एक खबर आई कि थ्री लायंस के कप्तान हैरी केन (Harry Kane) फ्लोरिडा में अपनी टीम के, फीफा वर्ल्ड कप ट्रेनिंग बेस पर, टीम के साथ क्रिकेट प्रैक्टिस में बड़े जोश से खेल रहे थे। इतना ही नहीं, एमसीसी ने भी फुटबॉल खिलाड़ियों की बैट और बॉल से प्रेक्टिस टेक्निक को सही बताया है और इसलिए ही तो क्रिकेट लॉ बनाने वालों ने भी. ये खबर आने पर, अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज पर इंग्लिश फुटबॉल खिलाड़ियों की क्रिकेट स्किल्स पर कमेंट किया, ‘ये सीधे उसी टेक्नीक से खेल रहे हैं जैसा एमसीसी मैनुअल में है'। फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच पर प्री-टूर्नामेंट ट्रेनिंग कैंप में, हैरी केन ने न सिर्फ तेज गेंदबाजी की, बैटिंग भी की।
अगर फुटबॉल खिलाड़ी क्रिकेट खेल सकते हैं, तो यकीन मानिए, कई क्रिकेटर टॉप लेवल पर फुटबॉल खेल चुके हैं, यहां तक कि फीफा वर्ल्ड कप में भी उनका जिक्र है। सभी की ऐसी लिस्ट में पहला और सबसे लोकप्रिय नाम ऑस्ट्रेलिया की एलिस पेरी (Ellyse Perry) का होगा जो दो बार आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप विजेता हैं तो साथ में 2011 में फीफा वर्ल्ड कप में मटिल्डा (ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल टीम) के लिए भी खेली थीं।
वह कई खेलों की माहिर हैं और अगर हम सिर्फ फुटबॉल की बात करें, तो अपने फुटबॉल करियर के दौरान सेंट्रल कोस्ट मरीनर्स, कैनबरा यूनाइटेड और सिडनी एफसी के लिए तो खेला ही, मटिल्डा के लिए 18 मैच खेले। 2011 फीफा महिला वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में स्वीडन के विरुद्ध 1-3 की हार वाले मैच में ऑस्ट्रेलिया का एकमात्र गोल भी किया था। फुटबॉल वर्ल्ड कप में गोल करना कोई साधारण रिकॉर्ड नहीं है।
एलिस पेरी इतनी बेहतर खिलाड़ी हैं कि सिर्फ अपनी क्रिकेट की उपलब्धियों की बदौलत ही दुनिया के टॉप खिलाड़ियों में शामिल हो सकती हैं। आमतौर पर ये मानते हैं कि वह आईसीसी और फीफा दोनों वर्ल्ड कप में खेलने वाली अकेली खिलाड़ी हैं, पर ये सही नहीं।
क्लेयर टेलर (Clare Taylor) भी कुछ कम नहीं थीं। वह 1993 में लॉर्ड्स में क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने वाली इंग्लैंड टीम में थीं और दो साल बाद, 1995 में, फीफा वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के लिए खेलीं। टेलर यॉर्कशायर से हैं और ब्रोंटे तथा लिवरपूल लेडीज क्लब के लिए फुटबॉल खेला। क्लेयर, पुरुष और महिला दोनों में, अकेली ऐसी खिलाड़ी हैं जो क्रिकेट और फुटबॉल दोनों के वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के लिए खेलीं। स्वीडन में 1995 के फीफा महिला वर्ल्ड कप में इंग्लैंड की टीम में थीं और ये टीम क्वार्टर फाइनल तक खेली।
सच तो ये है कि टेलर को क्रिकेट से भी ज्यादा, फुटबॉल पसंद था। जब इंग्लैंड फुटबॉल टीम से बाहर कर दिया तो उसके बाद ही उन्होंने क्रिकेट पर सही से फोकस किया। जब एफए ने इंग्लैंड के पहले इंटरनेशनल मैच की 50वीं सालगिरह के मौके पर अपनी लीगेसी नंबर स्कीम शुरू की तो टेलर को 82वें नंबर पर रखा था। जब अक्टूबर 2008 में आईसीसी ने पहली बार महिला बैटिंग रैंकिंग घोषित की तो वे उसमें नंबर 1 थीं। 2000 के बर्थडे ऑनर्स में क्वीन ने उन्हें ‘क्रिकेट, एसोसिएशन फुटबॉल और हॉकी में उनके योगदान के लिए’ ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (MBE) का मेंबर बनाया था।
सर विवियन रिचर्ड्स (Sir Vivian Richards) के पास सही मायने में फुटबॉल के लिए फुर्सत ही नहीं थी और इसलिए उन्हें क्रिकेट में, फुटबॉल पिच से ज्यादा चर्चा मिली। तब भी वेस्टइंडीज के ये दिग्गज जब भी मौका मिला एंटीगा की नेशनल फुटबॉल टीम के लिए खेले और 1974 के वर्ल्ड कप फाइनल्स के लिए उनके क्वालिफिकेशन कैंपेन में भी खेले थे। वहां एंटीगा अपने चारों मैच हार गया (त्रिनिदाद एंड टोबैगो से तो 11-0 से और सूरीनाम से 6-0 से)।
विश्वास कीजिए जिन सर ज्योफ हर्स्ट (Sir Geoff Hurst) के नाम इंग्लिश फुटबॉल के इतिहास में सबसे मशहूर हैट्रिक (वर्ल्ड कप फाइनल में हैट्रिक स्कोर करने वाले अकेले) का रिकॉर्ड है और 1966 में वेम्बली में वर्ल्ड कप जीते, वे भी 1962 में एसेक्स के लिए (लेंकशायर के विरुद्ध) एक काउंटी चैंपियनशिप मैच खेले थे। वे एक बेहतरीन फील्डर थे और कभी-कभी विकेटकीपिंग भी करते थे लेकिन क्रिकेट के लिए ज्यादा समय नहीं निकाल पाए।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सबसे मशहूर फुटबॉल खिलाड़ियों में से एक बॉबी मूर (Bobby Moore) भी बड़े अच्छे क्रिकेटर थे। संयोग देखिए इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने वर्ल्ड कप जीता 2010 में, ये दो इंग्लिश क्रिकेटर तो 44 साल पहले ही इंग्लैंड के लिए वर्ल्ड कप ले आए थे।
सीबी फ्राई और डेनिस कॉम्पटन बड़े अच्छे फुटबॉलर थे लेकिन उनका फुटबॉल वर्ल्ड कप से कोई ख़ास कनेक्शन नहीं बन पाया। वैसे 1953 की एशेज सीरीज़ में, विली वॉटसन (Willie Watson) नाम के एक खिलाड़ी भी कॉम्पटन के साथ खेले थे। वॉटसन (23 टेस्ट खेले, दो टेस्ट 100 बनाए और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 25000 से ज़्यादा रन उनके नाम हैं), उन बहुत कम खिलाड़ियों में से एक हैं जो क्रिकेट और फुटबॉल दोनों में इंग्लैंड के लिए खेले। वह 1950 में ब्राजील में हुए फुटबॉल वर्ल्ड कप में इंग्लिश टीम में थे लेकिन मैनेजर की स्कीम में फिट न बैठे और शायद इसलिए कोई मैच नहीं खेले।
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ये चर्चा बेहद मशहूर स्टीव बकनर (Steve Bucknor) के ज़िक्र के बिना अधूरी रह जाएगी। इस मशहूर क्रिकेट अंपायर ने फीफा वर्ल्ड कप में तो अंपायरिंग नहीं की, लेकिन क्रिकेट और फुटबॉल वर्ल्ड कप दोनों इवेंट्स में अंपायरिंग की और ऐसा करने वाले पहले थे। वह फीफा के मान्यता प्राप्त फुटबॉल रेफरी थे और वर्ल्ड कप क्वालीफाइंग मैचों में रेफ़्री रहे।