सूर्यकुमार यादव टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी कर रहे हैं और करोड़ों फैंस की नज़रें उन्हीं पर होंगी लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के कैंपेन से परे, इस टूर्नामेंट में एक और दिलचस्प भारतीय कनेक्शन है और वो है भारतीय मूल के खिलाड़ी, जो वर्ल्ड स्टेज पर कई एसोसिएट टीमों की कप्तानी कर रहे हैं तो चलिए आपको उन तीन भारतीय मूल के कप्तानों के बारे में बताते हैं जो इस टी-20 वर्ल्ड कप में अपनी-अपनी टीमों को आगे ले जाने की कोशिश करेंगे।
1. मोनांक पटेल (यूएसए)
मोनंक पटेल का इंटरनेशनल क्रिकेट तक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। 1 मई, 1993 को गुजरात के आनंद में जन्मे, भारतीय मूल के इस बल्लेबाज ने भारत में एज-ग्रुप सिस्टम से शुरुआत की। अंडर-16 और अंडर-19 लेवल पर गुजरात का प्रतिनिधित्व किया और अपने जूनियर दिनों में जसप्रीत बुमराह के साथ भी खेले। हालांकि, फिर भी इतनी काबिलियत के बावजूद वो भारत के लिए उच्च स्तरीय क्रिकेट नहीं खेल सके। 2010 में ग्रीन कार्ड मिलने के बाद, मोनंक 2013 में हमेशा के लिए यूनाइटेड स्टेट्स चले गए।
इस कदम से उनके क्रिकेट करियर पर लगभग ब्रेक लग गया था क्योंकि उन्होंने गंभीरता से खेल छोड़ने के बारे में सोचा था। हालांकि, क्रिकेट फिर से उनकी ज़िंदगी में वापस आ गया। यूएसए में बसने के बाद, मोनंक ने अपना करियर फिर से शुरू किया और 2019 में वनडे और टी-20I दोनों में इंटरनेशनल डेब्यू किया और उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब वो अपने ही मूल देश के खिलाफ यूएसएक की टीम की कप्तानी करेंगे।
2. दिलप्रीत सिंह बाजवा (कनाडा)
भारतीय मूल के क्रिकेटर दिलप्रीत सिंह बाजवा, एसोसिएट क्रिकेट में सबसे रोमांचक युवा बल्लेबाजों में से एक बनकर उभरे हैं और अब कनाडा की नेशनल टीम की कप्तानी करते हैं। 26 जनवरी, 2003 को पंजाब के गुरदासपुर में जन्मे बाजवा की क्रिकेट की नींव भारत में पड़ी, जहां उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज ग्राउंड में कोच राकेश मार्शल के अंडर ट्रेनिंग ली और धारीवाल के गुरु अर्जुन देव स्कूल में पढ़ाई की। उन्होंने नेट्स में घंटों बिताए और पारंपरिक एज-ग्रुप रास्ते को फॉलो किया।
भारत छोड़ने से पहले, बाजवा ने एक शानदार पारी खेलते हुए पटियाला के खिलाफ अंडर-19 मैच में 130 रन बनाए। उनकी इस पारी के बाद उम्मीद थी कि उन्हें पंजाब अंडर-19 टीम में जगह मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब ये मौका नहीं मिला, तो उनके माता-पिता ने एक बड़ा फैसला लिया। उनके पिता, हरप्रीत सिंह, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में काम करते थे, जबकि उनकी मां हरलीन कौर, एक सरकारी स्कूल टीचर थीं। 2020 में, बेहतर मौकों की तलाश में परिवार कनाडा चला गया और उसके बाद बाजवा की जिंदगी में एक नया अध्याय कनाडा क्रिकेट के रूप में जुड़ गया और आज वो भारत में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप में कनाडा की कप्तानी करते हुए दिखेंगे।
3. जतिंदर सिंह (ओमान)
इंटरनेशनल क्रिकेट में जतिंदर सिंह का उदय भी एक दिलचस्प कहानी है। 5 मार्च, 1989 को पंजाब के लुधियाना में जन्मे जतिंदर कम उम्र में ही ओमान चले गए और वहां बिना किसी एकेडमी या फॉर्मल कोचिंग स्ट्रक्चर के अपने क्रिकेट सफर की शुरुआत की। उनका शुरुआती विकास सीमेंट विकेट पर हुआ। उसके बाद एस्ट्रो टर्फ पर, और फिर 2011 में टर्फ क्रिकेट में आए।
Also Read: LIVE Cricket Score
सचिन तेंदुलकर के अनुशासन और कंसिस्टेंसी से शुरू में और बाद में विराट कोहली की इंटेंसिटी और फिटनेस स्टैंडर्ड से प्रेरित होकर, जतिंदर धीरे-धीरे ओमान के घरेलू क्रिकेट में आगे बढ़े। दाएं हाथ के टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज, उन्होंने 2015 में टी-20I डेब्यू और 2019 में वनडे डेब्यू किया और जल्दी ही खुद को नेशनल टीम का एक अहम खिलाड़ी साबित किया। अब वो इस टीम की रीढ़ बन गए हैं और टी-20 वर्ल्ड कप में अपनी टीम की कमान संभालते हुए भी नजर आएंगे।