किसी भी कहानी का आगाज अगर बेहतरीन रहा हो, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसका अंजाम भी ठीक वैसा ही हो। भारतीय क्रिकेटर विजय भारद्वाज की कहानी ऐसी ही है। विजय भारद्वाज के भारतीय टीम के साथ सफर का आगाज धमाकेदार अंदाज में हुआ था, और उन्हें भविष्य का एक बड़ा सितारा माना गया, लेकिन कुछ ही मैचों में उनका करिश्मा समाप्त हो गया और वह टीम से बाहर हो गए। फिलहाल, वह क्रिकेट कोच और कमेंटेटर के तौर पर सक्रिय हैं।
विजय भारद्वाज का जन्म 15 अगस्त 1975 को बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ था। 1994-95 में राज्य की टीम के लिए डेब्यू करने वाले विजय ने घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन के दम पर 1999 में भारतीय टीम में जगह बनाई। उनकी पहली सीरीज बेहद यादगार रही। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एलजी कप (1999-2000) में अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी के दम पर भारद्वाज को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। सीरीज में 10 विकेट लेने के अलावा निचले क्रम में उन्होंने 89 रन भी बनाए थे। उस सीरीज के बाद उन्हें भारतीय टीम के लिए बेहद अहम सदस्य के तौर पर देखा जाने लगा, लेकिन पहले टेस्ट और फिर वनडे में प्रदर्शन में आई गिरावट की वजह से वह टीम से बाहर हो गए और फिर कभी वापसी नहीं कर सके।
विजय भारद्वाज ने सितंबर 1999 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया था। वहीं, नीली जर्सी में उन्होंने अपना आखिरी मुकाबला 2002 में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेला था। इस ऑलराउंडर ने 3 टेस्ट मैचों की 3 पारियों में 28 रन बनाए और 1 विकेट लिया। वहीं, 10 वनडे मैचों की 9 पारियों में 136 रन बनाने के अलावा 16 विकेट लिए।