नई दिल्ली, 4 फरवरी | सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को संरचनात्मक सुधार एवं प्रशासनिक इकाई के संबंध में लोढ़ा समिति की सभी सिफारिशें लागू करने के लिए कहा। न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुर और न्यायमूर्ति फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलिफुल्ला की पीठ ने बीसीसीआई से कहा "न्यायमूर्ति आर. एम. लोढ़ा की समिति ने बहुत ही व्यावहारिक तर्कसंगत समाधान सुझाए हैं। आप वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए इन सिफारिशों के अनुसार कार्य करें।"

न्यायालय ने बीसीसीआई की ओर से उपस्थित वरिष्ठ वकील शेखर नाफाडे को लोढ़ा समिति की रिपोर्ट का महत्व बताते हुए कहा, "इस रिपोर्ट को भरपूर सम्मान दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसे कानून जगत के बेहद योग्य एवं ईमानदार सदस्य ने तैयार किया है।"

नाफाडे ने अदालत को लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने में बीसीसीआई के सामने आ रही परेशानियां बताने की कोशिश कीं तो न्यायालय ने कहा, "इन सिफारिशों के अनुसार कार्य करने में ऊंचे पदों पर बैठे लोग प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन किसी भी तरह के संक्रमण में समस्याएं होती ही हैं।" नाफाडे ने अदालत को बताया कि बीसीसीआई तमिलनाडु में एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत है और अपने नियमों से बंधी हुई है।

नाफाडे ने कहा, "रिपोर्ट में व्यापक परिवर्तन की बात भी कही गई है। हमारा रुख रिपोर्ट के विरुद्ध नहीं है। इसमें तकनीकी और कानूनी परेशानियां आ रही हैं। बीसीसीआई की विधिक समिति रिपोर्ट में की गई सिफारिशों पर निर्णय लेगी, जिस पर विचार करने के बाद बीसीसीआई कोई अंतिम निर्णय लेगा।" लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने पर बीसीसीआई के मौजूदा रुख पर स्पष्ट विरोध जाहिर करते हुए न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह सिफारिशों पर बीसीसीआई की सुविधाजनक व्याख्या को स्वीकार नहीं करेगी।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा, "हम इन सिफारिशों को स्वीकार करते हैं और लोढ़ा समिति को बीसीसीआई को अपनी सिफारिशें लागू करने में मदद करने के लिए दबाव बनाने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए कहेंगे।" न्यायमूर्ति ठाकुर ने स्पष्ट तौर पर कहा कि बीसीसीआई में संरचनात्मक सुधार के लिए दी गई सिफारिशों को लेकर कोई आनाकानी नहीं होनी चाहिए।

नाफाडे ने अदालत को बताया कि बोर्ड की विधिक समिति सिफारिशों का अध्ययन एवं जांच करने के लिए बैठकें कर रही है, जिसके बाद बोर्ड इस मामले पर विचार करेगा। नाफाडे ने बीसीसीआई की ओर से अदालत को जवाब देने के लिए समय की मांग भी की। इस बीच क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (सीएबी) की ओर से अदालत में मौजूद वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों का सारांश पढ़कर सुनाया और अदालत को बताया कि बिहार और पूर्वोत्तर के छह राज्यों को बीसीसीआई में प्रतिनिधित्व ही नहीं मिला है।

उन्होंने अदालत से कहा कि दूसरी ओर महाराष्ट्र और गुजरात से कई-कई प्रतिनिधि हैं। उल्लेखनीय है कि लोढ़ा समिति ने अपनी रिपोर्ट में देश में क्रिकेट प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक सुधारों की सिफारिश की है, जिसमें बोर्ड अधिकारियों के कार्यकाल घटाने और बीसीसीआई तथा आईपीएल के लिए अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयां स्थापित करने जैसी सिफारिशें शामिल हैं।

लोढ़ा समिति ने बीसीसीआई को सूचना के अधिकार के तहत लाने और क्रिकेट में सट्टेबाजी को वैधता दिए जाने की सिफारिश भी की है। सर्वोच्च न्यायालय अब मामले पर तीन मार्च को अगली सुनवाई करेगा।

एजेंसी

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Saurabh Sharma
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