भारतीय क्रिकेट में विजय मर्चेंट का नाम एक बेहतरीन बल्लेबाज के रूप में प्रतिष्ठित है। मर्चेंट उस दौर के खिलाड़ी रहे हैं जिस दौर में ऑस्ट्रेलिया के डॉन ब्रैडमेन अपनी दमदार बल्लेबाजी दुनियाभर के गेंदबाजों में खौफ पैदा किया था। मर्चेंट का खेलने का अंदाज में बेहद अलहदा था और उस दौर में उनकी तुलना ब्रैडमेन से होती थी।

विजय मर्चेंट का जन्म 12 अक्टूबर, 1911 को मुंबई में हुआ था। उनका जन्म व्यापारियों और फैक्ट्री मालिकों के एक अमीर परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम विजयसिंह माधवजी मर्चेंट था। विजय को क्रिकेट के क्षेत्र में आगे बढ़ना था, लेकिन वह देशभक्ति के मोर्चे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करते थे।

उनका अंतरराष्ट्रीय डेब्यू भारत के पहले टेस्ट (1932) में हो सकता था, लेकिन बड़े राष्ट्रीय नेताओं के जेल में बंद रहने की वजह से उन्होंने खुद को ऐतिहासिक टेस्ट से बाहर कर लिया। इस वजह से उन्हें अपने डेब्यू के लिए एक साल का इंतजार करना पड़ा। द्वितीय विश्व युद्ध ने भी उनकी करियर को प्रभावित किया।

मर्चेंट इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ भारत और इंग्लैंड में खेले। ऐसा करने वाले वह ब्रैडमेन के बाद दूसरे खिलाड़ी हैं। उनके पास ऑस्ट्रेलिया जाने का मौका था। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट फैंस और स्वंय ब्रैडमेन मर्चेंट के करिश्मे को देखने के उत्सुक थे, लेकिन खराब सेहत की वजह से वह ऑस्ट्रेलिया नहीं गए।

इस पर ब्रैडमेन ने कहा था, "हम विजय मर्चेंट को देखने से चूक गए।"

दाएं हाथ इस बल्लेबाज ने 1936 के इंग्लैंड दौरे में, मर्चेंट ने सीरीज में 51 की औसत से 1475 रन बनाए। इस प्रदर्शन ने उन्हें 1937 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर होने का सम्मान दिलाया।

विजय मर्चेंट ने 1951-52 की सीरीज में इंग्लैंड के खिलाफ दिल्ली के कोटला में 154 रन बनाए। यह उनके करियर का आखिरी टेस्ट था। इस सेंचुरी ने उन्हें टेस्ट सेंचुरी बनाने वाला सबसे उम्रदराज भारतीय बना दिया। यह रिकॉर्ड आज भी कायम है। इंग्लैंड के खिलाफ 1951-52 की घरेलू सीरीज़ में फील्डिंग करते समय मर्चेंट के कंधे में चोट लग गई थी। इस चोट ने आखिरकार उन्हें रिटायर होने पर मजबूर कर दिया और एक छोटे लेकिन शानदार करियर का अंत हो गया।

मर्चेंट ने दिसंबर 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के लिए डेब्यू किया था। उन्होंने अपना आखिरी मैच भी नवंबर 1951 में इंग्लैंड के खिलाफ ही खेला। 18 साल के करियर में विजय ने 10 टेस्ट की 18 पारियों में 3 शतक और 3 अर्धशतक लगाते हुए 859 रन बनाए। उनका सर्वाधिक स्कोर 154 था।

विजय मर्चेंट मुंबई की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेलते थे। 150 प्रथम श्रेणी मैचों की 234 पारियों में 45 शतक और 52 अर्धशतक लगाते हुए 13,470 रन बनाए। इसके अलावा उन्होंने 65 विकेट भी लिए।

मर्चेंट एक खिलाड़ी के तौर पर रिटायर होने के बाद क्रिकेट प्रशासक बन गए। वह 1960 के दशक में चीफ ऑफ सिलेक्टर्स भी बने। टीम में सुनील गावस्कर, एकनाथ सोलकर और गुंडप्पा जैसे भविष्य के बैटिंग लेजेंड्स को शामिल करने में उनका अहम रोल था। वह एक राइटर और रेडियो कमेंटेटर भी थे। विविध भारती पर हर रविवार को आने वाला उनका रेडियो शो 'क्रिकेट विद विजय मर्चेंट' बहुत मशहूर था। वह अक्सर क्रिकेट एकेडमी जाते थे और युवा प्रतिभाओं को क्रिकेट की बारीकियां सीखाते थे।

विजय मर्चेंट मुंबई की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेलते थे। 150 प्रथम श्रेणी मैचों की 234 पारियों में 45 शतक और 52 अर्धशतक लगाते हुए 13,470 रन बनाए। इसके अलावा उन्होंने 65 विकेट भी लिए।

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Article Source: IANS

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