सोनलबेन पटेल भारत की अंतरराष्ट्रीय पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से कई उपलब्धियां हासिल कीं। गुजरात की रहने वाली सोनलबेन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को पदक जिताए। टोक्यो पैरालंपिक 2020 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सोनलबेन ने अपनी उत्कृष्ट खेल प्रतिभा और संघर्षशीलता से पैरा टेबल टेनिस में देश का मान बढ़ाते हुए युवाओं को प्रेरित किया है।
15 सितंबर 1987 को गुजरात के विरमगाम में जन्मीं सोनलबेन पटेल जब महज 6 महीने की थीं, तब परिवार को उनके पोलियो से पीड़ित होने का पता चला। भले ही सोनलबेन ने कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उनके अंदर जीवन में कुछ कर दिखाने का जज्बा बिल्कुल भी कम नहीं हुआ।
सोनलबेन पटेल बचपन में एक टीचर बनना चाहती थीं, लेकिन अपने इस सपने को साकार नहीं कर सकीं। उन्होंने ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन (बीपीए) ज्वाइन किया और आईटीआई से कोर्स पूरा किया।
सोनलबेन पटेल को टेबल टेनिस में बेहद रुचि थी। शुरुआत में तो सोनलबेन सिर्फ शौकिया तौर पर टेबल टेनिस खेलना चाहती थीं, लेकिन पिता ने उन्हें इस खेल को बतौर प्रोफेशनल अपनाने के लिए प्रेरित किया। पिता ही उनके पहले कोच थे।
सोनलबेन ने इस खेल में दक्षता हासिल करने के लिए ललन दोशी से ट्रेनिंग लेनी शुरू की, जिसके बाद राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा लेते हुए अपनी धाक जमाई।
सोनलबेन पटेल का विवाह साथी खिलाड़ी रमेश चौधरी से हुआ है, जो खुद एक पैरा-एथलीट हैं। पति ने सोनलबेन को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सोनलबेन ने साल 2018 में जकार्ता में खेले गए एशियन पैरा गेम्स के डबल्स (डब्ल्यूडी 3-5) में ब्रॉन्ज जीता। साल 2021 में उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में पदार्पण किया।
उन्होंने साल 2022 के मिस्र पैरा ओपन में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक और एक कांस्य पदक जीते। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में कांस्य पदक जीता।
सोनलबेन ने साल 2018 में जकार्ता में खेले गए एशियन पैरा गेम्स के डबल्स (डब्ल्यूडी 3-5) में ब्रॉन्ज जीता। साल 2021 में उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में पदार्पण किया।
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2024 पेरिस पैरालंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली सोनलबेन पटेल ने महिला युगल डब्ल्यूडी 10 वर्ग में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया। सोनलबेन पटेल ने बताया कि मनुष्य अपनी इच्छाशक्ति के बूते असंभव को भी संभव बना सकता है। उन्होंने शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करते हुए इसको साबित करके दिखाया।