आम तौर पर तो यही कहेंगे क्रिकेट ग्राउंड का मतलब है सीधा लाइव एक्शन जिसमें कुछ भी काल्पनिक नहीं होता। तब भी कई बार क्रिकेट ग्राउंड भी अलग-अलग स्टोरी में हिस्सेदार बने हैं। क्रिकेट में इसकी सबसे नई मिसाल कुछ दिन पहले इंग्लैंड के लेसेस्टर (Leicester) ग्राउंड में देखने को मिली। यहां अपटन स्टील ग्रेस रोड (Uptonsteel Grace Road) पर सौरव गांगुली की बायोपिक 'दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी (Dada: The Sourav Ganguly Story)' की शूटिंग हुई और अचानक ही इस पर एक ऐसा असली क्रिकेट विवाद हुआ कि ये शूटिंग खुद एक स्टोरी बन गई।

अगस्त में यहां लेसेस्टरशायर-ग्लेमोर्गन काउंटी चैंपियनशिप मैच खेला गया। मैच शुरू होने से सिर्फ 4 दिन पहले, ग्राउंड पर क्रिकेटर नहीं, फिल्म क्रू मौजूद था। उससे पहले इनके काम की तैयारी के लिए तकनीकी स्टाफ रोज ग्राउंड में आ रहा था। बाहर किसी को भी इसकी खबर न थी। ये तो विवाद के बाद, तब पता चला जब वहां के हेड ग्राउंड्समैन कैलम लेविन ने 'क्रिकेट रेगुलेटर' को बताया कि शूटिंग के दौरान ग्राउंड स्टाफ को पिच पर कोई काम नहीं करने दिया। यहां तक कि पिच को खराब होने से बचाने के लिए, उस पर कवर भी नहीं डालने दिए। शूटिंग वाले दिन वहां, इस जबरदस्त गर्म इंग्लिश सीजन में, टेम्प्रेचर 35°C तक चला गया था, जो 38°C जैसा महसूस हो रहा था। इसी से अंदाजा हो जाएगा कि किस गर्मी में पिच लगभग 8 घंटे तक, बिना कवर, ऐसे ही रही।

4 दिन बाद जब यहां मैच हुआ तो पिच पर बड़ा आसमान बाउंस था। कप्यूटर ने 43 बार 'अनइवन बाउंस' रिकॉर्ड किया। लेसेस्टरशायर ने मैच 42 रन से जीत तो लिया पर पिच के मिजाज को इस जीत से भी ज्यादा चर्चा मिली। अंपायरों ने शिकायत कर दी जिस पर एक्शन हुआ और पिच को 'खराब' (पुअर) की रेटिंग दी गई। इतना ही नहीं मेजबान काउंटी क्रिकेट क्लब पर 5000 पाउंड का जुर्माना लगा और साथ में 27 पॉइंट की पेनल्टी (जिसे बाद में, अपील के जवाब में घटाकर 19 पॉइंट कर दिया)। तब भी काउंटी टीम को बड़ा नुक्सान हुआ। काउंटी क्लब स्टाफ ने सारा दोष फिल्म शूटिंग के नाम लिख दिया और कहा कि उस दिन उन्हें पिच पर काम करने से रोकने की वजह से ये सब हुआ। तब भी क्लब ने ऑफिशियल तौर पर फिल्म की शूटिंग करने वालों को कोई दोष न दिया क्योंकि वहां इजाजत लेने के बाद शूटिंग हुई थी और उसमें ये लिखा था कि पिच ऐसे ही रहेगी।

वैसे लेसेस्टर कोई पहला ऐसा क्रिकेट ग्राउंड नहीं है जो किसी फ़िल्म की स्टोरी का हिस्सा बना हो। कई फ़िल्म की शूटिंग स्टेडियम के अंदर हुई है। इस मामले में सबसे खास एक ऐसी फिल्म की स्टोरी है जिसके बारे में सब भूल चुके हैं पर वह इस मामले में एक ऐतिहासिक किस्सा है। सात से भी ज्यादा दशक से पहले, 1953 में एक फिल्म बनी थी 'द फ़ाइनल टेस्ट (The Final Test)'। तब भी क्रिकेट सीजन के दिनों में ही शूटिंग होनी थी। तब भी कुछ ऐसा ही सवाल सामने आया कि अगर स्टेडियम में शूटिंग हुई तो क्रिकेट पर असर पड़ेगा। उन दिनों टेक्नोलोजी आज जैसी एडवांस नहीं थी और इस सवाल का जवाब नहीं मिल रहा था कि असली खेल में दखल दिए बिना, क्रिकेट मैच को स्क्रीन पर कैसे दिखाया जाए?

फिल्म के डायरेक्टर थे एंथोनी एस्क्विथ (Anthony Asquith) और स्टोरी थी टेरेंस रैटिगन (Terence Rattigan) की जिसमें एक बड़ी उम्र के इंग्लिश क्रिकेटर सैम पामर की स्टोरी थी जो कई साल खेलने के बाद मशहूर 'द ओवल' स्टेडियम में अपना आखिरी टेस्ट खेल रहे थे। फिल्म की स्टोरी में ये था कि उनके चाहने के बावजूद उनके बेटे रेगी ने क्रिकेट में कोई दिलचस्पी न ली और उसका लगाव लिट्रेचर से था। आखिर में पिता-पुत्र का ये द्वंद, अलग-अलग पीढ़ियों के टकराव और समाज पर क्रिकेट के गहरे प्रभाव की स्टोरी बन गया।

इस फिल्म के लिए मुश्किल उस 'द ओवल' से शुरू हुई जो वास्तव में स्टोरी के सेंटर में था। 'द ओवल' में वह आख़िरी टेस्ट दिखाना था और वह भी एक काल्पनिक 'एशेज़ टेस्ट'। तब काउंटी क्रिकेट क्लब आज जैसे 'लालची' नहीं होते थे। उन्होंने फिल्म वालों को स्टेडियम के अंदर शूटिंग की इजाजत नहीं दी। यहां तक कि ये इजाजत भी नहीं दी कि वास्तव में उस सीजन में एक असली एशेज टेस्ट में खेल को रिकॉर्ड कर, अपनी फिल्म को असरदार बनाने के लिए, उसमें जोड़ दें। ऐसे में ये फिल्म कैसे बनती?

फिल्म बनी और 'द ओवल' में ही बनी पर एक अलग तरीके से। विश्वास कीजिए, मशहूर पाइनवुड स्टूडियो (Pinewood Studios) में 'द ओवल' स्टेडियम का, ठीक वैसा ही दिखने वाला सेट बना दिया। इस रेप्लिका (नकल) में पवेलियन और अन्य कुछ हिस्से इतनी बारीकी से बनाए कि फिल्म में काम कर रहे असली इंग्लैंड के क्रिकेटरों ने जब इसे देखा तो वे हैरान रह गए। उन्हें शूटिंग के दौरान ऐसा लगा मानो वे सचमुच किसी टेस्ट मैच में खेल रहे हों। ये इतना बेमिसाल सेट था कि यहां तक सोच गया कि शूटिंग के बाद इसे न तोड़ें और 'विजिटर' के लिए खोल दें। इंग्लैंड के सबसे महान बल्लेबाजों में से एक, लेन हटन ने स्टूडियो में तैयार इस सेट के असली लगने का जिक्र और जैसे वे सचमुच किसी टेस्ट मैच का हिस्सा हैं, इस बारे में अपनी किताब में भी लिखा।

इस फिल्म में और भी कुछ ऐसा था जो आज की ज़्यादातर क्रिकेट फ़िल्म में नजर नहीं आता और वह था फिल्म की स्टोरी में इंग्लैंड के कई असली क्रिकेटर का इस्तेमाल और वे शूटिंग के लिए आते रहे। इनमें लेन हटन, डेनिस कॉम्पटन, एलेक बेडसर, गॉडफ्रे इवांस, जिम लेकर और सिरिल वॉशब्रुक जैसे बड़े-बड़े क्रिकेटर भी थे। ये सभी कोई काल्पनिक रोल नहीं, अपना-अपना रोल ही कर रहे थे। फिल्म में जो टेस्ट दिखाया उसके लिए तब के सबसे मशहूर कमेंटेटर जॉन अर्लोट ने कमेंट्री की। फिल्म वालों ने बीबीसी से टेस्ट की वास्तविक रिकॉर्डिंग भी खरीद ली।

इस तरह से फिल्म में स्क्रिप्टेड दृश्यों के साथ-साथ क्रिकेट के असली फुटेज का भी इस्तेमाल किया गया था। इंग्लैंड के असली खिलाड़ी, एक नकली टेस्ट ग्राउंड पर एक्टिंग कर रहे थे, जबकि असली मैचों के फुटेज ने इस काल्पनिक मैच को एकदम असली जैसा दिखाने में बड़ी मदद की।

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जब फिल्म बन गई और ये सब बाहर पता चल गया तो बड़ा हंगामा हुआ। यहां तक कि इन सभी बड़े-बड़े क्रिकटरों पर तरह-तरह के आरोप लगे और इन पर एक्शन की मांग हुई। एक आरोप ये भी था कि हटन, कॉम्पटन, बेडसर और इंग्लैंड के अन्य खिलाड़ी, 'द ओवल' में चल रहे एशेज टेस्ट को बीच में ही छोड़कर, कुछ देर के लिए इस फिल्म की शूटिंग के लिए चले गए थे। ये भी आरोप था कि इन क्रिकेटरों की मदद से ही फिल्म वालों का कोई कैमरामैन ड्रेसिंग रूम में आ गया था और जो वास्तविक नज़ारे और बातचीत थी, उसे रिकॉर्ड कर लिया। बहरहाल कुछ भी साबित न हुआ और एमसीसी ने भी किसी एक्शन में कोई दिलचस्पी न ली।

यह फिल्म 1953 की उसी यादगार इंग्लिश क्रिकेट समर में बनी और रिलीज़ हुई, जब इंग्लैंड 'द ओवल' में एशेज सीरीज का निर्णायक टेस्ट मैच खेला था। 1932-33 के बाद से इंग्लैंड ने एशेज नहीं जीती थी। 1953 की सीरीज के चार टेस्ट ड्रॉ हो चुके थे, जिसका मतलब था कि अब सब कुछ 'द ओवल' में आखिरी मैच में होना था। इस असली ड्रामे के सेंटर में थे- लेन हटन।

हटन ने इंग्लैंड को जीत दिलाई। जिम लेकर और टोनी लॉक ने ऑस्ट्रेलिया को 162 रन पर ऑल आउट कर दिया, जिससे इंग्लैंड ने एशेज में एक शानदार जीत हासिल की। ये सब फ़िल्म की स्क्रिप्ट में इस्तेमाल हुआ और बड़ा सटीक रहा। इस तरह 'द फ़ाइनल टेस्ट' (The Final Test) फिल्म में जो हीरो क्रिकेटर का आखिरी टेस्ट दिखाया 'द ओवल' में, उसे असल में 'द ओवल' के उस एशेज टेस्ट वाला बना दिया जो इंग्लैंड के क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार पल में से एक गिनते हैं।

जो कुछ भी हुआ उसकी फिल्म में हिस्सेदार रहे हर इंग्लिश क्रिकेटर ने तारीफ़ की पर इंग्लैंड के स्टार, सिरिल वॉशब्रुक (जिन्होंने फ़िल्म में खुद अपनी ही भूमिका निभाई) उन्हें ये स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई। फ़िल्म में उन्हें सिर्फ़ 40 रन बनाकर आउट दिखाया जबकि लेन हटन ने शतक बनाया और वे अपनी इस 'नाकामयाबी' को हजम नहीं कर पाए। बाद में वे फिल्म के बारे में खूब बताते रहे।

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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