डीबी देवधर: वो प्रोफेसर, जो दिग्गज क्रिकेटर्स के आइडल थे

Updated: Tue, Jan 13 2026 16:20 IST
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भारतीय क्रिकेट के महान प्रशासक और दूरदर्शी व्यक्तित्व के डीबी देवधर को भारतीय क्रिकेट का 'ग्रैंड ओल्ड मैन' कहा जाता है, जिन्होंने रणजी ट्रॉफी के विकास में अहम योगदान दिया।

दिनकर बलवंत देवधर का जन्म 14 जनवरी 1892 को पुणे में हुआ था। एसपी कॉलेज में संस्कृत के प्रोफेसर देवधर को क्रिकेट का शौक था। यही वजह रही कि उन्होंने 1911/12 में अपने फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत की।

आक्रामक बल्लेबाज डीबी देवधर बेहद सीधे-सादे कप्तान थे, जिन्हें 1930 के दशक में महाराष्ट्र को एक प्रमुख प्रथम श्रेणी टीम के रूप में स्थापित करने का श्रेय जाता है। हालांकि, वह कभी भारत की ओर से टेस्ट मैच नहीं खेल सके।

भारत ने साल 1932 में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था, लेकिन उस समय तक देवधर 40 साल के हो गए थे। ऐसे में उन्हें भारतीय टीम के लिहाज से बूढ़ा माना गया।

81 फर्स्ट क्लास मुकाबलों की 133 पारियों में 39.32 की औसत के साथ 4,552 रन बनाने वाले देवधर ने 9 शतक लगाए। इस दौरान 246 रन की पारी भी खेली। गेंदबाजी में 11 विकेट हासिल किए।

डीबी देवधर अपने दौरे के इतने शानदार बल्लेबाज थे कि जब भारत ने साल 1932 में अपना पहला टेस्ट खेला, तब वह टीम के कई खिलाड़ियों के आदर्श थे। 1939-41 में देवधर ने महाराष्ट्र को रणजी ट्रॉफी जिताई।

भले ही 40 की उम्र में डीबी देवधर को टीम इंडिया में मौका नहीं मिल सका, लेकिन 50 साल की उम्र में भी वह फिटनेस के मामले में युवा खिलाड़ियों को पछाड़ते थे।

कुछ वक्त बाद डीबी देवधर क्रिकेट से रिटायर हुए, लेकिन खेल के प्रति प्रेम जरा भी कम न था। उन्होंने खेल पत्रकार के रूप में करियर शुरू किया और साल 1946 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के साथ गए। अगले साल जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर पहुंची, तो देवधर भी वहां मौजूद थे।

भले ही 40 की उम्र में डीबी देवधर को टीम इंडिया में मौका नहीं मिल सका, लेकिन 50 साल की उम्र में भी वह फिटनेस के मामले में युवा खिलाड़ियों को पछाड़ते थे।

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इस महानतम बल्लेबाज को बीसीसीआई का उपाध्यक्ष और महाराष्ट्र क्रिकेट संघ का अध्यक्ष भी चुना गया। इसके अलावा, उन्होंने नेशनल सेलेक्टर का पद भी संभाला। 24 अगस्त 1993 को 101 साल की उम्र में डीबी देवधर ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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