रमन लांबा: स्टाइलिश क्रिकेटर, जो छोटे से करियर में फैंस के चहेते बन गए
2 जनवरी 1960 को मेरठ में जन्मे रमन लांबा ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम इंडिया में जगह बनाई। भारतीय टीम में भी उनका डेब्यू यादगार रहा, जहां उन्होंने अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मैच में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 53 गेंदों में 1 छक्के और 8 चौकों की मदद से 64 रन की पारी खेली थी।
दाएं हाथ के इस आक्रामक शैली के स्टाइलिश बल्लेबाज ने 1989 नेहरू कप में कृष्णमाचारी श्रीकांत के साथ पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतकीय साझेदारियां की थीं।
पाकिस्तान के विरुद्ध दोनों सलामी बल्लेबाजों ने 120 रन जुटाए, जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले विकेट के लिए 115 रन की साझेदारी की। इन दोनों ही मुकाबलों में रमन लांबा ने 57-57 रन की यादगार पारियां खेली थीं।
रमन लांबा ने साल 1986 में वनडे फॉर्मेट में 10 मैच खेले, जिसमें 32.11 की औसत के साथ 289 रन बनाए। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध राजकोट में 102 रन की पारी भी शामिल रही। अगले साल उन्होंने 11 मुकाबलों में 22 की औसत से 220 रन बनाए। हालांकि, 1988 में उन्हें सिर्फ एक ही वनडे मुकाबला खेलने का मौका मिल सका। साल 1989 में रमन ने 10 मुकाबलों में 29.55 की औसत से 266 रन टीम के खाते में जोड़े। इस दौरान उनके बल्ले से 3 अर्धशतक भी निकले।
रमन लांबा ने अपने छोटे से करियर में भारत की ओर से कुल 32 वनडे खेले, जिसमें 27 की औसत के साथ 783 रन बनाए। इस दौरान 1 शतक और 6 अर्धशतक लगाए। वहीं, 4 टेस्ट की 5 पारियों में उन्होंने 102 रन जुटाए।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में रमन लांबा का प्रदर्शन लाजवाब था, जहां उन्होंने 121 मुकाबलों में 53.84 की औसत के साथ 8,776 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 31 शतक और 27 अर्धशतक निकले। वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लगातार रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे, जिसमें दो तिहरे शतक शामिल हैं। वहीं, लिस्ट ए क्रिकेट के 82 मुकाबलों में उन्होंने 36.85 की औसत के साथ 2,543 रन टीम के खाते में जुटाए।
रमन लांबा ने अपने छोटे से करियर में भारत की ओर से कुल 32 वनडे खेले, जिसमें 27 की औसत के साथ 783 रन बनाए। इस दौरान 1 शतक और 6 अर्धशतक लगाए। वहीं, 4 टेस्ट की 5 पारियों में उन्होंने 102 रन जुटाए।
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रमन लांबा चाहते थे कि वह 45 की उम्र तक दिल्ली के लिए खेलें, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। साल 1998 में बांग्लादेश में एक क्लब मैच खेलने के दौरान फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर फील्डिंग करते समय उन्हें सिर पर गहरी चोट आई, जिसके बाद वह कोमा में चले गए। 22 फरवरी 1998 को इस खिलाड़ी ने दुनिया को अलविदा कह दिया।