भव्य तवांग मठ और पूर्वी हिमालय की शांत, बादलों से ढकी घाटियों की मनमोहक पृष्ठभूमि के बीच शुक्रवार को पूरे जोश और उत्साह के साथ 'तवांग मैराथन 3.0' की शुरुआत हुई। समुद्र तल से लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित तवांग एक बार फिर से सहनशीलता, एकता और सांस्कृतिक गर्व का उत्सव बन गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गजराज कोर के कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह ने झंडी दिखाकर किया। उन्होंने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन फिटनेस, साहसिकता और राष्ट्रीय एकता को हिमालयी सीमांत क्षेत्रों में बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
तवांग पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश में स्थित है। यह उत्तर में तिब्बत और दक्षिण-पश्चिम में भूटान की सीमाओं से घिरा हुआ है। इसका नाम तवांग, 'त' अर्थात् 'घोड़ा' और 'वांग' अर्थात् 'चुना गया' से बना है, जो इस अनुश्रुति पर आधारित है कि मठ के लिए स्थान कैसे तय किया गया था। तवांग मठ, तवांग शहर से लगभग 2 किमी की दूरी पर स्थित है। यह एशिया का सबसे पुराना और दूसरा सबसे बड़ा मठ है।