Sachin Tendulkar ODI World Cup Records: विश्वास कीजिए- भारत में कई शहर में, सड़कों पर, 2011 वर्ल्ड कप की पब्लिसिटी में जो बोर्ड लगे थे, उनमें से सबसे ज्यादा में सचिन तेंदुलकर का चेहरा था। संयोग देखिए- उसी वर्ल्ड कप को जीते और टीम ने जीत को सचिन तेंदुलकर को समर्पित किया। रिकॉर्ड के हिसाब से 2011 उनका 6 वां वर्ल्ड कप था और इसे जीते। मजे की बात ये कि 2011 विराट कोहली (तब उम्र 22 साल) का पहला आईसीसी टूर्नामेंट और वर्ल्ड कप था और उम्मीद की जा रही है कि इस बार रोहित शर्मा की टीम उन्हें 'जीत' समर्पित करेगी।

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बहरहाल ये सच है कि वनडे वर्ल्ड कप के साथ जो रिश्ता सचिन तेंदुलकर ने बनाया किसी और ने नहीं। 1992 से 2011 तक 6 वर्ल्ड कप में खेले पर सच ये है कि 7 वर्ल्ड कप के दौरान वे ग्राउंड पर थे- 1987 रिलायंस वर्ल्ड कप में वे वानखेड़े में बॉल बॉय की ड्यूटी पर थे। 

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1991-92 में ऑस्ट्रेलिया टूर में सिडनी और पर्थ में दो जादुई पारियां खेलीं और दिखा दिया था कि वर्ल्ड कप में क्या होने वाला है? 1992 वर्ल्ड कप- 8 मैच की 7 पारी में 283 रन 47.16 औसत से और इसमें 3 फिफ्टी थे- ख़ास तौर पर पाकिस्तान के विरुद्ध उनके 54* आज तक याद किए जाते हैं।  

1996 वर्ल्ड कप तो था ही सचिन तेंदुलकर का- 7 पारी में 523 रन 87+ औसत से जिसमें दो स्कोर 100 वाले थे। मुंबई में ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण की जो हालत हुई (84 गेंद में 90) उसे वे आज तक याद करते हैं। सब मानते हैं कि सेमीफाइनल में जब तक सचिन पिच पर थे जीत की उम्मीद खत्म नहीं हुई थी।
  
1999 वर्ल्ड कप ने उनकी नई पहचान को देखा। टूर्नामेंट के बीच में पिता की मृत्यु- भारत वापस लौटे लेकिन जितनी जल्दी संभव था वापसी की और अगले ही मैच में (विरुद्ध केन्या) 100- इस गिनती पर पहुंचते ही आसमान को देखा और कई आंखों में आंसू थे। प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर को अपने बेटे पर जरूर गर्व हुआ होगा। रिकॉर्ड रहा- 7 पारी में 253 रन 42+ औसत से। 

2003 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के विरुद्ध सबसे अद्भुत वनडे पारी में से एक खेली- 75 गेंद में 98 रन और जब अब्दुर रज्जाक ने अकरम की गेंद पर मिड-ऑन पर उनका कैच छोड़ा था तो कप्तान अकरम ने आवाज लगाई- 'तुझे पता है तूने किसका कैच छोड़ा है?' रिकॉर्ड रहा- 11 पारी में 673 रन 61+ औसत से। 

2007 वर्ल्ड कप तो टीम इंडिया के लिए 'रिकॉर्ड से निकालने वाला' रहा था। नौबत ये थी कि सचिन तेंदुलकर भी आलोचना के निशाने पर थे और यहां तक लिखा गया- वे  रिटायर क्यों नहीं हो रहे? रिकॉर्ड रहा- 3 पारी में 64 रन जिसमें एक स्कोर 57* था।  

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नए कोच गैरी कर्स्टन आए। कर्स्टन-धोनी ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। तेंदुलकर ने लगभग  24 साल तक क्रिकेट खेलने के बाद आखिरकार अपना सपना पूरा किया। रिकॉर्ड रहा- 9 पारी में 482 रन 53+ औसत से।  

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ऐसा वर्ल्ड कप करियर और किस का होगा? वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा 2278 रन (56.95 औसत से)- कोई और उन के रन रिकॉर्ड के करीब भी नहीं। वर्ल्ड कप में उनका सबसे बड़ा स्कोर- 2003 में नामीबिया के विरुद्ध 151 गेंद पर 152 रन (18 चौके)। 6 स्कोर 100 वाले- जिन में से 2011 में इंग्लैंड के विरुद्ध टाई मैच में 120 और दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध 111 रन बनाकर दिखाया अभी भी कैसा खेल सकते हैं? इनके साथ 15 फिफ्टी जोड़ लीजिए। एक वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा 673 रन का रिकॉर्ड भी अभी तक एक चुनौती है।  भले ही 2015 और 2019 वर्ल्ड कप में नहीं खेले- तब भी वर्ल्ड कप के बैटिंग रिकॉर्ड पर उनका नाम एक मील का पत्थर बना हुआ है। 
 

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लेखक के बारे में

Saurabh Sharma
Saurabh Sharma is the Editorial Head of Cricketnmore Hindi and a passionate cricket journalist with over 14 years of experience in sports media. He began his journalism career with Navbharat Times, part of the Times of India Group, before moving to television media with Sadhna News. In 2014, he joined Cricketnmore and currently serves as the editor of the platform.
Known for his deep understanding of cricket statistics and unique storytelling approach, Saurabh specializes in cricket news, match analysis, records, and feature stories. Along with editorial responsibilities, he also works as a show producer for popular cricket video series such as Cricket Tales, Cricket Flashback, and Cricket Trivia. Read More
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