भारतीय क्रिकेट के प्रसिद्ध ऑलराउंडर बापू नाडकर्णी को उनकी बेहद कसी हुई गेंदबाजी के लिए जाना जाता है, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में लगातार 21 मेडन ओवर फेंकने का रिकॉर्ड बनाया। आज भी उनके अनुशासन और नियंत्रण की मिसाल दी जाती है।

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4 अप्रैल 1933 को नासिक (महाराष्ट्र) में जन्मे रमेशचंद्र गंगाराम नाडकर्णी ने 1951/52 में फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत की, जिसमें शानदार प्रदर्शन की बदौलत साल 1955 में भारतीय टीम में जगह बना ली।

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16 दिसंबर को बापू नाडकर्णी न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेलने उतरे, जिसकी पहली इनिंग में 68 रन की नाबाद पारी खेलकर सभी को प्रभावित किया। भारत ने यह मुकाबला ड्रॉ करवाया था।

बापू नाडकर्णी ने 1960-61 में पाकिस्तान के खिलाफ ब्रैबोर्न स्टेडियम में 4 विकेट हासिल किए थे। इसके बाद दिल्ली में खेले गए टेस्ट में 63 रन की पारी खेलने के साथ 5 विकेट भी हासिल किए। इस सीरीज के पांचों मैच ड्रॉ रहे थे।

10-15 जनवरी 1964 के बीच भारत ने चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच खेला, जिसमें नाडकर्णी ने लगातार 21 मेडन ओवर फेंके। इस पारी में उन्होंने कुल 32 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें महज 5 रन दिए। इस दौरान 27 ओवर मेडन रहे। इंग्लैंड की टीम 190.4 ओवरों के खेल में सिर्फ 317 रन ही बना सकी और भारत ने मैच ड्रॉ करवाया। अक्टूबर 1964 में चेन्नई में खेले गए टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले में कुल 11 विकेट हासिल किए।

नाडकर्णी एक काबिल ऑलराउंडर थे, जिन्होंने फरवरी 1964 में कानपुर में इंग्लैंड के विरुद्ध 52 रन और 122 रन की पारियां खेली थीं। दोनों पारियों में वह नाबाद रहे। यह मैच ड्रॉ रहा था।

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बापू नाडकर्णी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल 41 टेस्ट खेले, जिसमें 25.70 की औसत के साथ 1,414 रन बनाए। इसमें 1 शतक और 7 अर्धशतक शामिल रहे। वहीं, गेंदबाजी में कुल 88 विकेट हासिल किए। क्रिकेट के सबसे मशहूर इकोनॉमिकल गेंदबाजों में से एक नाडकर्णी ने अपने टेस्ट करियर में प्रति ओवर सिर्फ 1.67 रन दिए।

नाडकर्णी एक काबिल ऑलराउंडर थे, जिन्होंने फरवरी 1964 में कानपुर में इंग्लैंड के विरुद्ध 52 रन और 122 रन की पारियां खेली थीं। दोनों पारियों में वह नाबाद रहे। यह मैच ड्रॉ रहा था।

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17 जनवरी 2020 को बापू नाडकर्णी ने 86 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। अनुशासन, धैर्य और ईमानदारी को अपने खेल का आधार बनाने वाले नाडकर्णी आज के दौर में भी खिलाड़ियों के लिए आदर्श हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर अभ्यास से उन्होंने विश्व स्तर पर पहचान बनाई। उनका सादा जीवन, टीम भावना और खेल भावना युवाओं को मेहनत और संयम का महत्व सिखाती है।

Article Source: IANS
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