कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं, जिनका करियर बेशक लंबा नहीं होता, लेकिन वह अपने प्रदर्शन से विश्व क्रिकेट में छाप छोड़ने में सफल रहते हैं। कुछ ऐसा ही करियर भारत के पूर्व स्पिनर वेंकटपति राजू का रहा। अपनी घूमती गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान करने के लिए मशहूर रहे वेंकटपति ने डेब्यू मुकाबले में अपनी बल्लेबाजी से हर किसी का दिल जीत लिया था।
वेंकटपति राजू का जन्म 9 जुलाई, 1969 को आंध्र प्रदेश के आलमुरु में हुआ। वेंकटपति की बचपन से ही क्रिकेट में खास दिलचस्पी थी। जल्द ही उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया। अपनी स्पिन गेंदबाजी से वह बड़े से बड़े बल्लेबाजों को चकमा देने में माहिर थे।1989-90 के घरेलू सीजन में उनका प्रदर्शन लाजवाब रहा। फर्स्ट क्लास मुकाबलों में 32 विकेट लेने के बाद वह सिलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहे और उन्हें भारतीय टीम से बुलावा आया।
1990 में वेंकटपति ने अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज न्यूजीलैंड के खिलाफ किया। हालांकि, डेब्यू मुकाबले में वह गेंद से नहीं, बल्कि अपनी बल्लेबाजी की वजह से सुर्खियां बटोरने में सफल रहे। बतौर नाइट वॉचमैन बैटिंग करने उतरे वेंकटपति क्रीज पर खूंटा गाड़कर खड़े रहे और उन्होंने मुश्किल हालातों में 2 घंटे तक बल्लेबाजी करते हुए 32 रन बनाए। यह उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी भी रही।