Who is V Ramesh Kumar: पिछले दिनों भारत ने बांग्लादेश को चेन्नई टेस्ट में 4 दिन से भी कम के खेल में हरा दिया- नोट कीजिए किसी ने तपती गर्मी में लाल मिट्टी से बनाई एमए चिदंबरम स्टेडियम की पिच की आलोचना नहीं की। पिच से बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों को अपना हुनर दिखाने का पूरा मौका मिला और इसीलिए 100 बने तो 5 विकेट के रिकॉर्ड भी। इसके लिए ग्राउंड स्टाफ और ख़ास तौर पर क्यूरेटर वी रमेश कुमार की सभी ने तारीफ की। कौन हैं ये वी रमेश कुमार? इस सवाल का जवाब किसी को भी हैरान कर देगा। 

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अक्सर कहते हैं कि जो खुद टॉप क्लास क्रिकेट खेले, वे पिच को बेहतर समझते हैं और बेहतर पिच बना सकते हैं। क्यूरेटर की इस परिभाषा में, वी रमेश कुमार कतई फिट नहीं होते क्योंकि वे न तो टेस्ट खेले और न फर्स्ट क्लास क्रिकेट। इसके उलट, उनका परिचय तो हैरान कर देगा। चेपॉक में उन्हें एक्सीडेंटल क्यूरेटर (Accidental Curator) कहते हैं और उनकी स्टोरी किसी के लिए भी क्यूरेटर बनने की प्रेरणा साबित हो सकती है। 

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2021 का साल शुरू ही हुआ था कि वी रमेश कुमार को तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन (TNCA) से कॉल आया और इंग्लैंड सीरीज़ के पहले दो टेस्ट (कोविड के प्रकोप के दिनों में खेली सीरीज के लगातार दो टेस्ट चेन्नई में थे) के लिए क्यूरेटर बनने का ऑफर दिया। वे खुद इस ऑफर पर हैरान थे- जिस व्यक्ति ने कभी किसी फर्स्ट क्लास मैच के लिए भी पिच नहीं बनाई, उसे एक बड़ी टीम के विरुद्ध, सीधे दो टेस्ट के लिए पिच बनाने को कह रहे थे। पहला टेस्ट था 5 फरवरी से यानि कि एक महीना भी नहीं बचा था। मार्की सीरीज़ थी ये और पॉइंट गिने जाने थे वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के लिए। वे तो हैरान थे ही- बीसीसीआई को भी मेजबान एसोसिएशन का ये फैसला समझ नहीं आया। 

अब आते हैं वी रमेश कुमार पर- वे उन दिनों क्या कर रहे थे? वे तो बिजनेसमैन हैं और तमिलनाडु के गारमेंट बनाने के लिए मशहूर शहर तिरुपुर में अपने दो एप्रिल (Apparel) यूनिट चला रहे थे- कॉसिमो इंटरनेशनल (Cosimo International- यहां बने गारमेंट यूरोप एक्सपोर्ट होते हैं)  और ऑलविन कलर्स (Allwin Colours- यहां रंगाई होती है)। उनकी पत्नी मलारविजी गिरि (Malarvizhi Giri), चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, और उनके साथ दोनों यूनिट का काम देखती हैं। बड़ा काम है और 700 से ज्यादा का स्टाफ है। वी रमेश कुमार की पढ़ाई की बात करें तो मनोविज्ञान (Psychology) में एमएस और इंटरनेशनल बिजनेस में एमबीए हैं। कॉलेज के दिनों में एथलीट भी थे- 110 मीटर हर्डल्स में तमिलनाडु रिले टीम में थे और 1996 नेशनल चैंपियनशिप में दो मैडल भी जीते। इस तरह खेलों में उनकी रुचि थी। 

इसीलिए पैसा आया तो रमेश ने उन युवा की मदद करना शुरू किया जो खिलाड़ी बनना चाहते थे पर उनके पास साधन नहीं थे। वी रमेश कुमार ने इन युवा के सपने को पूरा करने में रूचि ली और ट्रेनी की रूचि देखकर, इसमें एक बड़ा हिस्सा बनाया क्रिकेट को। नतीजा- तिरुपुर स्कूल ऑफ क्रिकेट (Tirupur School of Cricket) नाम से एक एकेडमी शुरू कर दी। इसके लिए सब इंतजाम, ख़ास तौर पर प्रेक्टिस पिच मेनेजमेंट के लिए चेन्नई से ग्राउंड स्टाफ लाना बड़ा मुश्किल साबित हो रहा था। ऐसे में ख्याल आया कि क्यों न खुद ही इसे सीख लें? तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन से मदद मांगी तो उनका सुझाव था कि पिच बनाने का बीसीसीआई का कोर्स कर लो। वे इसे प्रोफेशनल तरीके से सीखना चाहते थे ताकि एकेडमी में 80 ट्रेनी के लिए बेहतर इंतजाम कर सकें। चले गए कोर्स करने और जब जुलाई 2018 में कोर्स पास किया तो फटाफट, अपनी एकेडमी से बाहर, बीसीसीआई के अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 टूर्नामेंट के लिए कोयंबटूर, तिरुपुर और सलेम में पिच बनाने का ऑफर आ गया। 

उनकी बनाई पिच और आउटफील्ड की तारीफ़ हुई तो उनकी इसमें रूचि और बढ़ी। तब आईपीएल के लिए अलग-अलग शहरों में पिच बना रहे सीनियर क्यूरेटर के काम को नजदीक से देखने लगे। तामिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन ने तो उन्हें आईपीएल 2019 के लिए ही कह दिया था कि चेपक में काम कर रही टीम से जुड़ जाएं पर वे लगभग 3 महीने के लिए बिजनेस नहीं छोड़ना चाहते थे। इससे इतना तो तय हो जाता है कि एसोसिएशन को उनका काम पसंद था- तभी तो ऐसा ख़ास ऑफर दे रहे थे। इसीलिए जब एसोसिएशन को कोविड के मुश्किल समय में जरूरत पड़ी तो फिर से उन्हें ही याद किया और वे तब से चेन्नई में इंटरनेशनल मैचों के लिए पिच क्यूरेटर हैं। 

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यहां, इस स्टोरी का एक और पहलू भी है। ये बताना जरूरी है कि जब 2021 में बीसीसीआई को ये पता चला कि तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन पिच और आउटफील्ड के लिए किसी ऐसे नए व्यक्ति को बुला रही है जिसने पहले कभी रणजी मैच के लिए भी पिच नहीं बनाई तो उन्हें ये फैसला हजम नहीं हुआ। भारत में कोविड के बाद, इंटरनेशनल क्रिकेट की वापसी हो रही थी और उस पर एक ही स्टेडियम में दो टेस्ट- इसलिए बीसीसीआई कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता था। बीसीसीआई ने एसोसिएशन को तो न रोका पर अपनी पिच कमेटी के एक सीनियर मेंबर तपोश चटर्जी (Taposh Chatterjee) को चेन्नई भेज दिया ताकि तैयारियों को देखें और रमेश कुमार और उनकी टीम के लिए गाइड बनें। तपोश चटर्जी का नाम उस पहले टेस्ट में ही एक बड़े विवाद में फंस गया और ये मामला ऐसा फंसा कि बीसीसीआई ने उन्हें वहां से, पहले टेस्ट के बाद ही हटा लिया- क्यों, ये एक अलग स्टोरी है। तब से वी रमेश कुमार स्टेडियम में अकेले क्यूरेटर हैं और एक टेस्ट सेंटर के कामयाब क्यूरेटर का लेबल उनके नाम के साथ जुड़ गया है।

- चरनपाल सिंह सोबती
 

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Charanpal Singh Sobti
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