जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेली जा रही विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में योगेश कथुनिया ने रजत पदक जीता। कथुनिया ने एफ56 डिस्कस थ्रो में 42.49 मीटर की दूरी तक आयरन डिस्क थ्रो करके रजत पदक जीता। भारत का मौजूदा चैंपियनशिप में यह छठा पदक था।
योगेश कथुनिया की यह सफलता उनके निरंतर मेहनत का परिणाम है। लेकिन, इस सफलता के बाद उनमें एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूर्व में किसी भी प्रतियोगिता से पहले अपने प्रदर्शन की संभावना के जवाब में कथुनिया 'गोल्ड' कहा करते थे। अब ऐसा नहीं है।
मंगलवार को रजत पदक जीतने के बाद कथुनिया ने कहा, "मैंने यह कहना बंद कर दिया है कि मैं स्वर्ण पदक जीतूंगा। मुझे विश्वास है कि इस बदलाव से मुझे अंततः लाभ होगा।"
28 वर्षीय योगेश अपने घरेलू मैदान पर अपने परिवार और समर्थकों के सामने जीत हासिल करके खुश थे। उन्होंने कहा, "मैंने यहां जीत हासिल की है, इसलिए मेरा पदक बहुत खास है। अपने परिवार के सामने प्रदर्शन करके बहुत खुश हूं। उन्होंने हमेशा मेरा बहुत साथ दिया है। जैसा कि मैंने पहले कहा कि मैंने यह कहना बंद कर दिया है, स्वर्ण पदक जीतूंगा। इसलिए मुझ पर कोई दबाव नहीं था। मैंने अपने प्रदर्शन का भरपूर आनंद लिया।"
मंगलवार को रजत पदक जीतने के बाद कथुनिया ने कहा, "मैंने यह कहना बंद कर दिया है कि मैं स्वर्ण पदक जीतूंगा। मुझे विश्वास है कि इस बदलाव से मुझे अंततः लाभ होगा।"
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उन्होंने कहा, भारत में पैरा खेलों और पैरा-एथलीटों ने काफी तरक्की की है। कुछ समय पहले तक, वित्तीय सहायता और भविष्य की संभावनाओं के मामले में ज्यादा कुछ नहीं था। अब सब कुछ बदल गया है। खिलाड़ियों की मदद के लिए प्रायोजक आसानी से मिल जाते हैं। भविष्य वाकई शानदार है। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि अब सब कुछ बदल रहा है।"