राजस्थान रॉयल्स के लिए 2 अप्रैल को जोस बटलर ने डीवाई पाटिल स्टेडियम में, गर्म दोपहर में 15 हजार से ज्यादा दर्शकों को शानदार स्ट्रोक प्ले की ट्रीट दी- 68 गेंद में सेंचुरी। इसी से 193-8 का वह स्कोर बना जो मुंबई इंडियंस जैसी टीम के लिए भी चुनौती साबित हुआ और रॉयल्स को जीत मिली। जोस बटलर का स्ट्राइक रेट 147.05 पर क्या आपने नोट किया कि स्ट्राइक रेट के हिसाब से ये आईपीएल की सबसे धीमी सेंचुरी है। 

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क्या याद है कि इसका पिछला रिकॉर्ड किसके नाम था? सचिन तेंदुलकर (151.51) के नाम- 2011 सीजन में कोच्चि टस्कर्स केरल के विरुद्ध 66 गेंद में सेंचुरी (100*- 12 चौके और 3 छक्के) बनाई थी। बटलर ने रिकॉर्ड तेंदुलकर से छीनकर उनकी उस सेंचुरी की याद ताजा करा दी जो कई तरह से ख़ास होने के बावजूद, उनकी सबसे कम चर्चित सेंचुरी में से एक रही- शायद इसलिए कि इस सेंचुरी पर 'सबसे धीमी' का टैग लगा रहा और उस पर उनकी सेंचुरी के बावजूद उनकी टीम मैच हारी। 

सचिन तेंदुलकर की सेंचुरी की बात होती है तो हर चर्चा उनकी 100 इंटरनेशनल सेंचुरी पर ही सिमट कर रह जाती है। ये ख़ास थे तो, उस दौर में आईपीएल में सेंचुरी बनाना भी कोई कम बात नहीं थी। 15 अप्रैल 2011 का दिन, वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई में मैच और कोच्चि टस्कर्स केरल के सामने थी मुंबई इंडियंस। कप्तान और ओपनर तेंदुलकर खचाखच भरे वानखेड़े स्टेडियम में बल्लेबाजी करने उतरे तो दर्शकों को और क्या चाहिए था? 

नंबर 3 अंबाती रायुडू (53) ने साथ दिया और सेंचुरी पार्टनरशिप की- 116 रन। तेंदुलकर ने 14वें ओवर में अपने 50 को पूरा किया- 43 गेंद में। इसके बाद गियर बदला- घरेलू दर्शकों के सामने सनसनीखेज बल्लेबाजी और मस्ती के साथ चौके और छक्के लगाए। हर जुबान पर एक ही बात थी- क्या सेंचुरी बनेगी? सेंचुरी के बारे में तब पहली बार सोचा गया जब तेंदुलकर 57 गेंद में 77 रन पर थे। आखिरी ओवर फेंका विनय कुमार ने और आखिरी 4 गेंद पर 10 रन चाहिए थे। तीसरी गेंद पर चौका- स्कोर हुआ 94 रन।

तनाव ऐसा कि तेंदुलकर को सेंचुरी का मौका देने के लिए चौथी गेंद पर रायुडू ने तेंदुलकर को स्ट्राइक देने के लिए जोखिम उठाकर भी दूसरे रन के लिए आवाज लगाई- भले ही खुद आउट हो गए पर स्ट्राइक तेंदुलकर को देने का इरादा पूरा कर लिया था।  आखिरी 2 गेंद पर 5 रन की जरूरत थी। 5 वीं गेंद पर चौका लगाया- स्कोर हुआ 99 रन।

जैसे ही विनय कुमार आख़िरी गेंद फेंकने दौड़े- मानो पूरा देश तेंदुलकर के साथ था। एक आसान सिंगल के लिए इसे लांग ऑफ पर धकेल दिया और 100 पूरे हो गए। 66 गेंद में सेंचुरी बन गई। आखिरी  50 रन सिर्फ 23 गेंद पर। 

कई ख़ास बातें थीं इसके साथ : आईपीएल में सचिन तेंदुलकर की पहली और एकमात्र सेंचुरी, आईपीएल में सेंचुरी बनाने वाले 5वें भारतीय और पहले कप्तान। क्लासिकल स्ट्रेट ड्राइव अगर आकर्षण थे तो उस दिन तो धोनी का 'हेलीकॉप्टर शॉट' भी लगाया। लगभग दो हफ्ते पहले ही तो इसी स्टेडियम में टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप जीता था। 2011 वर्ल्ड कप में भारत की जीत से देश भर में जश्न का माहौल था। अब सचिन तेंदुलकर की वह सेंचुरी जिसका 2008 सीजन से इंतजार किया जा रहा था।

तेंदुलकर तब तक इंटरनेशनल क्रिकेट में 99 सेंचुरी बना चुके थे और पूरे देश में इंतजार हो रहा था इंटरनेशनल क्रिकेट में उनकी 100 वीं सेंचुरी का- बन गई ये सेंचुरी। भारतीय क्रिकेटर में से तब तक सिर्फ मनीष पांडे, युसूफ पठान, मुरली विजय और पॉल वल्थाटी ने ही आईपीएल में 100 रन बनाए थे। इसमें कोई शक नहीं कि किस्मत ने भी उनका पूरा साथ दिया- 0 पर रन आउट होने से बचे, अंपायर पॉल रीफेल ने विनय कुमार की दो एलबीडब्ल्यू अपील को ठुकरा दिया- दोनों पर तेंदुलकर आउट थे, और स्टंप्स के पीछे करीबी कॉल ने भी उन्हें वापस नहीं भेजा- गेंदबाज थिसारा परेरा थे। तब कोच्चि के पास गेंदबाजी में रुद्र प्रताप सिंह, विनय कुमार, रमेश पोवार, रवींद्र जडेजा, थिसारा परेरा और रैफी गोमेज़ जैसे नाम थे।

तेंदुलकर ने अपने आईपीएल करियर में 34.83 औसत से कुल 2334 रन बनाए- 13 फिफ्टी और एक सेंचुरी। 2010 आईपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे- 89* के टॉप स्कोर के साथ 618 रन और ऑरेंज कैप हासिल की। सचिन तेंदुलकर के बैट से उस 2011 सीजन में 16 मैचों (16 पारियों) में 1 सेंचुरी और 2 फिफ्टी के साथ 553 रन बने।

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Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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