भारतीय महिला क्रिकेट टीम टी20 विश्व कप 2026 के लिए इंग्लैंड में मौजूद है। वनडे विश्व कप 2025 जीतने के बाद टीम इंडिया को टी20 विश्व कप में भी खिताब के प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। कप्तान हरमनप्रीत कौर का कहना है कि अब ज्यादा प्रशंसक महिला क्रिकेट से जुड़ रहे हैं। बढ़ता हुआ समर्थन हम सभी को लगातार बेहतर करने और अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है।
आईएएनएस के साथ खास बातचीत में हरमनप्रीत कौर ने कहा, "मैं बाहरी दबाव के बारे में ज्यादा सोचने की कोशिश नहीं करती। मेरा ध्यान तैयारी, टीम में योगदान देने और वर्तमान पल में रहने पर होता है। इतने सालों में, मुझे एहसास हुआ है कि इस स्तर पर उम्मीदें हमेशा रहेंगी। अहम यह है कि उन्हें अपने प्रक्रिया से ध्यान न भटकने दिया जाए।"
बेंगलुरु में बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में की गई कड़ी मेहनत पर हरमनप्रीत ने कहा, "इस तरह के कैंप किसी बड़े टूर्नामेंट से पहले एक ग्रुप के तौर पर लय और आत्मविश्वास बनाने में मदद करते हैं। युवा खिलाड़ियों को कॉम्पिटिटिव माहौल में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका भी मिलता है। हमने टीम में हर खिलाड़ी की भूमिका स्पष्ट करने पर काफी काम किया, जो टी20 क्रिकेट में बहुत जरूरी है क्योंकि यहां हालात बहुत तेजी से बदलते हैं। सपोर्ट स्टाफ ने यह पक्का किया कि तैयारी सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और रणनीतिक भी हो।"
टी20 में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी पर हरमनप्रीत ने कहा, "टी20 क्रिकेट लगातार बदल रही है। खिलाड़ी के तौर पर हमें भी खेल की जरूरतों के हिसाब से खुद को बदलना होगा। ज्यादा आक्रामक होने का मतलब अपने नैचुरल गेम को पूरी तरह बदलना नहीं, बल्कि ज्यादा प्रोएक्टिव होना और हालात के हिसाब से सोच-समझकर जोखिम उठाना है। कोच अमोल सर के साथ हुई चर्चाओं से उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिली जहां मैं गेंदबाजों पर ज्यादा दबाव बना सकती थी और स्कोरिंग के बेहतर विकल्प तलाश सकती थी।"
बल्लेबाजी के अलावा हरमन एक बेहद ऊर्जावान क्षेत्ररक्षक भी हैं। इस पर उन्होंने कहा, "बल्लेबाजी मेरे लिए हमेशा खास रहेगी, लेकिन फील्डिंग से एक अलग तरह का संतोष मिलता है क्योंकि यह पूरी तरह से जागरूकता, कमिटमेंट और मौके पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बारे में है। डाइव लगाना, गेंद का पीछा करना और अतिरिक्त प्रयास करना टीम के साथियों को भी प्रेरित करता है और मैदान पर खेल की तीव्रता को बढ़ाता है।"
टी20 में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी पर हरमनप्रीत ने कहा, "टी20 क्रिकेट लगातार बदल रही है। खिलाड़ी के तौर पर हमें भी खेल की जरूरतों के हिसाब से खुद को बदलना होगा। ज्यादा आक्रामक होने का मतलब अपने नैचुरल गेम को पूरी तरह बदलना नहीं, बल्कि ज्यादा प्रोएक्टिव होना और हालात के हिसाब से सोच-समझकर जोखिम उठाना है। कोच अमोल सर के साथ हुई चर्चाओं से उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिली जहां मैं गेंदबाजों पर ज्यादा दबाव बना सकती थी और स्कोरिंग के बेहतर विकल्प तलाश सकती थी।"
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महिला क्रिकेट से दर्शकों के बढ़ते जुड़ाव पर भारतीय कप्तान ने कहा, "जब लोग असल समय में मैचों, खिलाड़ियों, प्रदर्शन और अहम पलों पर सक्रिय रूप से चर्चा करते हैं, तो इससे खेल के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और उसकी दृश्यता बढ़ती है। बातचीत खेल को मुख्यधारा के क्रिकेट कल्चर में सामान्य बनाने में मदद करती हैं।