कुछ खिलाड़ी अपनी काबिलियत से खेल को ही मशहूर बना देते हैं। शतरंज के खेल में ऐसा ही एक दिग्गज खिलाड़ी भारत को भी मिला। नाम विश्वनाथन आनंद। आनंद ने अपने हुनर के दम पर भारत में उस खेल को पहचान दिलाई, जिसके बारे में एक समय पर शायद ही कोई बातचीत होती थी। आनंद पांच बार विश्व चैंपियन बने और वह खेल रत्न पाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी भी हैं।
हालांकि, विश्वनाथन आनंद के लिए 30 मई की तारीख बेहद मायने रखती है। साल 2012 में इसी तारीख को आनंद शतरंज की दुनिया में पांचवीं बार बेताज बादशाह बने थे। मॉस्को में विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने इसराइल के बोरिस गेलफैंड को मैराथन मुकाबले में हराया था। आनंद और गेलफैंड के बीच शुरुआती 12 गेम 6-6 से ड्रॉ रहे थे, जिसके बाद खिताबी मुकाबले का नतीजा टाईब्रेकर की मदद से हुआ था। टाईब्रेकर में आनंद ने 2.5 और 1.5 के अंतर से गेलफैंड को मात दी थी।
कुछ खिलाड़ी अपनी काबिलियत से खेल को ही मशहूर बना देते हैं। शतरंज के खेल में ऐसा ही एक दिग्गज खिलाड़ी भारत को भी मिला। नाम विश्वनाथन आनंद। आनंद ने अपने हुनर के दम पर भारत में उस खेल को पहचान दिलाई, जिसके बारे में एक समय पर शायद ही कोई बातचीत होती थी। आनंद पांच बार विश्व चैंपियन बने और वह खेल रत्न पाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी भी हैं।