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Asian Games में भारत का Cricket सफर: - एशियन गेम्स में सालों की कोशिश के बाद क्रिकेट को शामिल करा पाए थे और ये फैक्ट इस महाद्वीप में क्रिकेट के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक मौका था। ये स्टोरी मई 2009 में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के एशियन गेम्स में क्रिकेट को शामिल करने की मंज़ूरी के साथ शुरू हुई। 2010 में ग्वांगझू में अगले एशियन गेम्स में ही क्रिकेट को शामिल कर लिया और पुरुष और महिला दोनों के लिए टी20 फॉर्मेट को चुना।
ओसीए ने तब ही खास तौर पर कह दिया था कि भारत और पाकिस्तान इसमें हिस्सा जरूर लें चूंकि एशिया के इन दो बड़े क्रिकेट देश के शामिल होने से ही, मुकाबले को न सिर्फ विश्वसनीयता मिलेगी, उन देशों में क्रिकेट को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी जहां ये खेल अभी ज्यादा लोकप्रिय नहीं। तब भी भारत ने क्रिकेट टीम को वहां खेलने न भेजा।
ग्वांगझू 2010 में क्रिकेट टीम न भेजने के पीछे बीसीसीआई का स्पष्टीकरण था कि एशियन गेम्स में क्रिकेट का प्रोग्राम बनने से पहले ही भारत अपनी पुरुष और महिला टीम का आगे का प्रोग्राम बना चुका था, इसलिए दोनों टीम उपलब्ध नहीं थीं। नवंबर 2010 में भारत की न्यूजीलैंड के साथ टेस्ट और वनडे सीरीज थी और इस नाते वे अपने टॉप क्रिकेटर एशियन गेम्स के लिए नहीं भेज सकते थे।
ऐसे में रास्ता निकालने की कोशिश हुई और कहा कि भारत अपनी नंबर 2 टीम भेजे लेकिन तब इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने इसका विरोध कर दिया और आरोप लगाया कि नंबर 2 टीम भेज, एशियन गेम्स का महत्व कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
नतीजा ये रहा कि भारत ने वहां क्रिकेट मेडल के मैचों में हिस्सा न लिया और इस पर बड़ी निराशा थी। एशियन गेम्स में तो क्रिकेट को शामिल ही इस उम्मीद से किया था कि एशिया के बड़े क्रिकेट देश इस इवेंट को सपोर्ट करेंगे। ग्वांगझू में निराशा और भी ज्यादा थी, क्योंकि वहां गेम्स के लिए खास तौर पर 6532 सीट वाला एक इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम बनाया था। इरादा था कि चीनी जनता को क्रिकेट का परिचय मिलेगा। भारतीय क्रिकेटरों के न आने से इवेंट में न सिर्फ कई स्टार न खेले, इवेंट का ग्लैमर भी कम हो गया।
इसके साथ ही ये बहस भी शुरू हो गई कि क्या वास्तव में बीसीसीआई, मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स में क्रिकेट को शामिल करने को सपोर्ट करता है? बीसीसीआई ने टीम न भेज इसे सही साबित करने का संकेत दिया था। ओसीए की एशियन गेम्स की बदौलत क्रिकेट को कुछ बड़े देशों से बाहर, इसे फैलाने की कोशिश अधूरी रह गई।
मजे की बात ये कि 2014 में भारत ने इंचियोन एशियन गेम्स में भी यही कहानी दोहरा दी। इस बार कह दिया कि चैंपियंस लीग टी20 भारत में 13 सितंबर से 4 अक्टूबर तक खेलनी है और इसका 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले एशियन गेम्स से सीधे टकराव है। चैंपियंस लीग कोई इंटरनेशनल टूर्नामेंट नहीं था पर उसमें 4 आईपीएल टीम खेल रही थीं जिसका मतलब था कि भारत के कई टॉप क्रिकेटर अपनी-अपनी फ्रेंचाइजी के लिए खेल रहे थे। फिर से बीसीसीआई ने कह दिया कि क्रिकेट कैलेंडर बहुत पहले न सिर्फ बन जाता है, इतना व्यस्त है कि उसमें किसी और टूर्नामेंट के लिए कोई जगह नहीं थी।
इस बार तो बीसीसीआई के ऐसे फैसले पर और भी ज्यादा विवाद हुआ। इसकी वजह ये थी कि भारत ने अपनी महिला टीम भी नहीं भेजी हालांकि उस टीम का कोई ऐसा इंटरनेशनल प्रोग्राम नहीं था जिससे तारीखों का टकराव होता। इस तरह भारत फिर से अकेला ऐसा एशियाई टेस्ट देश था जिसने पुरुष या महिला, किसी भी इवेंट में हिस्सा नहीं लिया।
इस बात पर तो ओसीए के चीफ शेख अहमद अल-फहद अल-सबाह बड़ी नाराजगी के साथ खुलकर बोले और भारत पर क्रिकेट के बढ़ाने के प्रोजेक्ट में साथ देने के बजाय क्रिकेट से पैसा कमाने को आगे रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत के बार-बार हिस्सा न लेने से, क्रिकेट को बढ़ावा देने की कोशिश को नुकसान हो रहा है। मजे की बात ये कि एशिया के और दूसरे क्रिकेट बोर्ड भी अपने शेड्यूल की मुश्किल में फंसे थे, तब भी टीम भेजी। श्रीलंका और बांग्लादेश ने दोनों इवेंट में हिस्सा लिया, जबकि पाकिस्तान ने अपनी महिला टीम भेजी।
आखिरकार 2022 के एशियन गेम्स में नजारा बदला। कोविड-19 महामारी की वजह से स्थगित होने के बाद इस बार गेम्स 2023 में हांगझोऊ में आयोजित हुए। पहली बार, भारत ने पुरुष और महिला दोनों क्रिकेट इवेंट में हिस्सा लिया। शेड्यूल वाला टकराव तो तब भी था क्योंकि सीनियर पुरुष टीम, लगभग उन्हीं दिनों में भारत में ही खेले जा रहे वर्ल्ड कप में व्यस्त थी। ऐसे में भारत ने ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी में नंबर 2 टीम भेजी लेकिन उसमें भी कई चर्चित और बेहतर टैलेंट वाले खिलाड़ी थे। महिला टीम हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में गई।
भले ही देर से भारत ने एशियन गेम्स में क्रिकेट में हिस्सा लिया पर शानदार डेब्यू किया। महिला टीम ने एशियन गेम्स क्रिकेट में भारत का पहला गोल्ड जीता और पुरुष टीम ने भी उसके बाद गोल्ड हासिल किया। इस तरह लगातार दो एशियन गेम्स क्रिकेट इवेंट में हिस्सा लेने से इनकार के बावजूद भारत के पास दो गोल्ड हैं और उनका रिकॉर्ड अन्य किसी भी टीम से बेहतर है।
बीसीसीआई के नजरिए में आए बदलाव ने छवि को बदला। 2010 और 2014 में, साफ आरोप थे कि भारत का ध्यान क्रिकेट को बढ़ावा देने से ज्यादा क्रिकेट के कमर्शियल मुनाफे में है। 2023 तक वैसे भी भारत क्रिकेट में एक बड़ी पावर बन चुका था। वही सिलसिला अब जारी है और 2026 के आइची-नागोया एशियन गेम्स क्रिकेट की चर्चा में एक बार भी ये सवाल नहीं उठा कि क्या भारत टीम भेजने में इच्छुक नहीं? इस बार वे दोनों इवेंट में मौजूदा चैंपियन हैं और फिर से गोल्ड जीतने का इरादा है।