मैदान पर आक्रामक शैली, स्लेजिंग से ही विपक्षी टीम के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने का हुनर और आखिरी दम तक लड़ने का जज्बा। एक समय पर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम की यह सभी खूबियां हुआ करती थीं। कंगारू टीम के खिलाड़ी आंखों में आंखें डालकर ही विपक्षी टीम के हौसलों को पस्त कर दिया करते थे। हालांकि, 6 बार की वर्ल्ड चैंपियन टीम के प्रदर्शन का ग्राफ पिछले कुछ वर्षों में तेजी से नीचे की तरफ गिरता दिखाई दिया है। मैदान पर चैंपियन की तरह लड़ने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम क्यों इन दिनों आसानी से घुटने टेक दे रही है, आइए आपको विस्तार से समझाते हैं।

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चोटों से परेशान ऑस्ट्रेलियाई खेमा: ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है इसमें कोई शक नहीं है। हालांकि, कंगारू टीम के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह रही है कि टीम के अनुभवी खिलाड़ी ही ज्यादातर समय चोटों से जूझते नजर आए हैं। 2023 में अपनी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को वनडे विश्व चैंपियन बनाने वाले कप्तान पैट कमिंस ने इस वर्ल्ड कप के बाद से 50 ओवर के फॉर्मेट में सिर्फ 2 ही मैच खेले हैं। मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड जैसे सरीखे गेंदबाज भी लगातार चोटों से परेशान रहे हैं। अनुभवी खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी टीम के प्रदर्शन मे साफतौर पर नजर आई है। टीम के साथ दिक्कत यह भी रही है मैक्सवेल और कुछ अन्य दिग्गज खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।

कमजोर बेंच स्ट्रेंथ: एक समय पर ऑस्ट्रेलिया के स्क्वॉड के साथ-साथ उनकी बेंच स्ट्रेंथ भी काफी मजबूत हुई करती थी। हालांकि, अब हालत पूरी तरह से उलट हैं। टेस्ट क्रिकेट की सबसे खतरनाक टीम मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलिया के पास क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट में खेलने के लिए मजबूत बल्लेबाजी क्रम तक नजर नहीं आता है। टेस्ट और वनडे क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के पास वैसे बेंच स्ट्रेंथ मौजूद नहीं है, जिसके दम पर वह विपक्षी टीम पर हावी होकर खेल सके। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया को साल 2026 में पाकिस्तान और फिर बांग्लादेश के खिलाफ क्रिकेट के इतिहास में पहली बार वनडे सीरीज गंवानी पड़ी।

आक्रामक शैली हुई गायब: स्टीव वॉ और रिकी पोंटिंग की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई टीम बेहद आक्रामक क्रिकेट खेला करती थी। टीम के खिलाड़ी स्लेजिंग और अपने आक्रामक रवैया से ही विपक्षी टीम के हौसले पस्त कर दिया करते थे। हालांकि, मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई टीम में वो बात नजर नहीं आती है। देश-विदेश में तमाम तरह की लीगों में हर देश के खिलाड़ी के साथ खेलने के चलते कंगारू खिलाड़ियों का बर्ताव भी विपक्षी प्लेयर्स के खिलाफ पहले के मुकाबले में काफी नरम पड़ गया है। ऑस्ट्रेलियाई टीम में वो तेवर और लड़ने का जज्बा भी दिखाई नहीं देता है, जिसके लिए एक दौर में उनकी मिसालें दी जाती थीं।

कमजोर बेंच स्ट्रेंथ: एक समय पर ऑस्ट्रेलिया के स्क्वॉड के साथ-साथ उनकी बेंच स्ट्रेंथ भी काफी मजबूत हुई करती थी। हालांकि, अब हालत पूरी तरह से उलट हैं। टेस्ट क्रिकेट की सबसे खतरनाक टीम मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलिया के पास क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट में खेलने के लिए मजबूत बल्लेबाजी क्रम तक नजर नहीं आता है। टेस्ट और वनडे क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के पास वैसे बेंच स्ट्रेंथ मौजूद नहीं है, जिसके दम पर वह विपक्षी टीम पर हावी होकर खेल सके। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया को साल 2026 में पाकिस्तान और फिर बांग्लादेश के खिलाफ क्रिकेट के इतिहास में पहली बार वनडे सीरीज गंवानी पड़ी।

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हालांकि, इस बात से भी मुंह नहीं फेरा जा सकता है कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इन दिनों बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मगर छह बार वनडे और एक बार टी20 विश्व कप की ट्रॉफी को उठा चुकी कंगारू टीम के लिए चिंता का विषय यह है कि टीम के भविष्य को संवारने वाले खिलाड़ियों के प्रदर्शन में भी वो बात नजर नहीं आ रही है, जिसके बूते टीम आश्वस्त हो सके।

Article Source: IANS

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