12वीं क्लास में कम अंक आने के बाद पिता की डांट मुरली विजय को इतनी चुभी कि उन्होंने महज 17 साल की उम्र में घर छोड़ने का फैसला ले लिया, होटल में नौकरी की और इसके साथ क्रिकेट में अपना भविष्य बनाने का फैसला कर लिया। नौकरी करने के साथ-साथ मुरली ने क्रिकेट के मैदान पर भी जमकर मेहनत जारी रखी। अपने संघर्षों के दम पर मुरली कामयाबी की एक के बाद एक सीढ़ियां चढ़ते चले गए और साल 2008 में उन्हें पहली बार भारतीय टीम की जर्सी पहनने का मौका मिला।

Advertisement

मुरली विजय का जन्म एक अप्रैल 1984 को तमिलनाडु में हुआ। मुरली का शुरुआत से ही क्रिकेट के प्रति खास लगाव था। वह स्कूल छोड़कर क्रिकेट के मैदान पर अक्सर पहुंच जाया करते थे। क्रिकेट के प्रति बढ़ती दीवानगी का असर उनकी पढ़ाई पर भी जल्द होने लगा। नियमित तौर पर स्कूल ना जाने और पढ़ाई से दूरी बनाने के कारण 12वीं कक्षा में मुरली सिर्फ 40 प्रतिशत अंक लेकर आए। उनके यह अंक देखकर पिता भड़क उठे। मुरली के पिता ने उन्हें यह तक कह दिया था कि वह एक चपरासी बनने के लायक भी नहीं हैं। बस यही बात मुरली को चुभ गई और उन्होंने 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया।

Advertisement

मुरली विजय ने पेट पालने के लिए शुरुआत में होटल में नौकरी की और यहीं उन्हें रहने की भी जगह मिल गई। इसके बाद उन्होंने पार्लर में भी काम किया। हालांकि, इन सभी चीजों के बीच मुरली ने अपना पूरा ध्यान क्रिकेट पर लगाए रखा। 22 गज की पिच पर मुरली ने दिन-रात मेहनत की और उन्हें सफलताएं भी मिलने लगीं। तमिलनाडु की अंडर-22 टीम से खेलने के दौरान उन्हें क्लब टीम में भी जल्द ही जगह मिल गई।

साल 2006 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में मुरली ने तमिलनाडु की ओर से अपना डेब्यू किया। साल 2008 में रणजी ट्रॉफी के एक मुकाबले में मुरली विजय अपने सलामी जोड़ीदार अभिनव मुकुंद के साथ मिलकर 462 रनों की साझेदारी निभाकर खेल रहे थे। इसी दौरान उनकी जिंदगी में वो पल आया, जिसका इंतजार मुरली लंबे समय से कर रहे थे। मुरली को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल होने का बुलावा आया।

साल 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर में मुरली विजय ने इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा और अपना टेस्ट डेब्यू किया। इसके बाद दाएं हाथ के बल्लेबाज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक उपलब्धियां हासिल करते चले गए। विदेशी पिचों पर मुरली ने अपनी मजबूत तकनीक के दम पर खूब नाम कमाया और जल्द ही भारतीय टेस्ट टीम के अहम सदस्य बन गए।

साल 2006 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में मुरली ने तमिलनाडु की ओर से अपना डेब्यू किया। साल 2008 में रणजी ट्रॉफी के एक मुकाबले में मुरली विजय अपने सलामी जोड़ीदार अभिनव मुकुंद के साथ मिलकर 462 रनों की साझेदारी निभाकर खेल रहे थे। इसी दौरान उनकी जिंदगी में वो पल आया, जिसका इंतजार मुरली लंबे समय से कर रहे थे। मुरली को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल होने का बुलावा आया।

Also Read: LIVE Cricket Score
Advertisement

आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स की ओर से खेलते हुए मुरली विजय का प्रदर्शन लाजवाब रहा। हालांकि, वह भारत की ओर से क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में कोई खास कामयाबी हासिल नहीं कर सके। मुरली विजय ने भारत की ओर से खेले 9 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में 169 रन ही बना पाए। हालांकि, गिरती फॉर्म की वजह से मुरली टीम से अंदर-बाहर होने लगे और साल 2018 के बाद वह दोबारा भारतीय टीम में अपनी जगह नहीं बना सके। 30 जनवरी, 2023 को मुरली ने इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान कर दिया।

Article Source: IANS

लेखक के बारे में

IANS News
IANS is one of the largest independent private Indian news agency in India. Founded in the year 1986 by Indian American publisher Gopal Raju as the "India Abroad News Service" and later renamed. Their main offices are located in Noida, Uttar Pradesh. Read More
ताजा क्रिकेट समाचार