प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से अहमदाबाद में 4 से 8 जून तक आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप-2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग खेल के रूप में शामिल होकर रोजगार का एक बड़ा क्षेत्र बन सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "हर जीवन परंपरा समय के साथ नए चरण में प्रवेश करती है। योगासन की यह विश्व चैंपियनशिप इसी चरण का शुभारंभ है। इस चैंपियनशिप के माध्यम से योगासन को एक प्रतियोगी खेल के रूप में नई पहचान मिलेगी। मुझे विश्वास है कि भविष्य में योगासन भी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में अपनी जगह बनाएगा। ओलंपिक या कोई भी बहुखेल प्रतियोगिता हो। हम जितनी मेहनत करेंगे, उतना सुखद परिणाम आ सकता है। अहमदाबाद में होने जा रही पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप की भूमिका अहम होगी।"
उन्होंने कहा, "खेल के रूप में योगासन का एक और पक्ष है। हम जानते हैं कि हर बड़ा खेल अपने साथ एक पूरा इकोसिस्टम लेकर आता है। रोजगार के नए अवसर पैदा करता है, इसलिए योगासन का खेल के रूप में विस्तार होगा, वैसे-वैसे इससे जुड़ी संभावनाएं बढ़ेंगी। खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, खेल वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और इवेंट प्रबंधकों के लिए भी यह नए अवसर लेकर आएगा।"
पीएम ने कहा, "एक दशक पहले भारत संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव लेकर गया था। हम प्राचीन भारतीय परंपरा को पूरी मानवता के स्वास्थ्य और सामूहिक कल्याण से जोड़ना चाहते थे। यूएन में 190 देशों ने भारत के इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। यह देखकर खुशी होती है कि करोड़ों लोग योग को अब अपने जीवन का हिस्सा बना चुके हैं। ध्यान, प्राणायाम उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन रहा है।"
उन्होंने कहा, "खेल के रूप में योगासन का एक और पक्ष है। हम जानते हैं कि हर बड़ा खेल अपने साथ एक पूरा इकोसिस्टम लेकर आता है। रोजगार के नए अवसर पैदा करता है, इसलिए योगासन का खेल के रूप में विस्तार होगा, वैसे-वैसे इससे जुड़ी संभावनाएं बढ़ेंगी। खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, खेल वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और इवेंट प्रबंधकों के लिए भी यह नए अवसर लेकर आएगा।"
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प्रधानमंत्री ने प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप में हिस्सा लेने आए 60 से अधिक देशों के प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं और योग के संदेश को अपने-अपने देश में फैलाने और वहां योग दूत बनने का सुझाव भी दिया।