Who is Rumesh Tharanga Pathirage: स्कॉटलैंड के ग्लासगो (Glasgow) शहर में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) खेला जा रहा है जहां बीते शनिवार, 31 जुलाई को मेंस जैविलन थ्रो के फाइनल में श्रीलंका के 23 साल के एथलीट रुमेश थरंगा पथिरागे (Rumesh Pathirage) ने 89.75 मीटर लंबा थ्रो करके गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने भारत के दिग्गज खिलाड़ी नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) को पछाड़कर ये मेडल जीता है जिसके लिए उनकी खूब तारीफ हो रही है।
क्रिकेट से है खास रिश्ता: काफी कम लोग ये जानते हैं कि श्रीलंका के रुमेश पथिरागे जिन्होंने CWG 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा और अपने देश का सम्मान बढ़ाया, वो क्रिकेट के पूर्व खिलाड़ी रह चुके हैं। उन्होंने साल 2012 में अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी और एक समय U18 कैटेगरी में क्रिकेट खेला। वो 134 Kph की रफ्तार में गेंदबाज़ी करते थे और श्रीलंका के मौजूदा तेज गेंदबाज़ ईशान मलिंगा के साथ खेल चुके हैं।
कोच की सलाह पर थामा भाला: रुमेश पथिरागे श्रीलंका क्रिकेट के एक उभरते हुए तेज गेंदबाज़ थे जिन्होंने अपने कोच टोनी के कहने पर भाला थाम लिया। वो बताते हैं, "कोच टोनी ने मुझे जैवलिन से परिचित कराया। उन्होंने सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि जिंदगी जीना भी सिखाया।" कोच की गाइडेंस और अपनी मेहनत से ही आज रुमेश पथिरागे नंबर-1 जैविलन थ्रोअर बनकर सामने आए हैं।
नीरज चोपड़ा ने भी की तारीफ: भारत के दिग्गज जैवियन थ्रोअर नीरज चोपड़ा श्रीलंका के रुमेश पथिरागे को अपना अच्छा दोस्त कहते हैं। वो उनके प्रदर्शन से प्रभावित हैं और उन्होंने फाइनल से पहले श्रीलंकन खिलाड़ी की दिल खोलकर तारीफ भी की थी। नीरज चोपड़ा ने कहा था, "रुमेश एक बहुत अच्छा लड़का है और मेरा दोस्त भी है। इस साल उसने शानदार प्रदर्शन किया है। श्रीलंका के लिए उसका अच्छा करना खुशी की बात है।"
दिलचस्प रहा फाइनल: आपको ये जानकर हैरानी होगी कि जहां एक तरफ रुमेश पथिरागे ने CWG 2026 के फाइनल में 89.75 मीटर लंबा थ्रो करके गोल्ड मेडल जीता, वहीं इस पूरे फाइनल के दौरान उनका एक यही थ्रो वैध था। हालांकि इसी एक थ्रो के दम पर उन्होंने बड़े-बड़े दिग्गजों को मात दी और नंबर-1 का टाइटल अपने नाम कर लिया।
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बात करें जैवियन थ्रो के सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल की तो वो भारत के खाते में आए। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर थ्रो करके सिल्वर मेडल जीता, वहीं यश वीर सिंह ने 85.41 थ्रो करके ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।