इंग्लैंड की द हंड्रेड लीग के ऑक्शन में एक ऐसा फैसला देखने को मिला जिसने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी। सनराइजर्स हैदराबाद से जुड़ी फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को टीम में शामिल कर लिया। भारतीय मालिकों द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन न करने की चर्चाओं के बीच यह कदम काफी चर्चा में आ गया है।
इंग्लैंड की मशहूर फ्रेंचाइजी क्रिकेट लीग द हंड्रेड के आगामी सीजन से पहले हुए ऑक्शन में एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सामने आया है। सनराइजर्स हैदराबाद से जुड़ी फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने पाकिस्तान के स्पिन गेंदबाज अबरार अहमद को अपनी टीम में शामिल कर लिया है, जिसके बाद क्रिकेट जगत में काफी चर्चा शुरू हो गई है।
सनराइजर्स लीड्स, जो इंडियन प्रीमियर लीग की फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद से जुड़ी हुई है, ने गुरुवार (12 मार्च) को हुए खिलाड़ियों के ऑक्शन में अबरार अहमद पर दांव लगाया। अबरार अहमद को खरीदने के लिए सनराइजर्स लीड्स और ट्रेंट रॉकेट्स के बीच काफी देर तक बोली की जंग चली। आखिरकार सनराइजर्स लीड्स ने 1 लाख 90 हजार पाउंड यानी करीब 2.34 करोड़ रुपये की बोली लगाकर इस पाकिस्तानी स्पिनर को अपने साथ जोड़ लिया।
ऑक्शन से पहले ऐसी खबरें चल रही थीं कि द हंड्रेड में जिन फ्रेंचाइजियों के मालिक भारतीय हैं, वे किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी में दिलचस्पी नहीं दिखाएंगे। लेकिन काव्या मारन की टीम ने इन सभी अटकलों को गलत साबित करते हुए अबरार अहमद को साइन कर लिया और इसी वजह से यह फैसला सुर्खियों में आ गया।
दरअसल सनराइजर्स लीड्स पूरी तरह से भारतीय मीडिया कंपनी सन ग्रुप के स्वामित्व में है। इस कंपनी का नेतृत्व कलानिधि मारन करते हैं, जबकि उनकी बेटी काव्या मारन कंपनी की सीईओ हैं। इस फ्रेंचाइजी का नाम पहले नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स था, जिसे इस साल भारतीय कंपनी ने अपने अधीन ले लिया।
इस ऑक्शन में कुल 13 पाकिस्तानी खिलाड़ियों को शामिल किया गया था। पहले पांच खिलाड़ियों में हारिस रऊफ, सैम अयूब और शादाब खान को कोई खरीदार नहीं मिला, जबकि अबरार अहमद और उस्मान तारिक को टीमों ने खरीद लिया।
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उस्मान तारिक को बर्मिंघम फीनिक्स ने साइन किया, जो वार्विकशायर काउंटी क्रिकेट क्लब और अमेरिकी निवेश कंपनी नाइटहेड कैपिटल मैनेजमेंट के संयुक्त स्वामित्व वाली टीम है। हालांकि इस पूरे ऑक्शन में सबसे ज्यादा चर्चा काव्या मारन की टीम द्वारा अबरार अहमद को साइन करने की रही, जिसने द हंड्रेड लीग में नई बहस को जन्म दे दिया।