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Cricket Matches Disrupted By Earthquake: कुछ दिन पहले, बांग्लादेश के ढाका में आयरलैंड के दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन का खेल अचानक रोक दिया। तब आयरलैंड की पहली पारी में 56 वें ओवर की दूसरी गेंद फेंकी ही थी। खेल क्यों रोका: असल में ढाका में वहां के समय के हिसाब से सुबह करीब 10.38 बजे 5.7 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया। इस भूकंप का असर कोलकाता, पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों और असम के गुवाहाटी में भी महसूस किया गया। कुछ दिन बाद दूसरा इंडिया-साउथ अफ्रीका टेस्ट यहीं गुवाहाटी में खेले।

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जब भूकंप आया तो मेहमान टीम का स्कोर 165/5 था। खेल रुका तो खिलाड़ी और ऑफिशियल हैरान रह गए। खिलाड़ी शेरे बांग्ला नेशनल स्टेडियम में ग्राउंड पर ही रुके रहे और टीमों से जुड़े बाकी सभी लोग भी ग्राउंड पर आ गए जबकि दर्शक अपनी सुरक्षा के लिए इधर-उधर भागे। लगभग 4 मिनट बाद खेल फिर से शुरू हुआ। कई लोगों के लिए यह एक नया अनुभव था पर इनमें आयरलैंड के हेड कोच हेनरिक मलान नहीं थे। वे तो बोले, ‘न्यूज़ीलैंड में रहते हुए मैंने तो और भी कुछ भूकंप को झेला है।’

प्रेस बॉक्स में मौजूद बांग्लादेश के स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट अरिफुल इस्लाम रोनी का कहना था, ‘मैच चल रहा था। मैं प्रेस बॉक्स में था। बड़ी डरावनी सी स्थिति बन गई। प्रेस बॉक्स गिर गया - तो बड़ा भयानक सा नजारा था।' वैसे, शायद पहली बार भूकंप की वजह से किसी टेस्ट मैच में खेल रोका गया लेकिन क्रिकेट में भूकंप का ज़िक्र पहली बार नहीं हो रहा। ऐसे ही कुछ और किस्से देखते हैं:

2016 में रिक्टर स्केल पर 6.8 के भूकंप ने उत्तर भारत को हिला दिया था। तब गुजरात लायंस टीम, किंग्स XI पंजाब के विरुद्ध आईपीएल मैच के लिए मोहाली के एक होटल में थी। दोपहर करीब 3:58 बजे के करीब झटके महसूस किए तो खिलाड़ियों को उनके होटल से बाहर निकाला। विदेशी खिलाड़ियों डेल स्टेन, एरोन फिंच और एंड्रयू टाई ने सोशल मीडिया पर इस बारे में खूब लिखा। टाई ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया वेबसाइट से इंटरव्यू में बताया, ‘मैं अपने बेड के एक कोने पर बैठकर क्रिकेट बैट ठीक कर रहा था कि तभी मुझे लगा कि बेड हिल रहा है। मैंने कमरे में चारों ओर देखा तो और कुछ चीज़ें भी हिल रही थीं और मुझे अंदाजा हो गया था कि ये भूकंप ही होगा।’

क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल का जब भी जिक्र हो तो 2011 में क्राइस्टचर्च में आया भूकंप याद आ जाता है। रिक्टर स्केल पर 6.3 की तेजी वाले इस भूकंप में 100 से ज़्यादा लोग मरे थे और बड़ी तबाही हुई। संयोग से जब यहां 2016 में न्यूज़ीलैंड-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट खेले (इस स्टेडियम में खेला दूसरा टेस्ट) तो टेस्ट का तीसरा दिन इस भूकंप की पांचवीं वर्षगांठ था। उस दिन लंच ब्रेक के दौरान, ठीक दोपहर 12.51 बजे (वही समय जब भूकंप आया था) एक मिनट का मौन रखा।

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एक और हैरानी की बात ये कि 2016 के टेस्ट के लिए भी जब दोनों टीम क्राइस्टचर्च पहुंचीं तो उन्होंने भी दो बार झटके महसूस किए थे। हेगले ओवल तो क्राइस्टचर्च का मुख्य क्रिकेट बना ही भूकंप की वजह से था। 2011 के भूकंप से लैंकेस्टर पार्क को इतना नुकसान हुआ था कि नए स्टेडियम में खेलने लगे।

2022 में, पोर्ट ऑफ़ स्पेन के क्वींस पार्क ओवल में जब 5.2 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया तो ज़िम्बाब्वे-आयरलैंड अंडर-19 वर्ल्ड कप का मैच चल रहा था। कुछ देर खेल रोक दिया था। कमेंटेटर एंड्रयू लियोनार्ड तो चिल्ला पड़े थे, ‘हम... मुझे लगता है, अभी हमारे यहां भूकंप आ रहा है। बॉक्स में। सच में यहां भूकंप आ रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे हमारे पीछे कोई ट्रेन नहीं गुज़री, बल्कि पूरा क्वींस पार्क ओवल मीडिया सेंटर हिल रहा है।’

जब आयरलैंड के स्पिनर मैथ्यू हम्फ्रीज़, 6वें ओवर की पांचवीं बॉल ब्रायन बेनेट को फेंक रहे थे तो एक्शन दिखाने वाला फ्रंट-ऑन कैमरा तेज़ी से हिलने लगा। खेल नहीं रोका हालांकि ब्रॉडकास्टर का कैमरा हिल रहा था और झटके महसूस किए गए।

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भारत में भूकंप की सबसे मजेदार क्रिकेट स्टोरी नवंबर 1937 की है जब लाहौर में लॉर्ड टेनिसन XI और भारत के बीच पहला अनऑफिशियल ‘टेस्ट’ चल रहा था। चार दिन के इस मैच के दूसरे दिन, बाग-ए-जिन्ना (लॉरेंस गार्डन्स) ग्राउंड पर खेल के दौरान लगभग 90 सेकंड तक भूकंप का झटका महसूस किया गया। ये रिकॉर्ड में दर्ज है कि पवेलियन में लगी एक घड़ी ज़ोर से जमीन पर गिर गई। खेल दो मिनट के लिए रोक दिया और उसके बाद मैच फिर से शुरू हुआ। स्लिप में खड़े लॉर्ड टेनिसन ने जब ग्राउंड के आसपास की इमारतें हिलते देखीं तो उन्हें पहले तो ये लगा कि उन्हें सन स्ट्रोक आ गया है। बाद में एहसास हुआ कि ये तो भूकंप है।

चरनपाल सिंह सोबती

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Charanpal Singh Sobti
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