भारतीय क्रिकेट में अगर किसी गेंदबाज को सीमित गति के बावजूद शानदार लाइन-लेंथ और स्विंग के लिए याद किया जाता है, तो उस सूची में भुवनेश्वर कुमार का नाम अवश्य शामिल होगा। भुवी के पास अन्य तेज गेंदबाजों जैसी रफ्तार भले ही न रही हो, लेकिन उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की।
महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में खेलते हुए भुवनेश्वर ने हमेशा लाइन-लेंथ और स्विंग को प्राथमिकता दी। वे इनस्विंग और आउटस्विंग दोनों ही करा सकते हैं और उनका इनस्विंगर बेहद घातक होता है। यही कारण था कि कप्तान एमएस धोनी उन्हें अक्सर नई गेंद से गेंदबाजी के लिए पहले बुलाते थे। भुवी नई गेंद से जितने असरदार रहे, उतने ही पुरानी गेंद से बल्लेबाजों के छक्के छुड़ाने में माहिर भी।
भुवनेश्वर कुमार की शानदार गेंदबाजी की बदौलत ही भारत ने 2014 में लॉर्ड्स में इंग्लैंड को हराकर यादगार जीत हासिल की थी। भले ही भारत उस टेस्ट सीरीज को 3-1 से हार गया था, लेकिन लॉर्ड्स में मिली यह जीत आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में बसी हुई है। यह मैच भुवनेश्वर के करियर के शुरुआती दिनों का सबसे यादगार प्रदर्शन बना।