14 वर्षीय अपार सक्सेना ने यूरोप भर में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर प्रतिष्ठित इंटरनेशनल मास्टर (आईएम) का खिताब हासिल कर लिया है, जिन्होंने सिर्फ 5 हफ्तों में इसके लिए जरूरी तीनों मानदंड पूरे कर लिए।
साल 2012 में जन्मे बेंगलुरु के इस युवा खिलाड़ी ने 30 मार्च को बोस्निया में हुए आईएम रेनोम 2 टूर्नामेंट में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इस टूर्नामेंट में उन्होंने 9 में से 7 अंक हासिल करते हुए खिताब जीता और अपना पहला आईएम मानदंड पूरा किया।
इसके तुरंत बाद, 6 अप्रैल को स्पेन में हुए सैन विसेंट ओपन में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। इस मुकाबले में 54 देशों के 500 से भी ज्यादा खिलाड़ियों न हिस्सा लिया, जिसमें अपार ने एक बार फिर 9 में से 7 अंक हासिल किए। सक्सेना ने टूर्नामेंट के दो राउंड शेष रहते ही अपना दूसरा मानदंड पूरा कर लिया, जिससे उनकी निरंतरता और संयम साफ झलकती है।
अप्रैल के अंत में हुए मेनोर्का ओपन में भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा। यहां उन्होंने 2404 की परफॉर्मेंस रेटिंग हासिल की और काफी रेटिंग अंक भी बटोरे। हालांकि, मुकाबले में बने रहने के बावजूद वे लगातार तीसरा मानदंड हासिल करने से बस जरा सा चूक गए।
इसके तुरंत बाद, 6 अप्रैल को स्पेन में हुए सैन विसेंट ओपन में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। इस मुकाबले में 54 देशों के 500 से भी ज्यादा खिलाड़ियों न हिस्सा लिया, जिसमें अपार ने एक बार फिर 9 में से 7 अंक हासिल किए। सक्सेना ने टूर्नामेंट के दो राउंड शेष रहते ही अपना दूसरा मानदंड पूरा कर लिया, जिससे उनकी निरंतरता और संयम साफ झलकती है।
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अपार के पिता प्रशांत सक्सेना ने उनकी ट्रेनिंग, तैयारी और टूर्नामेंट प्लानिंग में अहम भूमिका निभाई है, जबकि मां रुचि सक्सेना पूरे सफर में लगातार उनका हौसला बढ़ाती रही हैं। अपार के विकास में उनके स्कूल सिलिकॉन सिटी एकेडमी ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन का बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता प्रशांत ने 'चेसबेस इंडिया' को बताया कि प्रिंसिपल सुमालिनी और स्कूल को-ऑर्डिनेटर शेनॉय ने अपार को लगातार प्रोत्साहित किया। पिछले 2 वर्षों में अपार का कोई निजी कोच नहीं रहा। इससे पहले उन्हें जयराम रमना ट्रेनिंग दे रहे थे। इसके अलावा, अपार ने किलर चेस ट्रेनिंग और यूरी वोव्क के कोर्सेज से भी मदद ली।