भारतीय बॉक्सर रोहित टोकस अब किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में ब्रॉन्ज मेडल पर 'पंच' लगाते हुए उन्होंने विश्व स्तर पर अपनी काबिलियत को साबित किया। हालांकि, रोहित ने बॉक्सिंग की रिंग में उतरने का फैसला स्कूल में सहपाठी के खिलाफ मिली हार के बाद किया।
रोहित टोकस का जन्म 1 अगस्त, 1993 को दिल्ली के मुनीरका में हुआ। रोहित बचपन में अपने भाइयों संग लड़ते-झगड़ते रहते थे। रोहित के घर के पास ही एक बॉक्सिंग अकादमी थी, जहां बिना कोई पैसा लिए ट्रेनिंग दी जाती थी। रोहित के पिता ने सभी भाइयों को इस अकादमी में ट्रेनिंग लेने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी यह पहल रंग भी लाई। रोहित ने अपने भाइयों के साथ अकादमी जाना शुरू कर दिया। हालांकि, एक से दो साल ट्रेनिंग करने के बाद उन्होंने बॉक्सिंग छोड़ तैराकी शुरू कर दी।
रोहित का स्कूल बदला, तो कक्षा में उनकी मुलाकात एक सहपाठी से हुई, जो बॉक्सिंग की प्रैक्टिस किया करता था। रोहित ने अपने सहपाठी को 'शैडो बॉक्सिंग' करते देखा चैलेंज कर दिया। हालांकि, रोहित को इस मुकाबले में करारी हार मिली और यह हार उनको अंदर तक चुभ गई। रोहित अगले कुछ दिन स्कूल नहीं गए और उन्होंने दोबारा से बॉक्सिंग कोचिंग शुरू कर दी। रोहित ने सहपाठी बॉक्सर को बॉक्सिंग रिंग में हराने की ठानी। रोहित दिन-रात प्रैक्टिस करने में जुट गए और उन्होंने दिल्ली राज्य चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। दो महीने जबरदस्त ट्रेनिंग करने के बाद रोहित अपने स्कूल के उसी सहपाठी को रिंग में हराकर चैंपियन बने।