पैरालंपिक पदक विजेता और विश्व चैंपियन पैरा-कंपाउंड तीरंदाज शीतल देवी का मानना है कि खेलो इंडिया योजना पैरा-स्पोर्ट के लिए गेम-चेंजर बन सकती है। उनका मानना है कि इससे दिव्यांग प्रतिभावान बच्चों की पहचान जल्द हो सकेगी और उन्हें सफल होने के लिए जरूरी सहयोग मिल सकेगा।
जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ के एक दूर-दराज गांव से तीरंदाजी में शीर्ष तक पहुंचने के अपने सफर के बारे में शीतल देवी ने कहा, "पैरा-एथलीटों के लिए बड़ी चुनौती प्रतिभा नहीं, बल्कि अवसर का न मिलना है। एक पैरालंपिक चैंपियन के तौर पर मुझे जो प्यार और पहचान मिली है, उसके लिए वर्षों की मेहनत लगी है। किश्तवाड़ की एक लड़की अच्छी कोचिंग और सहयोग मिलने से ही शीतल देवी बन पाई, जिसे दुनिया जानती है।"
उन्होंने कहा, "मेरी कहानी सफलता की है, लेकिन किसी दूर-दराज के गांव में उतना ही सक्षम बच्चा शायद यह भी नहीं जानता होगा कि पैरा स्पोर्ट्स होते हैं। हमारे बीच का फर्क आम तौर पर अवसर का होता है। मैं शुक्रगुजार हूं कि मुझे वह मिला।"