मौजूदा स्थिति ये है कि आईपीएल 2022 सीजन के लिए खिलाड़ियों का नीलामी 12 और 13 फरवरी 2022 को होगा। ये तारीख ही क्यों? इस के पीछे जो भी वजह रही हों- इनमें से एक ये जरूर है कि अंडर 19 वर्ल्ड कप फाइनल उससे पहले खेला जा चुका होगा। आईपीएल 2022 मेगा नीलामी से इस वर्ल्ड कप का क्या नाता? जवाब- वर्ल्ड कप में दिखाए प्रदर्शन पर, भारत के अंडर 19 क्रिकेटरों की टेलेंट का एक और सबूत मिले और आईपीएल टीम उन्हें कॉन्ट्रेक्ट दे सकें।

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इसी से जुड़ा सच ये है कि अंडर 19 टीम भले ही वर्ल्ड कप जीतने के लिए खेल रही है- खिलाड़ी मान रहे हैं कि कोई दिन ऐसा नहीं, जब उनकी आपसी बातचीत में आईपीएल नीलामी का जिक्र नहीं आता। आईपीएल नीलामी की चर्चा उन्हें भटका सकती है। जब राहुल द्रविड़ अंडर 19 वर्ल्ड कप में टीम के कोच थे तो उन्होंने तो आईपीएल नीलामी की ख़बरों को ही टीम से ब्लैक-आउट करा दिया था। ये किस्सा आज का नहीं, आईपीएल के 2008 के नीलामी से चला आ रहा है और विराट कोहली इसकी सबसे अच्छी मिसाल हैं। अंडर 19 क्रिकेटरों को 2008 में पहली बार कॉन्ट्रेक्ट देने के लिए बीसीसीआई ने जो किया वह बड़ा अनोखा था- आज लगेगा बड़ा अजीब था।

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वह भारत में टी 20 की क्रांति का दौर था- 2007 में वर्ल्ड चैंपियन बने। 2008 में विराट कोहली की टीम ने अंडर 19 वर्ल्ड कप जीता। इन दो जीत ने आईपीएल का रोमांच एकदम बढ़ा दिया।18 अप्रैल 2008 से आईपीएल खेला गया। इसके लिए, एक नहीं दो बार नीलामी आयोजित हुई थी।

पहली नीलामी : 20 फरवरी 2008 को, जबकि अंडर 19 वर्ल्ड कप शुरू हुआ 17 फरवरी को- बीसीसीआई ने अंडर 19 वर्ल्ड कप टीम के किसी क्रिकेटर का नाम नीलामी के पूल में नहीं डाला ताकि क्रिकेटरों का पूरा ध्यान आईपीएल पर न रहे। इस बात का भी पूरा ध्यान रखा गया कि कहीं ऐसा न हो कि आईपीएल का पैसा इस कम उम्र में इनके मनोविज्ञान पर ही असर डाल दे।

दूसरा नीलाम : 11 मार्च 2008 को। तब तक भारत अंडर 19 वर्ल्ड कप जीत चुका था- इसलिए बोर्ड ने उसी दिन अंडर 19 क्रिकेटरों के लिए प्लेयर्स ड्राफ्ट भी आयोजित किया। पैसा इन युवा खिलाड़ियों का दिमाग ख़राब न कर दे, इसलिए तय किया कि इनके लिए प्लेयर्स ड्राफ्ट करेंगे और तय रकम मिलेगी- जो रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं उनके लिए 50 हज़ार डॉलर और बाकी सभी के लिए 30 हज़ार डॉलर।

अगर नीलामी नहीं तो कैसे तय हो कि किस टीम को कौन सा खिलाड़ी मिलेगा? इसके लिए अमेरिकन फुटबॉल लीग का सिस्टम लागू कर दिया। कैसे :

  • सबसे पहले सभी 8 टीम का नाम लॉटरी से निकाला। जो नंबर 1, वह सबसे पहले अंडर 19 टीम से अपनी पसंद का खिलाड़ी चुने- उसके बाद नंबर 2 और नंबर 3.. और इसी तरह खिलाड़ी चुनने का सिलसिला चला।
  • 8 टीम ने खिलाड़ी ले लिए तो नंबर उलट गया- अब सबसे पहले नंबर 7 टीम ने खिलाड़ी चुना, उसके बाद नंबर 6 ने और इसी तरह नंबर 5 ने....।
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लॉटरी में नंबर 1 टीम थी दिल्ली कैपिटल्स यानि कि मनपसंद खिलाड़ी चुनने का पहला हक़ उनका। दिल्ली की आईपीएल टीम, विराट कोहली का शहर दिल्ली और अंडर 19 वर्ल्ड कप विजेता टीम के कप्तान थे वे तब- तो किसे चुनना चाहिए था? इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। तब भी उन्होंने विराट कोहली को नहीं- प्रदीप सांगवान को चुना क्योंकि उन्हें प्रदीप में भविष्य का ऑलराउंडर नजर आया। दूसरा नंबर था रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का- उन्होंने बिना देरी विराट कोहली को चुन लिया।

इस तरह विराट कोहली को पहला कॉन्ट्रेक्ट मिला 50 हजार डॉलर का- उस समय एक डॉलर था 40.28 रूपए के बराबर यानि कि कुल मिले 20.14 लाख रूपए। इस समय उनका आईपीएल कॉन्ट्रेक्ट 15 करोड़ रूपए का है- पिछले साल तक ये 17 करोड़ रूपए था। आज तक इस बात पर हैरानी जाहिर की जाती है कि कैसे दिल्ली कैपिटल्स ने विराट कोहली जैसे क्रिकेटर को चुनने का मौका छोड़ दिया और उन्हें बैंगलोर ने चुन लिया पर असली मजे की बात ये है कि जिस दिल्ली ने विराट कोहली को छोड़ा उन्होंने कभी आईपीएल को नहीं जीता और जिस बैंगलोर ने विराट कोहली को लिया- उन्होंने भी अभी तक आईपीएल को नहीं जीता।

एक और बड़ा अद्भुत रिकॉर्ड ये है कि विराट कोहली कभी आईपीएल नीलामी में नहीं बिके- पहला कॉन्ट्रेक्ट प्लेयर्स ड्राफ्ट से तो उसके बाद से वे रिटेन ही होते आ रहे हैं।

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Charanpal Singh Sobti
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