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कौन हैं नीम करोली बाबा? वो गुरु जिसने विराट कोहली-अनुष्का शर्मा, जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स को किया प्रेरित

1960 और 70 के दशक में भारत की यात्रा करने वाले कई विदेशी फेमस लोगे नीम करोली बाबा से प्रभावित हुए। विराट कोहली पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ बाबा की समाधि के दर्शन के लिए पहुंचे थे।

Prabhat  Sharma
By Prabhat Sharma January 10, 2023 • 11:57 AM

Who Is Neem Karoli Baba: विराट कोहली पत्नी अनुष्का शर्मा और बेटी वामिका के साथ नीम करोली बाबा की समाधि के 'दर्शन' के लिए कैंची धाम पहुंचे थे। इसके अलावा विराट वृंदावन में भी उनके आश्रम गए।  कथित तौर पर विराट-अनुष्का वहां लगभग एक घंटे तक रहे और कुटिया में ध्यान किया। नीम करोली बाबा को लेकर फैंस के मन में तमाम तरह के सवाल हैं। बताया जाता है कि साल 1964 में में नीम करोली बाबा के सानिध्य में कैंची धाम की स्थापना की गई थी जो आगे चलकर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना।

20 वीं सदी के महानतम संतों में शामिल नीम करोली बाबा महाराज जी के नाम से अपने अनुयायियों के बीच पहचाने जाते हैं। महाराज जी हिंदू देवता हनुमान के भक्त थे वहीं कई भक्त उन्हें हनुमान जी का अवतार भी मानते हैं। भक्ति योग पर जोर देते हुए उन्होंने हमेशा दूसरों की सेवा करने को लेकर लोगों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने इसे भगवान की बिना शर्त भक्ति का उच्चतम रूप माना। 

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उत्तरप्रदेश के अकबरपुर के एक गांव में जन्में नीम करोली बाबा का असल नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। कहा जाता है कि महज 17 साल की उम्र में उन्हें ज्ञान प्राप्त हो गया था। विराट कोहली ही नहीं स्टीव जॉब्स से लेकर मार्क जुकरबर्ग तक कुछ ऐसे बड़े नाम हैं जो बाबा के भक्तों की लिस्ट में शामिल हैं। बताया जाता है कि स्टीव जॉब्स को एप्पल के लोगो का आइडिया नीम करोली बाबा के दर्शन के वक्त ही आया था।

साल 2015 में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने कैंची धाम के आश्रम का दौरा किया था। उस वक्त फेसबुक कठिन दौर से गुजर रहा था। मार्क जुकरबर्ग हाथ में सिर्फ एक किताब लेकर वहां पहुंचे थे। उन्हें यहां एक दिन रुकना था लेकिन उन्होंने वहां दो दिन बिताए। स्टीव जॉब्स ने उन्हें आश्रम जाने का सुझाव दिया था।

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एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स अपने दोस्त डैन कोट्टके के साथ नीम करोली बाबा से मिलने आश्रम पहुंचे थे। हालांकि, वह उनसे नहीं मिल सके क्योंकि उनके आने से पहले ही उनका निधन हो गया था। डायबिटिक कोमा में चले जाने के बाद 11 सितंबर, 1973 को वृंदावन के एक अस्पताल में बाबा नीम करोली का निधन हो गया था।