गुजरात को पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के साथ गुजरात विश्व खेल मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।
स्वर्णिम गुजरात स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. अर्जुनसिंह राणा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि इस सफलता की नींव वर्षों पहले रखी जा चुकी थी। उनके अनुसार, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात का नेतृत्व कर रहे थे, तभी उन्होंने खेलों के व्यापक विकास का लक्ष्य निर्धारित कर दिया था।
डॉ. राणा ने बताया कि प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से 2010 में ‘खेलो गुजरात’ की शुरुआत की गई। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर ‘खेलो इंडिया’ के रूप में खेलों को नई दिशा मिली। वर्ष 2022 में गुजरात को बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी का अवसर मिला, जिससे राज्य की क्षमता और विश्वसनीयता को नया आयाम मिला।
उन्होंने कहा कि इन सभी उपलब्धियों ने संकेत दे दिया था कि एक दिन कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी का सपना अवश्य पूरा होगा। अंततः वह सपना आज वास्तविकता बन चुका है। यह उपलब्धि न केवल गुजरात, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। हम लोगों में कितनी खुशी है, इसको बता नहीं सकते हैं। हम इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हैं।
डॉ. राणा ने बताया कि प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से 2010 में ‘खेलो गुजरात’ की शुरुआत की गई। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर ‘खेलो इंडिया’ के रूप में खेलों को नई दिशा मिली। वर्ष 2022 में गुजरात को बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी का अवसर मिला, जिससे राज्य की क्षमता और विश्वसनीयता को नया आयाम मिला।
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उन्होंने कहा कि आज के समय में पूरे गुजरात के गावों में खिलाड़ियों को खेलने के लिए लगातार सुविधा दी जा रही है, जिससे प्रदेश में खेल का आयोजन होता रहता है। इसके साथ ही खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं भी दी जा रही हैं।