सिडनी/ नई दिल्ली, 20 मार्च (CRICKETNMORE) । वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि भारतीय कप्तानी ने उन्हें सिखाया कि किसी चीज का मलाल करने की जरूरत नहीं है और जो संसाधन उपलब्ध हैं उन्हीं से सामंजस्य बैठाना होगा।

वन डे कप्तान के रूप में पिछले आठ साल की यात्रा के बारे में पूछने पर धोनी ने कहा, ‘मैंने उतार चढ़ाव देखे। जीवन गोले की तरह है। आप वहीं पहुंच जाते हो जहां से शुरूआत करते हो। उसी स्थान पर पहुंचने के बाद आप उन चीजों का और अधिक सम्मान करने लग जाते हो जिनका शायद पहले सम्मान नहीं किया।’


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भारतीय कप्तान ने कहा, ‘बीच में हमें काफी संघर्ष करना पड़ा। हमारे पास डेथ ओवरों के अच्छे गेंदबाज नहीं थे। हमारे पास अच्छे तेज गेंदबाज नहीं थे। हमारे पास तेज गति से फेंकने वाले कुछ गेंदबाज थे तो वह सही क्षेत्रों में गेंद नहीं फेंकते थे और जो सही क्षेत्र में गेंदबाजी करते थे उनके पास गति नहीं थी।’ उन्होंने कहा, ‘पिछले पांच साल से आलराउंडर की खोज जारी है और हमें अब भी उसकी तलाश है। इसलिए मैंने फैसला किया कि जो चीज मेरे पास नहीं है मैं उसका मलाल नहीं रखूंगा और मेरे पास जो कुछ भी है उससे काम चलाउंगा।’ भारतीय टीम के लिए सबसे मुश्किल समय वेस्टइंडीज में 2007 वर्ल्ड कप में आया जब टीम पहले दौर से ही बाहर हो गई।

धोनी ने कहा, ‘2007 वर्ल्ड कप जैसा बुरा दौर भी आया जब हम पहले दौर में हार गए। मैं उस समय कप्तान नहीं था लेकिन यह निराशाजनक था। वन डे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बारे में सबसे अच्छी चीज यह है कि आपको उबरने का मौका मिलता है। उदारण के लिए अगर आप द्विपक्षीय श्रृंखला खेलते हो और तीन मैच जीतते हो और दो हार जाते हो तो ग्राफ में उतार चढ़ाव नजर आएगा।’ वर्ल्ड कप का सफल बचाव करने के लिए भारत को दौ और मैच जीते हैं और धोनी ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती अच्छा क्रिकेट खेलना है।

उन्होंने कहा, ‘चुनौती अच्छा क्रिकेट खेलना है क्योंकि इससे हमें 29 मार्च को एमसीजी वापस आने में मदद मिलेगी। अगला मैच सिडनी में होगा और वहां अलग चुनौतियां होंगी और अगले चरण में क्वालीफाई करने के लिए हमें वहां अच्छा प्रदर्शन करना होगा।’

(एजेंसी)

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Saurabh Sharma
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