शूटिंग के दिग्गज खिलाड़ी और कोच रहे जसपाल राणा के असामयिक निधन से भारतीय खेल जगत सदमे में है। 49 साल के राणा का निधन भारतीय खेलों के लिए बड़े नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। उनका निधन शुक्रवार की सुबह दिल्ली में हुआ था। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर उनके देहरादून स्थित घर पर ले जाया गया, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
जसपाल राणा का अंतिम संस्कार शनिवार को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाना है। इसके लिए उनके परिजन निजी विमान ने उनका पार्थिव शरीर वाराणसी लेकर आ रहे हैं। वाराणसी एयरपोर्ट पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी और उसके बाद मणिकर्णिका के लिए अंतिम यात्रा निकलेगी।
वाराणसी एयरपोर्ट पर जसपाल राणा के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार उनके साथी और सीनियर रहे कई पूर्व खिलाड़ी कर रहे हैं। आईएएनएस से बातचीत में पूर्व खिलाड़ियों ने राणा के निधन को भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति बताया।
वीरेंद्र उपाध्याय ने आईएएनएस से कहा, "जसपाल राणा का निधन खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी और अपूरणीय क्षति है। इतनी कम उम्र में उनका जाना बहुत कष्टदायी है।"
अंतरराष्ट्रीय कोच रोहित जैन ने कहा, "जसपाला राणा भारत की पिस्टल शूटिंग को सर्वोच्च शिखर पर ले जाने वाले पहले खिलाड़ी थे। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड जब एक था, उस समय उन्होंने पहला पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। उनके जैसा कोई भी कोच मौजूदा समय में नहीं है।"
वीरेंद्र उपाध्याय ने आईएएनएस से कहा, "जसपाल राणा का निधन खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी और अपूरणीय क्षति है। इतनी कम उम्र में उनका जाना बहुत कष्टदायी है।"
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पूर्व राइफल शूटर पंकज श्रीवास्तव ने कहा, "जसपाल राणा का जाना एक बहुत बड़ी क्षति है। निशानेबाजी को बड़ा नुकसान हुआ है। जसपाल राणा ने ही सबसे पहले अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि हम विदेशों में भी पदक जीत सकते हैं। उन्होंने विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था, जो लंबे समय तक अटूट रहा। सबसे कम उम्र में उन्होंने अर्जुन पुरस्कार जीता। इसके बाद पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार भी उन्हें मिला। इस समय साई में वह कोच भी थे। उनकी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार काशी में हो। हम सभी उनके आने का इंतजार कर रहे हैं।"