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ऑस्ट्रेलिया से एशेज टेस्ट का ब्रॉडकास्ट देखते हुए क्या आपने ध्यान दिया कि वहां से क्रिकेट स्कोर एक अलग तरीके से दिखाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, स्कोर 3 विकेट के नुकसान पर 100 रन हो तो ज्यादातर क्रिकेट खेलने वाले देशों में इसे 100-3 लिखा जाता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में इसे 3-100 दिखाया जाएगा, यानि कि पहले रन नहीं, विकेट लिखेंगे। वे ऐसा क्यों करते हैं या वे स्कोर को उल्टे क्रम में लिखने की परंपरा पर क्यों चल रहे हैं? ऐसे सवालों का जवाब बड़ा रोचक है।

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विश्वास कीजिए स्कोर को, आम तरीके से उल्टे लिखने की इस ऑस्ट्रेलियाई परंपरा के लिए सिर्फ एक व्यक्ति जिम्मेदार है। ये हैं पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर नेड ग्रेगरी। एक बेहतरीन खिलाड़ी जो मार्च 1877 में मेलबर्न में पहला टेस्ट खेलने के बाद, 'वन टेस्ट वंडर' ही बने रह गए। उस टेस्ट की दो इनिंग में 11 रन बनाए थे।

ग्रेगरी शायद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में सबसे मशहूर परिवार से है। इसकी शुरुआत डेविड विलियम ग्रेगरी से हुई। उनके दो भाई एडवर्ड जेम्स (नेड) और चार्ल्स स्मिथ उनके साथ जुड़ गए। डेविड उस ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान थे जिसने मार्च 1877 में खेले पहले टेस्ट मैच में जे लिलीवाइट की इंग्लिश टीम को हराया था। नेड भी उस टीम में थे। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग की। नेड बिना कोई रन बनाए आउट हुए और टेस्ट क्रिकेट में 0 पर आउट होने वाले पहले बल्लेबाज का रिकॉर्ड उनके नाम है।

उनके दो और भाई न्यू साउथ वेल्स के लिए खेले। नेड के दो बेटे भी न्यू साउथ वेल्स के लिए खेले (इनमें से एक टेस्ट क्रिकेटर सिड ग्रेगरी थे) और उनके भतीजे जैक ग्रेगरी भी ऑस्ट्रेलिया के लिए खेले।

नेड बाद में मिलिट्री एंड सिविल ग्राउंड के केयरटेकर बन गए। वहां से एसोसिएशन ग्राउंड और फिर सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) के पहले क्यूरेटर बने। 1896 में SCG में, उन्होंने हिल पर लगा पहला हाथ से ऑपरेट किया जाने वाला (मैकेनिकली एडजस्टेबल Mechanically Adjustable) स्कोरबोर्ड डिज़ाइन किया और बनवाया।

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जब वे इस नए स्कोरबोर्ड पर काम कर रहे थे तो उन्हें स्कोर लिखने का इंग्लिश तरीका पसंद नहीं आया। उन्हें ये भी लगा कि इंग्लैंड में जैसे स्कोरबोर्ड हैं, वे दर्शकों को ग्राउंड के अंदर की पूरी जानकारी नहीं देते। इन सोच के साथ उन्होंने, मैच के बारे में कई तरह की जानकारी देने वाले, एक बड़े स्कोरबोर्ड को डिजाइन किया। इस चक्कर में ये इतना बड़ा बन गया कि उसे अपडेट करना, एक ऑपरेटर के बस की बात नहीं थी।

इस नए डिजाइन किए स्कोरबोर्ड में उन्होंने स्कोर दिखाने का तरीका बदल दिया यानि कि कुल स्कोर दिखाते हुए विकेट और रन लिखने का क्रम उलट दिया। ये इंग्लैंड में स्कोर लिखने के तरीके के बिल्कुल उलट था। भारत और अन्य दूसरे देशों ने बहरहाल इंग्लैंड वाले तरीके को ही अपनाया।

चूंकि जो नया स्कोरबोर्ड, उन्होंने बनाया, वह मैच की जरूरी जानकारी दे रहा था, इसलिए ग्रेगरी ने स्कोर लिखने के तरीके में जो बदलाव किया, उसे भी सभी ने मान लिया। जब सिडनी में स्कोर दिखाने का ये तरीका मान लिया तो धीरे-धीरे ऑस्ट्रेलिया के और दूसरे ग्राउंड ने भी अपने स्कोरबोर्ड बदल दिए। ब्रॉडकास्टर और कमेंटेटर भी उनके साथ जुड़ गए और वे भी इसी तरह से स्कोर बोलने लगे। इस तरह से ये मैच का स्कोर दिखाने का ऑस्ट्रेलियाई तरीका मान लिया गया। तब से यही फॉर्मेट चला आ रहा है।

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SCG में ग्रेगरी ने जो स्कोरबोर्ड बनाया था वह 1896 से 1905 तक इस्तेमाल होता रहा। एक और स्कोरबोर्ड 1905 से 1924 तक इस्तेमाल हुआ। SCG के इतिहास में तीसरा स्कोरबोर्ड 1923 में बनाया था जो 1983 तक इस्तेमाल होता रहा। SCG में स्कोरबोर्ड के इन सभी बदलाव के दौरान, लेआउट वही रहा यानि स्कोर में पहले विकेट, फिर रन लिखना। एक व्यक्ति के आइडिया ने स्कोर दिखाने का तरीका बदल दिया।

SCG में मशहूर स्कोरबोर्ड की और बात करें तो आपको बता दें कि जो स्कोरबोर्ड 1983 तक इस्तेमाल हुआ, वह वहां, हाथ से ऑपरेट हुआ आखिरी स्कोरबोर्ड था। यह स्कोरबोर्ड, रॉबर्टसन और मार्क्स ने डिज़ाइन किया था। 1923 में बना ये स्कोरबोर्ड ग्राउंड के पूर्वी सिरे पर बनी हिल की चोटी पर 60 साल तक लगा रहा।

इसके बाद वहां इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड लग गया। इस बीच पुराने स्कोरबोर्ड को एक ऐतिहासिक और हेरिटेज आइटम का दर्जा मिल गया था। इसीलिए इसे तोड़ा नहीं और पूरा का पूरा हटाकर डग वाल्टर्स स्टैंड के पीछे रख दिया। तब आगे से देखें तो इसका सिर्फ़ टॉप हिस्सा दिखता था। वहां ये 2006 तक रखा रहा।

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जब भी यहां कोई बड़ा मैच होता तो ये पुराना स्कोरबोर्ड चर्चा में आ जाता। अपने समय के मशहूर क्रिकेटर और ब्रॉडकास्टर बिल ओ'रेली ने इसके हटने पर दुख जाहिर करते हुए एक बार कहा था,' कितने दुख की बात है कि इतना ऐतिहासिक स्कोरबोर्ड जिस पर ब्रैडमैन से लेकर बेनो और बॉर्डर तक, खेल के कई महान खिलाड़ियों के नाम लिखे थे, अब यूं डग वाल्टर्स स्टैंड के पीछे लावारिस पड़ा धूल-मिट्टी खा रहा है। इसे न सिर्फ नज़रअंदाज कर दिया है, भुला भी दिया है।' SCG हेरिटेज ऑफिस ने भी माना कि रॉबर्टसन और मार्क्स का स्कोरबोर्ड ग्राउंड के इतिहास में 'बड़ा ख़ास' है। जब यह इस्तेमाल में नहीं था, तब भी इसने अपनी भूमिका निभाई और 1983 से नए क्रिकेट किस्सों का चुपचाप गवाह बना रहा।

आखिरकार 2006 में SCG ट्रस्ट की देखरेख में इसे वहां से हटाने का फ़ैसला हुआ और इसे सरी हिल्स के एक वेयरहाउस में ले गए। वहां से इसे वेस्टर्न सिडनी ले गए। इस बीच कई बार ये भी चर्चा हुई कि इसे किसी टूरिस्ट स्पॉट की तरह से स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में ही कहीं लगा दो। ये स्कोरबोर्ड इस ग्राउंड की एक बड़ी लोकप्रिय पहचान और खासियत में से एक था।

चरनपाल सिंह सोबती

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Charanpal Singh Sobti
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