एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड पर 2-0 की बढ़त बना ली है। पहले गाबा में 9 विकेट और फिर एडिलेड में 275 रनों से मिली हार के बाद अब इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज केविन पीटरसन का गुस्सा फूट गया है, उन्होंने कहा कि इंग्लैंड के प्रदर्शन में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि इंग्लैंड एक टेस्ट मैच जीतने में सक्षम है।
इस दिग्गज बल्लेबाज ने एशेज सीरीज में 2-0 से पिछड़ने के बाद यह तक कह दिया है कि अब इंग्लैंड सीरीज में वापसी नहीं कर सकता है। पीटरसन ने अपने क्रिकेट करियर के अनुभव का हवाला देते हुए लिखा है कि "दुर्भाग्य से, मैं अनुभव से जानता हूं कि एक बार जब आप घर से दूर एशेज सीरीज में 2-0 से पिछड़ जाते हैं तो कैंप में कोई विश्वास नहीं रहता कि आप चीजों को बदल सकते है।"
उन्होंने अपना अनुभव साक्षा करते हुए आगे लिखा है कि "आप कोशिश करना जारी रखते हैं, आप सही चीजें करना जारी रखते हैं, लेकिन मुझे 2006-07 और 2013-14 में पता था और इन खिलाड़ियों को अब पता चल जाएगा कि वापसी का कोई वास्तविक रास्ता नहीं है।"
केविन पीटरसन ने इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर भी सवाल किया है उन्होंने सवाल पूछते हुए लिखा है कि 500 रनों का स्कोर कहा से आ रहा है? "200 का स्कोर नहीं चलेगा। मैंने सीरीज से पहले लिखा था कि इंग्लैंड रनों के लिए जो रूट पर निर्भर है और यह सही साबित हुआ है।"
बल्लेबाजो पर बात करते हुए उन्होंने आगे लिखा "डेविड मालन ने ठीक प्रदर्शन किया है, लेकिन बेन स्टोक्स इस समय प्रतिष्ठा पर खेल रहे हैं क्योंकि उन्होंने कुछ योगदान नहीं दिया है। बाकियों ने भी अच्छा नहीं किया है। 500 या 600 के स्कोर कहां से आ रहे हैं? गेंदबाजी के बारे में बात करना ठीक है, जैसा कि जो रूट ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया था, लेकिन गेंदबाजी पूरी तरह से बेहतर दिखेगी अगर उनके पास खेलने के लिए कुछ रन हों। अगर इंग्लैंड बड़े स्कोर बना रहा होता, तो गेंदबाजों को दो नई गेंदें मिलती और हो सकता है कि उन्हें फुल गेंद फेंकने की चिंता करते।"
पीटरसन के निशाने पर ईसीबी
उन्होंने ईसीबी यानि इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड को भी निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा है कि कंट्री सिस्टम पूरी तरह बकवास है। वह कोई बल्लेबाज, कोई स्पिनर नहीं बना रहे हैं और हम अभी भी स्टुअर्ट ब्रॉड और जिमी एंडरसन पर निर्भर हैं।
जब तक ईसीबी खिलाड़ियों की संख्या को कम करके और बेहतर पिचों का निर्माण करके अपनी प्रथम श्रेणी की प्रतियोगिता को वास्तव में नहीं बढ़ाता, तब तक हम ऑस्ट्रेलिया में जो डिजास्टर देख रहे हैं, वो होती ही रहेेगे।