The Rise and Decline of Karnail Singh Stadium - 2026-27 रणजी ट्रॉफी सीजन में मुंबई का ब्रेबोर्न स्टेडियम, रेलवे टीम का होम ग्राउंड है। ऐसा क्यों? नई दिल्ली के करनैल सिंह स्टेडियम का क्या हुआ जो सालों तक रेलवे का होम ग्राउंड रहा? यही स्टोरी है। तो क्या इस स्टेडियम का किस्सा खत्म? नए होम ग्राउंड वाली खबर महज मैच शिफ्ट करने की खबर नहीं, कम से कम अभी तो ऐसा लगता है कि इस स्टेडियम के इतिहास का एक बड़ा चेप्टर खत्म हो रहा है।

पीढ़ियों तक, यह स्टेडियम, रेलवे क्रिकेट की पहचान रहा। यहीं वे अपने घरेलू मैच खेलते रहे, उनके सपोर्ट वाले इकट्ठा होते थे और भारतीय खेलों के कई खास पल की यादें यहीं से जुड़ी हैं पर आज फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इस की चर्चा बड़ी कम हो गई है।

नई दिल्ली में पहाड़गंज इलाके में बसी रेलवे कॉलोनी में है ये स्टेडियम। ये 1954 में बना था। शुरू में नाम था पहाड़गंज रेलवे स्टेडियम। 1978 में, अपने समय के एक प्रभावशाली रेलवे एडमिनिस्ट्रेटर करनैल सिंह के सम्मान में, रेलवे ने इसका नाम बदलकर करनैल सिंह स्टेडियम कर दिया। बहरहाल सच ये है कि भले ही यहां क्रिकेट की बात कर रहे हैं पर ये मल्टी स्पोर्ट स्टेडियम था।

इसे बनाया ही इस डिजाइन से था कि और दूसरे खेल भी यहां खेल सकें- यहां एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, बॉक्सिंग और बैडमिंटन समेत और भी कई खेल खेले। दशकों तक, यह राजधानी में स्पोर्ट्स का एक खास सेंटर रहा। न सिर्फ रेलवे स्टाफ और उनके परिवार के लिए, इंटरनेशनल क्रिकेट टीम भी यहां प्रैक्टिस के लिए खेलीं।

इस स्टेडियम से जुड़ी एक बड़ी मशहूर गैर-क्रिकेट स्टोरी पान सिंह तोमर की है- वही जो बाद में बिल्कुल अलग वजह से मशहूर हुए। 1964 में, उन्होंने यहीं 3000 मीटर स्टीपलचेज में नेशनल रिकॉर्ड बनाया था, जो कई साल तक उनके नाम रहा। कई साल बाद, जब उन पर फिल्म बनी और बेमिसाल अभिनेता इरफान खान ने उनका रोल निभाया तो वे उनके करेक्टर की तैयारी करते हुए, 'फील' लेने के लिए, इस स्टेडियम में भी आए थे ताकि इस स्टेडियम के माहौल में उस एथलीट की यादों को महसूस कर सकें जो कई साल यहां एथलेटिक मीट में हिस्सा लेते रहे।

बहरहाल, क्रिकेट ही इस स्टेडियम की सबसे चर्चित पहचान रहा। करनैल सिंह स्टेडियम, दशकों तक रेलवे का पारंपरिक होम ग्राउंड रहा। भले ही ये कोई शानदार इंटरनेशनल वेन्यू नहीं था, लेकिन इसका अपना एक माहौल था। ग्राउंड के चारों ओर रेलवे कॉलोनी, कई फ्लैट में तो खिड़की खोलो तो सीधे ग्राउंड देखो, खिलाड़ी और सपोर्टर ग्राउंड से जुड़े थे, जमावड़ा होता था यहां और अक्सर मैचों का मिजाज लोकल होता था। सलीम दुर्रानी जैसे खिलाड़ी भी यहां खेले और इसकी लोकप्रियता को और बढ़ाया। दुर्रानी, दिल्ली में बड़े लोकप्रिय थे। साथ ही, रेलवे से भी जुड़े रहे और इस ग्राउंड को एक ऐसी पहचान दी जो कभी बड़े स्टेडियम भी हासिल नहीं कर पाए।

ये स्टेडियम, रेलवे क्रिकेट की सबसे बड़ी उपलब्धि में से एक में भी हिस्सेदार रहा। 2002 में, रेलवे ने करनैल सिंह स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी फाइनल खेला और अपने ही ग्राउंड पर रणजी टाइटल जीता। भले ही ये पुरुष क्रिकेट का इंटरनेशनल वेन्यू न बना पर यहां एक बड़े ग्लोबल क्रिकेट इवेंट के मैच खेले जा चुके हैं। 1997 के महिला वर्ल्ड कप के दौरान, श्रीलंका- वेस्टइंडीज मैच यहीं खेले थे।

तो गड़बड़ कहां हुई? असल में जब क्रिकेट के अपने बड़े स्टेडियम बनने लगे तो इस ग्राउंड की साधारण सुविधाएं फोकस में आ गईं। उस पर मल्टी स्पोर्ट्स के लिए इसका इस्तेमाल जिसे कभी इसकी खासियत मानते थे, उसी को अब क्रिकेट में, एक प्रॉब्लम की तरह से उछाला जाने लगा। सबसे ज्यादा शोर, दूसरे खेल खेलने से पिच के ख़राब होने का, होने लगा।

बात इतनी बिगड़ गई कि 2012 में, पिच के सही न होने के आरोप के साथ बीसीसीआई ने यहां, अपनी ट्रॉफियों के मैच कराने पर रोक लगा दी। नतीजा रेलवे को और दूसरे ग्राउंड तलाशने पड़े और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के साथ स्टेडियम का नाता टूट गया। बहरहाल कई सुधार के बाद यहां फर्स्ट क्लास क्रिकेट की वापसी हुई। तभी रेलवे और पंजाब के बीच 2022-23 रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान एक बड़ा अजीब तमाशा हुआ। पिच पर गेंद, खतरनाक और असमान तरीके से बाउंस कर रही थी। इतनी बुरी हालत थी कि 103 ओवर के खेल में ही में 24 विकेट गिर गए जिनमें से 20 विकेट तेज गेंदबाजों ने लिए। कई खिलाड़ियों को चोटें आईं, जिनमें रेलवे के बल्लेबाज अरिंदम घोष भी थे और उनकी उंगली में फ्रैक्चर हो गया।

अंपायरों ने बीसीसीआई को, चलते मैच के बीच, इमरजेंसी रिपोर्ट भेजी जिसमें साफ लिखा था कि पिच खतरनाक है और खेलने लायक नहीं। बीसीसीआई ने दूसरे दिन मैच को बीच में ही रोक दिया। अगले दिन, नए सिरे से, साथ की दूसरी पिच पर मैच दोबारा शुरू किया। रेलवे के बाकी घरेलू मैच दूसरी जगह शिफ्ट कर दिए। ये वह बाउंसर था जो इस फर्स्ट-क्लास क्रिकेट वेन्यू के ताबूत में एक बड़ी कील साबित हुआ।

रेलवे को एकदम अपने घरेलू मैचों के लिए आस-पास ग्राउंड भी नहीं मिले। हालत ये आ गई कि गुजरात तक चले गए और वहां भी एक मैच कहीं, तो दूसरा और कहीं और। इस तरह रेलवे टीम ने 'होम-ग्राउंड' वाला फायदा भी गंवा दिया जो उनके इन सालों के रिकॉर्ड में साफ नजर आता है। उधर रेलवे ने भी मान लिया कि यहां क्रिकेट की मौजूदा बड़ी जरूरतों को पूरा कर पाना बड़ा मुश्किल है। इसलिए स्टेडियम के दरवाजे दूसरे खेलों के लिए अभी भी खुले हैं, क्रिकेट भी खेलते हैं पर बीसीसीआई इवेंट्स के मैच नहीं। अब बड़ा सवाल ये नहीं कि क्या आगे कभी करनैल सिंह स्टेडियम में रणजी मैच खेलेंगे, बल्कि ये है कि एक फर्स्ट-क्लास क्रिकेट वेन्यू के तौर पर इस स्टेडियम का भविष्य क्या है?

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2026-27 सीजन में, रेलवे टीम अपने घरेलू रणजी ट्रॉफी मैच मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में खेलेगी जिसमें एक 'विजिटर' टीम मुंबई भी होगी। ब्रेबोर्न जाने का फ़ैसला सिर्फ लॉजिस्टिक्स से नहीं जुड़ा, ये उस ग्राउंड के लिए एक युग के खत्म होने जैसा है जो कभी रेलवे क्रिकेट टीम का घरेलू ग्राउंड हुआ करता था।

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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