महान फुटबॉलर लियोनल मेसी पिछले साल दिसंबर में कोलकाता के दौरे पर थे। फुटबॉल के दिवाने इस शहर में अर्जेंटीना के कप्तान मेसी की 64 फुट की मूर्ति लगाई गई थी। उस समय मेसी की इस मूर्ति को उनके प्रति सम्मान की दृष्टि से देखा गया था, लेकिन अब इस मूर्ति को लेकर विवाद हो गया है। मूर्ति अपनी खराब निर्माण गुणवत्ता के कारण चर्चा में है।

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स्थानीय लोगों के मुताबिक, तेज हवा चलने पर मूर्ति हिलती दिखाई देती है। मूर्ति एक व्यस्त चौराहे के पास स्थापित है। ऐसे में लोगों में डर पैदा हो गया है कि कहीं यह गिर न जाए और इस वजह से कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए। कुछ लोगों का मानना है कि मेसी की मूर्ति टीएमसी सरकार के दौरान बनी थी। अब मूर्ति का हिलना टीएमसी सरकार के पतन को दिखा रहा है।

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अधिकारियों द्वारा जांच किए जाने पर कथित तौर पर पाया गया कि मूर्ति के प्राथमिक फ्रेमवर्क में कई स्क्रू ढीले हो चुके थे और संरचना पर्याप्त मजबूत नहीं थी। फिलहाल इसे रस्सियों के सहारे बांधकर सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है।

इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन को समाप्त करने के बाद इस मुद्दे को सरकार की कार्यशैली से जोड़ना शुरू कर दिया। आलोचकों का कहना है कि यह मूर्ति दिखावे की राजनीति का एक प्रतीक है, जिसमें बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तो शुरू होते हैं लेकिन उनकी बुनियादी मजबूती पर ध्यान नहीं दिया जाता।

राज्य के नए खेल मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने कथित तौर पर कहा है कि मूर्ति के निर्माण से जुड़े लोगों के खिलाफ उनकी लापरवाही के लिए कार्रवाई की जाएगी। यह मूर्ति दिसंबर में मेसी के भारत दौरे के दौरान लगाई गई थी। इसे तृणमूल कांग्रेस के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की पहल पर तैयार किया गया था।

इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन को समाप्त करने के बाद इस मुद्दे को सरकार की कार्यशैली से जोड़ना शुरू कर दिया। आलोचकों का कहना है कि यह मूर्ति दिखावे की राजनीति का एक प्रतीक है, जिसमें बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तो शुरू होते हैं लेकिन उनकी बुनियादी मजबूती पर ध्यान नहीं दिया जाता।

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फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मेसी की इस विशाल मूर्ति को हटाया जाएगा, मजबूत किया जाएगा या दोबारा बनाया जाएगा। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक लापरवाही, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जनता की सुरक्षा जैसे बड़े सवालों की वजह से चर्चा में है।

Article Source: IANS

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