Dennis Amiss: हाल ही में इंग्लैंड-भारत टेस्ट सीरीज के दौरान, भारत के बल्लेबाजों ने 100 की गिनती के कई नए रिकॉर्ड बनाए। इनमें से तीन 100 ऐसे थे जिन पर 'लालच' का लेबल लगा और अलग तरह से चर्चा में रहे:

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लॉर्ड्स में, केएल राहुल की तीसरे दिन लंच से पहले 100 पूरा करने की जल्दबाजी के लिए आलोचना हुई और आरोप लगा कि इसी चक्कर में ऋषभ पंत ब्रेक से ठीक पहले आउट हो गए।

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ओल्ड ट्रैफर्ड में, इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने वाशिंगटन सुंदर और रवींद्र जडेजा पर अपनी बेमिसाल कोशिश से भारत के लिए सम्मानजनक ड्रॉ हासिल करने के बावजूद, अपने-अपने 100 पूरा करने के चक्कर में बिना मतलब बल्लेबाजी जारी रखने का आरोप लगाया। उनका मानना था कि उनके रिकॉर्ड में ये 100 न भी आते तो भी, जैसा वे खेले, उसके लिए उन्हें तारीफ ही मिलती। 

उस दिन के खेल में जैसे ही आखिरी घंटा शुरू हुआ, स्टोक्स ने हैंडशेक का ऑफर दिया। तब जडेजा 89 और वाशिंगटन 80 रन पर थे इसलिए मेहमान टीम ने हैंडशेक से इंकार कर दिया। उसके बाद 5 ओवर और खेले जिसमें पार्ट-टाइम गेंदबाज ब्रुक और जो रूट ने गेंदबाजी की ताकि बड़े गेंदबाज़ों को फिजूल में थकने से बचाएं। जैसे ही जडेजा (उनका 5वां) और वाशिंगटन (उनका पहला) के 100 बने, टेस्ट ड्रॉ हो गया।

ओल्ड ट्रैफर्ड में जो हुआ वह कतई अनोखा नहीं था। ढेरों ऐसी मिसाल हैं जब किसी ख़ास रिकॉर्ड की तलाश में, जीत/हार की उम्मीद के बिना, टेस्ट में खेल तब तक जारी रखा, जब तक वह रिकॉर्ड बना या कोई खास रिकॉर्ड बनते ही टेस्ट में खेल ड्रॉ पर रोक दिया। इसीलिए आम तौर पर स्टोक्स के इस हैंडशेक ऑफर को ज्यादा सपोर्ट न मिला पर मजे की बात ये कि तब भी स्टोक्स ने इस इनकार को एक मुद्दा बना दिया।

क्रिकेट में तो एक ऐसा अनोखा किस्सा भी है जो इस मामले में दूसरी टीम के कप्तान की एक अलग सोच की झलक देता है।

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इंग्लैंड और वरिकशायर के मशहूर और कामयाब बल्लेबाज डेनिस एमिस ने 1960 से 1987 तक के अपने करियर में, फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 42.86 औसत से 100 वाले 102 स्कोर के साथ 43423 रन बनाए। लिमिटेड ओवर क्रिकेट के बढ़ने से फर्स्ट क्लास क्रिकेट मैचों की गिनती में लगातार कमी आ रही है और इसीलिए आधुनिक युग के बल्लेबाजों के कमाल की चर्चा में आम तौर पर 100 शतक जैसे रिकॉर्ड का जिक्र ही नहीं होता। इसे हासिल करना अब लगभग 'असंभव' सा हो गया है। डेनिस एमिस ने 1986 में ये रिकॉर्ड बनाया था और उनके बाद से सिर्फ मार्क रामप्रकाश इस मंजिल तक पहुंचे हैं। सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर जैसी रन मशीन भी इस रिकॉर्ड से चूक गए। इसलिए, अब ये समझना आसान हो जाएगा कि जब डेनिस एमिस इस रिकॉर्ड के करीब थे तो उनके लिए एक-एक 100 कितना ख़ास था और 100वां 100 बनाने के लिए वे कितने बेताब थे। 

डेनिस एमिस ने 29 जुलाई, 1986 के दिन अपना 100वां 100 बनाया पर एक अजीब तमाशे के बाद, जिसके बारे में बहुत कम जानकारी है। 26, 28 और  29 जुलाई 1986 को बर्मिंघम के एजबेस्टन में लेंकशायर-वरिकशायर मैच खेले ब्रिटानिक एश्योरेंस काउंटी चैंपियनशिप 1986 में और उसमें डेनिस एमिस ने ये रिकॉर्ड बनाया। वरिकशायर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी की पर ये फैसला उल्टा पड़ गया और सिर्फ 138 रन पर पूरी टीम ढेर हो गई। डेनिस एमिस ने 33 रन बनाए। लेंकशायर ने जवाब दिया 293-9 पारी समाप्त घोषित बनाकर। 

वरिकशायर ने दूसरी पारी में बेहतर बल्लेबाजी की और 3 दिन का ये मैच ड्रॉ की तरफ बढ़ते हुए बेजान सा हो गया। जब दिन/मैच का खेल खत्म होने के करीब था तो अच्छी बल्लेबाजी कर रहे, नॉट आउट बल्लेबाज डेनिस एमिस को लगा कि अगर मौका मिले तो इस बार 100 बना देंगे। उन्हें मालूम था कि करियर के इस आखिरी दौर में वे ज़्यादा नहीं खेल पाएंगे और क्या पता इसके बाद 100 बनाने का कोई मौका भी न मिले। इसलिए उन्होंने लेंकशायर के कप्तान क्लाइव लॉयड से अनुरोध किया कि बस आधे घंटे तक और खेलें ताकि वह अपना 100वां 100 बना लें। नोट कीजिए- क्लाइव लॉयड तो ऐसे उदार निकले कि न सिर्फ मान गए, बल्कि अपने पार्ट टाइम गेंदबाज अटैक पर लगा दिए मदद के लिए। डेनिस एमिस ने 101* बनाए और ये उनका 100वां 100 था। 

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डेनिस एमिस ने याद करते हुए बाद में बताया, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं 100 फर्स्ट क्लास 100 बना सकूंगा। उस दिन मैं अच्छा खेल रहा था। जब से 98 या 99 शतक पर पहुंचा था तो मुश्किल होने लगी थी और रन आसानी से नहीं बन रहे थे।  इस मैच में जब कोई साफ़ नतीजा निकलने की कोई उम्मीद न रही तो मौके को देखते हुए, मैंने लेंकशायर टीम को आगे खेलते रहने का अनुरोध किया। क्लाइव लॉयड मुझे 100वां 100 बनाने का मौका देने पर राज़ी हो गए। मैं 44 साल की उम्र तक खेलता रहा। अब किसी के लिए भी 100 शतक बनाना बड़ा मुश्किल है क्योंकि मैच कम हो गए हैं पर ये बड़े कमाल और सम्मान वाला रिकॉर्ड है।"

उस समय की अखबारों में छपी मैच की रिपोर्ट के अनुसार, पैक-अप का समय 5.30 बजे था और एमिस तब 62* पर थे। एमिस ने वायदा किया कि जल्दी-जल्दी रन बनाने की कोशिश करेंगे लेकिन लेंकशायर के खिलाड़ियों को राजी कराने के लिए शैंपेन की 'रिश्वत' का ऑफर भी करना पड़ा। जॉन अब्राहम और नील फेयरब्रदर ने दोस्ताना अंदाज में गेंदबाजी की। लॉयड ने कहा था, "डेनिस इंग्लैंड के टॉप खिलाड़ियों में से एक हैं, और उन्हें 100 बनाने का मौका देना मुझे सही लगा।"

अपनी ऑटोबायोग्राफी "नॉट आउट एट क्लोज ऑफ प्ले: अ लाइफ इन क्रिकेट (Not Out at Close of Play: A Life in Cricket)" में भी डेनिस एमिस ने  इस किस्से का जिक्र किया और माना कि उन्होंने जो किया वह गलत लगा, लेकिन ये भी माना कि उनसे पहले की तरह से रन नहीं बन रहे थे और उन्हें लग रहा था कि अब ज्यादा मौके नहीं मिलेंगे। उन्होंने कुल 102 फर्स्ट क्लास 100 बनाए। जब 100वां 100 बनाया था तो उम्र 43 साल थी पर वास्तव में अभी भी बहुत अच्छा खेल रहे थे। वे क्रीज पर थे तो कुल 162 रन बने और इनमें से 101* डेनिस एमिस के थे। 

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इसी 100वें 100 से जुड़ी एक और बात का किताब में डेनिस एमिस ने जिक्र किया,  "जब मुझे क्वीन ने एमबीई के टाइटल से सम्मानित किया तो उन्होंने कहा कि मैंने सुना है कि आप एक बड़े ख़ास क्लब में शामिल हो गए हैं। मुझे लगा कि शायद वे एजबेस्टन प्रायरी लॉन टेनिस क्लब के बारे में बात कर रही हैं। फिर मुझे बाद में एहसास हुआ कि वह 100 शतक की बात कर रही थीं।"

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चरनपाल सिंह सोबती

लेखक के बारे में

Saurabh Sharma
Saurabh Sharma is the Editorial Head of Cricketnmore Hindi and a passionate cricket journalist with over 14 years of experience in sports media. He began his journalism career with Navbharat Times, part of the Times of India Group, before moving to television media with Sadhna News. In 2014, he joined Cricketnmore and currently serves as the editor of the platform.
Known for his deep understanding of cricket statistics and unique storytelling approach, Saurabh specializes in cricket news, match analysis, records, and feature stories. Along with editorial responsibilities, he also works as a show producer for popular cricket video series such as Cricket Tales, Cricket Flashback, and Cricket Trivia. Read More
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