कहानी क्रिकेट इतिहास के पहले अंतर्राष्ट्रीय वनडे मुक़ाबले की जो 5 जनवरी 1971 को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया।  

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साल 1877 में क्रिकेट इतिहास का पहला आधिकारिक टेस्ट मैच इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच मेलबर्न के मैदान पर खेला गया और इस मुकाबले को ऑस्ट्रेलिया ने अपने नाम किया। किसी ने यह सोचा भी नहीं था का पहले टेस्ट मैच खेलने के करीब 100 साल बाद इसमें एक बड़ा बदलाव आएगा। किसी को यह भी यकीन नहीं था कि इस बदलाव से इस खेल के प्रति ना सिर्फ खिलाड़ियों में बल्कि मैदान के बाहर दर्शकों के अंदर भी एक नई तरह की ऊर्जा और नया तरह का रोमांच देखने को मिलेगा।

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जिस बड़े बदलाव और नए तरह के रोमांच का इंतजार पूरी दुनिया कर रही थी वो कुछ और नहीं बल्कि पहला वनडे मुकाबला था। हालांकि तब इसे सोच समझकर नहीं खेला गया था बल्कि खिलाड़ियों और मैनेजमेंट की मजबूरी थी कि एक दिन का मैच कराया जाए और देखते-देखते ये इतना सफल और असरदार रहा कि यह भी आधिकारिक रूप से इंटरनेशनल क्रिकेट का हिस्सा बन गया।

क्रिकेट इतिहास के पहले वनडे मुकाबले की कहानी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच साल 1970-1971 में हुए एशेज सीरीज से जुड़ी है। दोनों टीमों के बीच सीरीज के दो मैच खत्म हुए लेकिन तीसरे मैच से पहले ऐसी मूसलाधार बारिश हुई कि मैच शुरू करना असंभव था। तीसरे टेस्ट के 4 लगातार दिन बारिश में धूल गए और अब बस एक दिन ही बचा था। इधर ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट बोर्ड पर इस बात का दबाव था कि कैसे वह बारिश के कारण मैच रद्द होने के बाद अपने नुकसान की भरपाई करें। मैच ना होने की सूरत में दर्शकों के ना आने से तब नुकसान बहुत बड़ा था।

इसी के बाद कंगारु क्रिकेट बोर्ड ने एक वनडे मुकाबला आयोजित करने का मन बनाया। हालांकि तब इंग्लैंड में 1963 से ही एक घरेलू टूर्नामेंट जिलेट कप खेला जाता जो की एक दिन का ही मैच होता था। हालांकि इस मैच से पहले ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने इंग्लैंड की टीम के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि एक अधिक टेस्ट मैच खेला जाएगा जो कि सीरीज का सातवां मुकाबला था।

लेकिन तीसरे टेस्ट के पांचवें दिन मौसम साफ हुआ और हर्जाने को भरने के लिए उन्होंने कुछ अलग करने का सोचा और आखिरकार 5 जनवरी साल 1971 को पहले वनडे मैच का आयोजन हुआ। 

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पहले वनडे मैच के नियम

दोनों ही टीमों के लिए मैच को 40 ओवरों का रखा गया और तब एक ओवर में 8 गेंद फेंकने का पर मुहर लगा जैसा पहले भी इंग्लैंड के घरेलू मैचों में हुआ करता था। नियम ऐसे बनाए गया कि दोनों ही टीमें सिर्फ एक-एक पारी खेलेगी और जो टीम सबसे ज्यादा रन बनाती है वो विजेता घोषित होगी, भले ही मौसम के अनुसार दूसरी टीम पूरी तरह से ऑल आउट हुई है या नहीं। गेंदबाजों के लिए भी नियम बनाए गए और कहा गया कि कोई भी गेंदबाज 5 से ज्यादा ओवर की गेंदबाजी नहीं करेगा।

इन सभी नियमों को देखकर पता चला कि मैच किसी भी हाल में ड्रॉ नहीं होगा।

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हालांकि मैच में टीमों ने अपने नाम में थोड़ा बदलाव किए और ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया XI और इंग्लैंड को इंग्लैंड XI का नाम मिला। रोमंस कंपनी ने मैच को कराने के लिए 5000 पौंड स्पॉन्सर के तौर पर दिए और जो मैन ऑफ द मैच था वो मात्र 90 पौंड इनामी राशि के रूप में रखा गया।

यह मैच कामकाज वाले दिन यानी मंगलवार को था। मैच के अधिकारियों को इस बात की चिंता थी कि इस ऐतिहासिक मुकाबले को देखने दर्शक आएंगे या नहीं और यह मैच कितना सफल हो पाएगा। उन्होंने यह अनुमान लगाया था कि करीब 20,000 दर्शक तो अपनी मौजूदगी दर्ज करा ही देंगे लेकिन कुछ अजूबा हुआ और क्रिकेट के दीवानों ने मैच अधिकारियों को गलत साबित किया। मैच को देखने 46,000 से भी ज्यादा दर्शक आए। बोर्ड ने ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन को मैदान पर आमंत्रित किया था। वो आए और उन्होंने मैच शुरू होने से पहले दोनों ही टीमों के लिए एक बेहतरीन भाषण दिया।

 

इंग्लैंड  - 190/10 (39.4)

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मैच में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान बिल लॉरी ने टॉस जीतकर इंग्लैंड को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया। इंग्लैंड की टीम इस मैच में पूरे 40 ओवर भी नहीं खेल सकी और 39.4 ओवरों में ही 190 रनों पर ढेर हो गई। टीम के लिए जॉन एडरिक ने सबसे ज्यादा 119 गेंदों में 82 रनों की पारी खेली। यह वनडे इतिहास का पहला अर्धशतक था। इसके अलावा केथ फ्लेचर और एलन नॉट ने 24-24 रनों का योगदान दिया। मेलबर्न का बड़ा मैदान बारिश के कारण थोड़ा धीमा हो गया था और इंग्लैंड के बल्लेबाज पूरी पारी में केवल 7 चौके मारने में ही सफल रहें जिसमें से 4 अकेले जॉन एडरिक ने लगाए थे।

इंग्लैंड के बल्लेबाज ऑस्ट्रेलिया के स्पिनरों के आगे ही नतमस्तक हो गए थे। कंगारुओं के लिए ऑफ-स्पिनर ऐशले मैलेट और लेग स्पिनर केथ स्टेकपोल मे 3-3 विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा ग्राहम मैकेंजी ने 2 विकेट तो वहीं एलन थॉमसन ने एक विकेट हासिल किया।

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ऑस्ट्रेलिया - 191/5 ( 34.6 ओवर)

ऑस्ट्रेलिया के लिए चैपल बंधुओं ने कमाल किया। इयान चैपल ने 60 रन तो डग वाल्टर्स के 41 रनों की अहम पारी के बाद ग्रेग चैपल ने 22 रनों का योगदान दिया और मैच को आसानी से ऑस्ट्रेलिया की झोली में पटक दिया। इयान चैपल ने अपनी 60 रनों की पारी के दौरान 5 चौके और एक बेहतरीन छक्का लगाया। इंग्लैंड के गेंदबाज बासिल डी ओलिवेरा के एक ओवर में कुल 21 रन आए।

ऑस्ट्रेलिया ने मैच को 5 विकेट से अपने नाम कर इतिहास रचा। क्रिकेट इतिहास के पहले टेस्ट के बाद पहले वनडे मुकाबले को भी कंगारूओं ने अपने नाम किया। 

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मैच के बाद विजडन ने इस मुकाबले का आधिकारिक मैच-रिपोर्ट छापने से मना कर दिया। बहुत सारे क्रिकेटरों और पूर्व खिलाड़ियों ने तभी यह मान लिया कि भविष्य में ऐसे मैच दर्शकों और खिलाड़ियों के बीच बड़ी सफलता कमा सकते हैं। उन्होंने यहां तक यह भी सलाह दिया की किसी भी दौरे पर टेस्ट के अलावा अलग से वनडे सीरीज रखी जाए।

मीडिया इस मैच को लेकर काफी उत्साहित दिखी और द गार्जियन ने इसे 'वनडे - टेस्ट' का नाम दिया

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