क्या विराट कोहली और रोहित शर्मा की रिटायरमेंट के बाद खतरे में पड़ जाएगा वनडे क्रिकेट? अश्विन ने कह दी बड़ी बात
वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर आर अश्विन ने खुलकर अपनी चिंता जाहिर की है। उनका मानना है कि टी20 की बढ़ती लोकप्रियता और टेस्ट की अहमियत के बीच 50 ओवर का फॉर्मेट दबता जा रहा है। अश्विन ने विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे बड़े नामों की अहमियत पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक इन दिग्गजों के रिटायर होने के बाद वनडे क्रिकेट के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका मानना है कि टेस्ट क्रिकेट की स्थायित्व और टी20 क्रिकेट की तेज़ रफ्तार लोकप्रियता के बीच वनडे फॉर्मेट अपनी पहचान खोता जा रहा है। अश्विन ने साफ कहा कि मौजूदा दौर में दर्शकों की दिलचस्पी टी20 और कुछ हद तक टेस्ट तक ही सीमित रह गई है।
अश्विन ने अपने हिंदी यूट्यूब चैनल ‘ऐश की बात’ पर कहा कि 2027 वर्ल्ड कप के बाद वनडे क्रिकेट का भविष्य उन्हें थोड़ा असुरक्षित नजर आता है। उन्होंने खुद को एक दर्शक की जगह रखकर यह बात कही और बताया कि वह विजय हजारे ट्रॉफी जरूर देख रहे हैं, लेकिन सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जैसी दिलचस्पी उन्हें इसमें महसूस नहीं हो रही।
अश्विन ने ये भी कहा कि जब रोहित शर्मा और विराट कोहली विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने लौटे, तो लोगों ने इस टूर्नामेंट को दोबारा देखना शुरू कर दिया। उनके मुताबिक, यह बात सभी जानते हैं कि खेल हमेशा खिलाड़ियों से बड़ा होता है, लेकिन कई बार ऐसे बड़े नामों की मौजूदगी ही किसी फॉर्मेट और टूर्नामेंट को प्रासंगिक बनाए रखने का काम करती है।
वनडे क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए अश्विन ने कहा कि यह फॉर्मेट अब वैसा नहीं रहा जैसा पहले हुआ करता था। उन्होंने एमएस धोनी का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले बल्लेबाज़ों को पारी संभालने और आखिर में तेजी से रन बनाने का मौका मिलता था। अब दो नई गेंदों और फील्डिंग नियमों की वजह से वह अंदाज़ लगभग खत्म हो चुका है।
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वहीं, अश्विन के मुताबिक अगर वनडे क्रिकेट को दोबारा खास बनाना है, तो फ्रेंचाइज़ी लीग्स को जगह देते हुए फुटबॉल की तरह चार साल में एक वर्ल्ड कप का मॉडल अपनाया जाना चाहिए। इससे खिलाड़ियों पर बोझ भी कम होगा और दर्शकों के लिए वनडे क्रिकेट फिर से एक बड़ा इवेंट बन सकता है।