स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) ने शूटिंग और आर्चरी के कोच के लिए एक विशेष चार दिवसीय स्पोर्ट्स साइंस वर्कशॉप आयोजित की। यह वर्कशॉप नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में साई स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन द्वारा शुरू की गई। वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य कोचों को आधुनिक निगरानी उपकरणों और वैज्ञानिक तरीकों से लैस करना है, ताकि वे प्रशिक्षण और प्रतियोगिता में एथलीट के प्रदर्शन को बेहतर बना सकें।
साई के डायरेक्टर जनरल और खेल सचिव हरि रंजन राव ने वर्कशॉप के पहले दिन कहा कि मंत्रालय और सरकार स्पोर्ट्स साइंस की पहल को हर संभव समर्थन देंगे, लेकिन जरूरी है कि संसाधनों का समझदारी से निवेश किया जाए और स्पोर्ट्स साइंस का सही इस्तेमाल कर नतीजे प्राप्त किए जाएं। एथलीटों को सपोर्ट करने के लिए स्पोर्ट्स साइंस का असरदार इस्तेमाल होना चाहिए, खासकर उन खेलों में जहां मामूली फायदे ही जीत और हार के बीच अंतर तय करते हैं।
उन्होंने कहा कि अच्छी ट्रेनिंग, चोट से सुरक्षा और एथलीट के करियर की लंबी उम्र सुनिश्चित करने में स्पोर्ट्स साइंस की अहम भूमिका है। साई केंद्रों की संख्या बढ़ाकर और नेशनल कैंप एवं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अंदर एथलीट सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करके पूरे देश में स्पोर्ट्स साइंस समर्थन बढ़ाया जाएगा।
साई स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन के डायरेक्टर-कम-हेड ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने बताया कि इस तरह के फोकस्ड एंगेजमेंट से कोच और स्पोर्ट्स साइंटिस्ट मिलकर रोजाना प्रशिक्षण में सिद्धांतों को लागू कर सकते हैं। इससे एथलीट की तकनीकी दक्षता बढ़ती है और चोट का खतरा कम होता है। उन्होंने कहा कि यह पहल एथलीट-केंद्रित, कोच-नेतृत्व और स्पोर्ट्स साइंस द्वारा समर्थित मॉडल को मजबूत करती है।
वर्कशॉप में आईजीएससी नई दिल्ली, एनएसएससी बेंगलुरु, सोनीपत, कोलकाता, गांधीनगर और एनएसएनआईएस पटियाला के विशेषज्ञों के साथ ही एनआरएआई और उससे जुड़े संस्थानों के क्षेत्रीय विशेषज्ञ शामिल हैं। यह कार्यक्रम पहले आयोजित कोच सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप की सीरीज का हिस्सा है, जो हॉकी, बॉक्सिंग, रेसलिंग, जूडो, एथलेटिक्स, शूटिंग और आर्चरी जैसे खेलों में कोचिंग क्षमता बढ़ाने के लिए आयोजित की जा रही है।
साई स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन के डायरेक्टर-कम-हेड ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने बताया कि इस तरह के फोकस्ड एंगेजमेंट से कोच और स्पोर्ट्स साइंटिस्ट मिलकर रोजाना प्रशिक्षण में सिद्धांतों को लागू कर सकते हैं। इससे एथलीट की तकनीकी दक्षता बढ़ती है और चोट का खतरा कम होता है। उन्होंने कहा कि यह पहल एथलीट-केंद्रित, कोच-नेतृत्व और स्पोर्ट्स साइंस द्वारा समर्थित मॉडल को मजबूत करती है।
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यह वर्कशॉप कोच, स्पोर्ट्स साइंटिस्ट, मेडिकल एक्सपर्ट और परफॉर्मेंस स्पेशलिस्ट को एक साथ लाकर पारंपरिक कोचिंग समझ को वैज्ञानिक आधार पर लागू करने का अवसर देती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक एथलीट को, चाहे वह किसी भी खेल में हो, वर्ल्ड-क्लास स्तर का समर्थन मिले।