भारतीय महिला क्रिकेट की पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज अंजू जैन ने अपने शांत स्वभाव, तकनीक और टीम के प्रति समर्पण से क्रिकेट जगत में खास पहचान बनाई। मैदान पर उनकी मेहनत और जिम्मेदारी ने भारतीय महिला क्रिकेट को मजबूत बनाने में योगदान दिया।
11 अगस्त 1974 को दिल्ली में जन्मीं अंजू जैन को क्रिकेट खेलने का शौक था, लेकिन परिवार ने खेल के साथ पढ़ाई पर भी ध्यान देने की शर्त रख दी। पिता ने साफतौर पर कह दिया था कि अगर अंजू फेल हो गईं, तो उन्हें क्रिकेट खेलने से रोक दिया जाएगा। ऐसे में अंजू ने खेल और पढ़ाई में तालमेल बनाया।
भले ही अंजू भारतीय महिला क्रिकेट टीम की भरोसेमंद विकेटकीपर्स में शुमार रहीं, लेकिन विकेटकीपिंग उनकी पहली पसंद नहीं थी। वह एक बल्लेबाज बनना चाहती थीं, लेकिन दिल्ली की जूनियर टीम के पास कोई विकेटकीपर नहीं था, जिसके बाद अंजू को यह जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने दिल्ली और एयर इंडिया का प्रतिनिधित्व किया।
अंजू ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए कुल 73 मैच खेले हैं। उन्होंने साल 1995 से 2003 के बीच भारत के लिए 8 टेस्ट खेले, जिसकी 12 पारियों में 36.75 की औसत के साथ 441 रन बनाए। इस दौरान 1 शतक और 3 अर्धशतक शामिल रहे।
वहीं, साल 1993 से 2005 के बीच अंजू ने टीम इंडिया के लिए 65 वनडे मुकाबलों में 29.81 की औसत के साथ 1,729 रन बनाए। इस फॉर्मेट में दाएं हाथ की बल्लेबाज ने 12 अर्धशतक जमाए। अंजू विकेट के पीछे भी भरोसेमंद साबित हुई हैं। बतौर विकेटकीपर उन्होंने 59 खिलाड़ियों को स्टंप आउट किया, जबकि 45 खिलाड़ियों को कैच आउट कराया।
अंजू को 'मिड-ऑफ' और 'मिड-विकेट' के बीच 'वी' आकार के क्षेत्र में खेलना काफी पसंद रहा। वह हवा में शॉट लगाने से भी नहीं हिचकीं। उन्हें अपने दौर में गेंद पर जोरदार प्रहार के लिए जाना जाता था।
वहीं, साल 1993 से 2005 के बीच अंजू ने टीम इंडिया के लिए 65 वनडे मुकाबलों में 29.81 की औसत के साथ 1,729 रन बनाए। इस फॉर्मेट में दाएं हाथ की बल्लेबाज ने 12 अर्धशतक जमाए। अंजू विकेट के पीछे भी भरोसेमंद साबित हुई हैं। बतौर विकेटकीपर उन्होंने 59 खिलाड़ियों को स्टंप आउट किया, जबकि 45 खिलाड़ियों को कैच आउट कराया।
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अंजू जैन ने सिखाया है कि सफलता के लिए प्रतिभा के साथ निरंतर मेहनत, अनुशासन और धैर्य जरूरी है। उन्होंने टीम की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए जिम्मेदारी निभाई। उनका समर्पण बताता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, आत्मविश्वास बनाए रखकर लगातार प्रयास करने से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सकता है।