दुनिया की रैंकिंग में कई चीनी पुरुष एकल बैडमिंटन खिलाड़ी शीर्ष स्थानों पर हैं। ऐसे में ली शिफेंग पर दबाव महसूस होना स्वाभाविक माना जा सकता है, लेकिन दुनिया के नंबर 7 खिलाड़ी ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि टीम में इतने मजबूत खिलाड़ियों का होना दबाव नहीं, बल्कि एक-दूसरे से सीखने और खुद को बेहतर बनाने का मौका है। उनके अनुसार, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा खिलाड़ियों को लगातार आगे बढ़ने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है।
बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान इंदिरा गांधी स्टेडियम में पत्रकारों से बात करते हुए ली ने कहा, "दुनिया में कई टॉप-रैंक वाले चीनी खिलाड़ी हैं, इसलिए मुझे कोई दबाव महसूस नहीं होता। मुझे लगता है कि हम एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं और साथ में बेहतर हो रहे हैं। हम एक टीम के तौर पर खेलने के लिए एक-दूसरे का हौसला बढ़ा रहे हैं।"
पुरुष सिंगल्स में चीन की मजबूती सबसे ऊंचे स्तर पर दिखी है, जिसमें ली दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी शी यू क्यूई और वेंग होंगयांग और लू गुआंगजू जैसे अन्य प्रमुख शटलर के साथ एक मजबूत ग्रुप का हिस्सा हैं। चीन ने मई में थॉमस कप भी अपने नाम किया, जहां उन्होंने फाइनल में फ्रांस को 3-1 से हराया। टीम की इस जीत में ली ने अहम भूमिका निभाई थी।