भारत सरकार ने राज्यवर्धन सिंह राठौर को 2004 में अर्जुन पुरस्कार, 2005 में पद्मश्री और 2005 में ही खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया था।

Article Source: IANS

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