India Wins T20 World Cup: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ई-कॉमर्स साइट्स को निर्देश जारी करेगा कि वे पूर्व भारतीय क्रिकेटर और मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर के नाम और तस्वीरों का बिना अनुमति इस्तेमाल कर बनाए गए ऑनलाइन कंटेंट को हटाएं।

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जस्टिस ज्योति सिंह की सिंगल-जज बेंच ने कहा कि मेटा और गूगल समेत टेक प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिए जाएंगे कि वे गंभीर की ओर से बताए गए आपत्तिजनक लिंक्स को हटा दें और ऐसे कंटेंट को अपलोड करने वाली संस्थाओं की जानकारी दें।

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दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर के पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स को भी सुरक्षा देते हुए उनकी सहमति के बिना ऑनलाइन चल रहे आपत्तिजनक पोस्ट और कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान, गंभीर की ओर से यह दलील दी गई कि उनके नाम, आवाज और तस्वीरों का बिना इजाजत के कमर्शियल मकसदों के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स और डीपफेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी शामिल है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा, गूगल और अमेजन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे गंभीर की पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाले आपत्तिजनक यूआरएल (लिंक) और ऑनलाइन पोस्ट को हटा दें। जस्टिस सिंह ने कहा कि एक विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा, जिसमें ऐसे कंटेंट के पीछे की संस्थाओं की बेसिक सब्सक्राइबर जानकारी (बीएसआई) देने के निर्देश भी शामिल होंगे।

यह घटनाक्रम गंभीर की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट के कमर्शियल डिवीजन में दायर एक याचिका के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने 'डिजिटल रूप से किसी और की पहचान अपनाने के एक सुनियोजित अभियान' का आरोप लगाया है, जिसमें एआई-सक्षम फेस-स्वैपिंग और वॉइस-क्लोनिंग टूल्स शामिल हैं।

गंभीर ने दलील दी है कि इंस्टाग्राम, एक्स, यू-ट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिसमें वायरल डीपफेक वीडियो भी शामिल हैं जिन्हें झूठे तौर पर उनसे जोड़ा गया है, और जिन्होंने लोगों का काफी ध्यान खींचा है। इस याचिका में सभी प्रतिवादियों पर बिना सहमति के उनके नाम, तस्वीर, आवाज या व्यक्तित्व का इस्तेमाल करने पर स्थायी रोक लगाने की मांग की गई है। इसके साथ ही, 2.5 करोड़ रुपए के हर्जाने और उल्लंघन करने वाली सामग्री को हटाने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।

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यह घटनाक्रम गंभीर की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट के कमर्शियल डिवीजन में दायर एक याचिका के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने 'डिजिटल रूप से किसी और की पहचान अपनाने के एक सुनियोजित अभियान' का आरोप लगाया है, जिसमें एआई-सक्षम फेस-स्वैपिंग और वॉइस-क्लोनिंग टूल्स शामिल हैं।

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गंभीर से पहले भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर, आध्यात्मिक गुरु और 'आर्ट ऑफ लिविंग' के संस्थापक श्री श्री रविशंकर, अभिनेता नागार्जुन, काजोल, ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन, गायक जुबिन नौटियाल, फिल्म निर्माता करण जौहर और पॉडकास्टर राज शमानी ने अपनी पहचान, रूप-रंग या एआई-जनित नकल के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत से सुरक्षा हासिल की है।

Article Source: IANS

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